अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को इस साल भी हेलीकॉप्टर सेवा का लाभ नहीं मिलेगा. प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए लगातार दूसरे वर्ष हेलीकॉप्टर संचालन की अनुमति नहीं दी है. इस फैसले से सुरक्षा एजेंसियों को राहत मिली है. वहीं कई श्रद्धालु निराश भी हैं. खासकर बुजुर्ग, दिव्यांग और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को इससे परेशानी हो सकती है.
अमरनाथ यात्रा देश की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है. हर साल लाखों श्रद्धालु दक्षिण कश्मीर में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. यात्रा के लिए मुख्य रूप से पहलगाम और बालटाल मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है.
बुजुर्गों के लिए काफी मदगार थी हेलीकॉप्टर सेवा
पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हेलीकॉप्टर सेवा का उपयोग करते रहे हैं. इससे यात्रा का समय कम लगता था. शारीरिक मेहनत भी कम करनी पड़ती थी. बुजुर्गों और बीमार यात्रियों के लिए यह सुविधा काफी मददगार मानी जाती थी.

लेकिन हाल के वर्षों में सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा के दौरान हवाई गतिविधियों पर अधिक ध्यान देना शुरू किया है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यात्रा के समय हेलीकॉप्टरों की नियमित उड़ान से सुरक्षा प्रबंधन प्रभावित हो सकता है.
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क्यों बंद की गई हेलीकॉप्टर सेवा
अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबलों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है. हवाई निगरानी और सुरक्षा अभियानों के लिए संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा. इसी वजह से हेलीकॉप्टर सेवा को मंजूरी नहीं दी गई है.
यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इस बार व्यापक इंतजाम किए गए हैं. यात्रा मार्गों और बेस कैंपों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं. ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी. आधुनिक संचार प्रणाली और खुफिया तंत्र को भी सक्रिय रखा जाएगा.
काफी कठिन है अमरनाथ यात्रा
हेलीकॉप्टर सेवा बंद होने का असर उन लोगों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा जो कम समय में यात्रा पूरी करना चाहते थे. पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों पर पैदल यात्रा लंबी और कठिन मानी जाती है. हालांकि प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अन्य व्यवस्थाएं उपलब्ध रहेंगी. घोड़े, पालकी और जरूरी परिवहन सेवाएं पहले की तरह चलेंगी. चिकित्सा सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है. आपात स्थिति में तुरंत सहायता देने की व्यवस्था की गई है.
स्थानीय कारोबार से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि इस फैसले का आर्थिक असर भी पड़ सकता है. हेलीकॉप्टर सेवा से जुड़े कर्मचारियों और कंपनियों को नुकसान होने की आशंका है. वहीं कई स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा के लिए यह कदम जरूरी है. विशेषज्ञों का भी मानना है कि अमरनाथ यात्रा जैसी बड़ी धार्मिक यात्रा में सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा है. उनका कहना है कि यदि सुरक्षा एजेंसियां किसी खतरे की आशंका के आधार पर ऐसा फैसला लेती हैं तो उसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है.
कुल मिलाकर, इस साल अमरनाथ यात्रा बिना हेलीकॉप्टर सेवा के आयोजित होगी. प्रशासन का कहना है कि उसकी प्राथमिकता सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा कराना है. वहीं श्रद्धालुओं से दिशा-निर्देशों का पालन करने और सहयोग देने की अपील की गई है.
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