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वृद्ध सास को सिर पर टब में बिठाकर 250 KM की ब्रज परिक्रमा कर रही बहू, देखें VIDEO

मथुरा से सास-बहू के अटूट प्रेम, सेवा और समर्पण की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है. हरियाणा की एक बहू अपनी 90 वर्षीय सास की वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी करने के लिए उन्हें सिर पर बैठाकर ब्रज की 84 कोस परिक्रमा करा रही है.

रिश्तों में बढ़ते बिखराव और दूरियों के बीच ब्रजभूमि से श्रद्धा, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों की एक ऐसी अनूठी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है. हरियाणा के पलवल जनपद के हताना गांव की रहने वाली मशहूर हरियाणवी लोकगायिका काजल चौधरी अपनी वृद्ध सास चन्द्री देवी की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें अपने सिर पर उठाकर ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा करा रही हैं.

वर्षों पुराना सपना, बहू ने बनाया अपना संकल्प

चन्द्री देवी उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहां शरीर ने उनका साथ देना छोड़ दिया है. वह चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं, लेकिन मन में वर्षों से ब्रज परिक्रमा करने की गहरी अभिलाषा थी. जब स्वास्थ्य कारणों से यह असंभव सा लगने लगा, तो उनकी बहू काजल चौधरी ने अपनी सास की इस अधूरी मनोकामना को अपने जीवन का संकल्प बना लिया. काजल अपनी सास को एक प्लास्टिक के टब में बैठाकर, उसे अपने सिर पर उठाए लगभग 250 किलोमीटर लंबी दुर्गम ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा पर निकल पड़ी हैं.

भीषण गर्मी भी नहीं डिगा सकी हौसला

काजल चौधरी, लोकगायिका ने कहा क‍ि "सास सिर्फ सास नहीं, माँ के समान होती हैं. उन्होंने मुझे हमेशा अपनी बेटी की तरह स्नेह और सम्मान दिया है. अगर आज उम्र के इस पड़ाव पर उनकी कोई इच्छा अधूरी रह जाए, तो एक बहू और बेटी के रूप में यह मेरी विफलता होगी. मैं बस अपना कर्तव्य निभा रही हूँ."

भीषण गर्मी, उमस और थका देने वाले लंबे रास्तों के बावजूद काजल के चेहरे पर शिकन तक नहीं है. वह पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ गांव-गांव, तीर्थ-तीर्थ और धाम-धाम आगे बढ़ रही हैं. परिक्रमा मार्ग पर टब में बैठी चन्द्री देवी के चेहरे पर संतोष, श्रद्धा और आनंद की झलक साफ देखी जा सकती है. उनकी आँखों में उस सपने के साकार होने के आंसू हैं, जिसे उन्होंने अपनी मजबूरियों के आगे मरा हुआ मान लिया था.

समाज के लिए बनीं संस्कार की जीवंत मिसाल

ब्रजभूमि में इन दिनों यह अनूठी परिक्रमा श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच गहरी चर्चा का विषय बनी हुई है. जो कोई भी इस दृश्य को देखता है, वह भावुक होकर काजल के जज्बे को सलाम करता है. लोग इसे केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आधुनिक दौर में सेवा, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों की सबसे बड़ी मिसाल मान रहे हैं. सास-बहू के इस पावन रिश्ते ने समाज को यह संदेश दिया है कि यदि मन में प्रेम, सम्मान और समर्पण हो, तो दुनिया का हर असंभव कार्य संभव हो जाता है.

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