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This Article is From Jan 10, 2026

एकनाथ शिंदे, फडणवीस को गिरफ्तार करने की साजिश की पूरी कहानी EXCLUSIVE-स्टिंग, गवाह को धमकी और एक गायब लॉग बुक

यह मामला उस वक्त चर्चा में आया था, जब 2024 में विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर ने सदन में आरोप लगाया था कि एमवीए सरकार के दौरान राजनीतिक बदले की भावना से बड़े नेताओं को निशाना बनाने की कोशिश की गई.

एकनाथ शिंदे और फडणवीस को मारने की जब हुई थी साजिश
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  • MVA सरकार के दौरान देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को झूठे मामलों में फंसाने की साजिश की गई थी
  • SIT की जांच में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव में गलत मामले दर्ज कराने का आरोप पाया गया
  • बॉम्बे हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान आरोपों के समर्थन में वीडियो प्रस्तुत किया गया है
मुंबई:

महाराष्ट्र की राजनीति और पुलिस तंत्र से जुड़ा एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया था कथित तौर पर महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल के दौरान वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को कथित तौर पर झूठे और मनगढ़ंत मामलों में फंसाने की साजिश रची गई थी. मामले में  जांच के लिए राज्य के गृह विभाग ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था.

गृह विभाग द्वारा गठित इस SIT की कमान मुंबई पुलिस के जॉइंट कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) सत्यनारायण चौधरी को सौंपी गई थी. टीम में SRPF के DIG राजीव जैन, मुंबई पुलिस के डीसीपी, नवनाथ ढावले और एसीपी आदिक राव पोल शामिल थे ,एसआईटी को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए थे.

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला उस वक्त चर्चा में आया था, जब 2024 में विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर ने सदन में आरोप लगाया था कि एमवीए सरकार के दौरान राजनीतिक बदले की भावना से बड़े नेताओं को निशाना बनाने की कोशिश की गई. इसके बाद व्यवसायी संजय पुनमिया ने दावा किया कि उनके पास एक स्टिंग वीडियो मौजूद है. इस कथित वीडियो में मुंबई पुलिस के सेवानिवृत्त एसीपी सरदार पाटिल बातचीत करते नजर आते हैं। वीडियो में यह कहा जा रहा है कि तत्कालीन शीर्ष पुलिस अधिकारियों के दबाव में ऐसे केस दर्ज किए गए, जिनका मकसद देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को गिरफ्तार करवाना था.

हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

यह पूरा विवाद तब और गहरा गया, जब मुंबई के कुलाबा पुलिस स्टेशन और ठाणे नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए तत्कालीन सरकारी वकील शेखर जगताप ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया. इस याचिका का विरोध करते हुए शिकायतकर्ता संजय पुनमिया ने अपने वकील रिजवान मर्चेंट के ज़रिए कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की और उसी दौरान यह वीडियो भी अदालत में पेश किया गया. वीडियो में यह दावा किया गया कि मामला राजनीतिक दबाव में दर्ज किया गया था और इसके पीछे का उद्देश्य विपक्षी नेताओं को कानूनी जाल में फंसाना था.

SIT रिपोर्ट में क्या खुलासा?

SIT की जांच में सामने आया है कि ठाणे नगर पुलिस थाने में वर्ष 2016 में दर्ज एक पुराने मामले की दोबारा जांच के नाम पर कथित तौर पर साजिश रची गई. इस रिपोर्ट में तत्कालीन डीजीपी और मुंबई पुलिस आयुक्त रहे संजय पांडे, तत्कालीन उपायुक्त लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, चार्जशीट दाखिल हो जाने के बावजूद केस की पुनः जांच करवाई गई और इसी दौरान फडणवीस और शिंदे को आरोपी बनाने का दबाव डाला गया. SIT ने यह भी कहा है कि कुछ मामलों में गवाहों पर बयान बदलने और नाम जोड़ने का दबाव बनाया गया.

फॉरेंसिक जांच और सबूत

संजय पुनमिया द्वारा दिए गए ऑडियो-वीडियो क्लिप्स की जांच मुंबई के कलिना स्थित फॉरेंसिक लैब में कराई गई, जिसमें बातचीत की प्रामाणिकता की पुष्टि हुई है. इसके अलावा सरकारी गाड़ी की लॉगबुक के कुछ पन्ने गायब मिलने को भी सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश माना गया है.

आगे क्या?

SIT की रिपोर्ट अब राज्य सरकार को सौंप दी गई है. सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने और कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है.

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