Fake Caste Certificate Scam: नागपुर और पुणे के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में फर्जी अनुसूचित जनजाति (ST) जाति वैधता प्रमाणपत्रों के जरिए प्रवेश लेने का बड़ा घोटाला सामने आने के बाद अब इसकी आंच पूरे राज्य तक फैलती दिख रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने आरक्षित कोटे के तहत हुए सभी संदिग्ध प्रवेशों की राज्यव्यापी जांच के आदेश दे दिए हैं.
CET सेल ने संदिग्ध आवेदनों की दोबारा जांच शुरू की
घोटाले के उजागर होते ही राज्य सामायिक प्रवेश परीक्षा कक्ष (CET Cell) सक्रिय हो गया है. CET सेल ने विभिन्न व्यावसायिक और तकनीकी पाठ्यक्रमों में आरक्षित सीटों पर हुए प्रवेशों से जुड़े संदेहास्पद आवेदनों की पुनः जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अधिकारियों के अनुसार, जांच में यदि किसी भी स्तर पर फर्जीवाड़ा पाया गया तो संबंधित प्रवेश रद्द किए जा सकते हैं.

Fake Caste Certificate Scam: क्या है फर्जी जाति प्रमाण पत्र घोटाला
आदिवासी विकास विभाग का सतर्कता दल भी मैदान में
दूसरी ओर, आदिवासी विकास विभाग का सतर्कता दल (विजिलेंस स्क्वाड) भी सक्रिय हो गया है. सतर्कता दल ने राज्यभर के सभी महाविद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने यहां ST श्रेणी के छात्रों के जाति वैधता प्रमाणपत्रों का मूल दस्तावेजों से मिलान कर सत्यापन करें. कॉलेजों को प्रमाणपत्रों की रिपोर्ट निर्धारित समय‑सीमा में सौंपने को कहा गया है.
सरकारी तंत्र में मिलीभगत की आशंका
जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह घोटाला केवल बिचौलियों तक सीमित नहीं है. शुरुआती पड़ताल में कुछ सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है. इसी कारण जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और संबंधित विभागों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं.
नागपुर में 50 से अधिक संदिग्ध छात्र, 11 लोगों पर FIR
नागपुर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इंजीनियरिंग और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले 50 से अधिक छात्रों की पहचान की गई है. इस मामले में नागपुर के पांचगांव पुलिस थाने में प्रकरण दर्ज किया गया है. पुलिस ने एक सहायक प्रोफेसर सहित कुल 11 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है.
गोविंदराव वंजारी कॉलेज से खुले राज़
यह पूरा मामला मुख्य रूप से गोविंदराव वंजारी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में उजागर हुआ, जहां जांच के दौरान कई फर्जी जाति वैधता प्रमाणपत्र सामने आए. यहीं से राज्यव्यापी फर्जीवाड़े के नेटवर्क का खुलासा हुआ.
2 से 3 लाख में मिलते थे फर्जी प्रमाणपत्र
जांच में पता चला है कि एक संगठित गिरोह छात्रों से 2 से 3 लाख रुपये की राशि लेकर उन्हें आदिवासी विकास विभाग के फर्जी जाति वैधता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराता था. इन्हीं दस्तावेजों के जरिए छात्रों ने नागपुर और पुणे के कई इंजीनियरिंग कॉलेजों में ST कोटे से प्रवेश हासिल किया.
पात्र आदिवासी छात्रों के साथ हुआ अन्याय
फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए प्रवेश लेने से वास्तविक और पात्र आदिवासी छात्रों के हक पर सीधा असर पड़ा है. इसे लेकर सामाजिक संगठनों और अभिभावकों में भारी रोष देखा जा रहा है.
पुणे के कॉलेज भी जांच के दायरे में
नागपुर की तर्ज पर पुणे के भी कुछ प्रतिष्ठित कॉलेजों में इसी तरह के फर्जी प्रवेश होने का संदेह जताया जा रहा है. वहां अभिभावकों, छात्रों और बिचौलियों से पूछताछ की जा रही है. सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में और नामों का खुलासा हो सकता है.
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