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बीएमसी चुनाव में हार से कांग्रेस की अंदरूनी फूट आई सामने... भाई जगताप बोले- वर्षा गायकवाड़ दे इस्‍तीफा

बीएमसी चुनाव के बाद कांग्रेस की अंतर्कलह खुलकर सामने आ गई है. भाई जगताप ने मुंबई कांग्रेस अध्‍यक्ष का इस्‍तीफा मांगा है. साथ ही कांग्रेस की रणनीति और गठबंधनों को लेकर भी खुलकर नाराजगी जताई है.

बीएमसी चुनाव में हार से कांग्रेस की अंदरूनी फूट आई सामने... भाई जगताप बोले- वर्षा गायकवाड़ दे इस्‍तीफा
  • BMC चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद मुंबई कांग्रेस में नेतृत्व संकट और अंतर्कलह स्पष्ट रूप से सामने आ गई है.
  • भाई जगताप ने मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ को हार का जिम्मेदार बताया और इस्तीफे की मांग की.
  • भाई जगताप ने मतगणना प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाते हुए ईवीएम और काउंटिंग पर संदेह जताया है.
मुंबई:

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव नतीजों के सामने आते ही मुंबई कांग्रेस में जबरदस्त अंतर्कलह खुलकर सामने आ गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, विधान परिषद सदस्य और मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भाई जगताप ने पार्टी की मौजूदा मुंबई अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें चुनावी हार का जिम्मेदार ठहराया है और तुरंत इस्तीफे की मांग की है. भाई जगताप के तीखे बयानों से साफ हो गया है कि BMC चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस के भीतर नेतृत्व संकट गहराता जा रहा है. 

भाई जगताप ने कहा कि BMC चुनाव में जो रुझान और आंकड़े सामने आए हैं, वे कांग्रेस के इतिहास में अभूतपूर्व रूप से दुर्भाग्यपूर्ण हैं. उन्होंने कहा, “कांग्रेस की हालत इससे पहले कभी इतनी खराब नहीं थी. इस चुनाव में जो स्थिति बनी है, वह बेहद चिंताजनक है. दिल्ली में बैठे कांग्रेस नेतृत्व को अब गंभीरता से विचार करना चाहिए. सिर्फ चिंता नहीं, अब चिंतन भी जरूरी है कि आखिर कांग्रेस में हो क्या रहा है.”

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मुंबई कांग्रेस में लीडरशिप की कमी... नेतृत्व पर सवाल

भाई जगताप ने मुंबई कांग्रेस के संगठनात्मक नेतृत्व को पूरी तरह विफल बताते हुए कहा कि ठीक तरीके से नेतृत्व ही नहीं हुआ. उनका आरोप है, “मुंबई कांग्रेस में नेतृत्व की भारी कमी रही. संगठन को जिस तरह से चुनाव में संभालना चाहिए था, वैसा बिल्कुल नहीं हुआ. आज जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उसकी पूरी जिम्मेदारी मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ की है.” उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वर्षा गायकवाड़ को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

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काउंटिंग और चुनाव आयोग को भी कटघरे में खड़ा किया

भाई जगताप ने सिर्फ पार्टी नेतृत्व ही नहीं, बल्कि मतगणना प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा, “इस तरह की काउंटिंग मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी नहीं देखी, जिस तरीके से मतगणना हो रही है, वह बेहद संदेहास्पद है.”

एक और तीखा बयान देते हुए उन्होंने कहा, “शिवसेना की सत्ता BMC से गई है, लेकिन यह बीजेपी की जीत नहीं है. यह जीत चुनाव आयोग और EVM की है.”

भाई जगताप ने आरोप लगाया कि, “चुनाव आयोग आंख बंद करके अंधों की तरह बैठा है. उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा है. आयोग ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है और सरकार के पक्ष में काम कर रहा है.”

प्रकाश आंबेडकर साथ न होते तो...: भाई जगताप 

कांग्रेस की रणनीति और गठबंधनों पर भी भाई जगताप ने खुलकर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि अगर प्रकाश आंबेडकर की पार्टी साथ न होती तो कांग्रेस की स्थिति और भी खराब हो सकती थी. 

वहीं राष्ट्रीय समाज पक्ष (Rashtriya Samaj Paksha) के साथ गठबंधन को लेकर उन्होंने बड़ा सवाल उठाया और कहा, “इस पार्टी के साथ गठबंधन करने का कोई मतलब नहीं था. इन्हें 12 सीटें देना गलत फैसला साबित हुआ. इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को हुआ है.”

मुस्लिम वोटों के बंटवारे को बताया बड़ा नुकसान

भाई जगताप ने चुनावी हार का एक बड़ा कारण वोटों का विभाजन खासकर मुस्लिम वोटों का बंटवारा बताया. उन्होंने कहा, “इस चुनाव में वोट का विभाजन हुआ है. मुस्लिम वोटों का बंटवारा नहीं होना चाहिए था. यह बात हमें गंभीरता से समझने की जरूरत है.”

भाई जगताप ने कहा कि इस चुनाव में इतनी खामियां थीं कि अगर उन्हें गिनाने बैठें तो सूची खत्म नहीं होगी. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा, “जब मैंने पहले कुछ बातें रखी थीं, तो मेरी बातों का मजाक उड़ाया गया. आज वही बातें सच साबित हो रही हैं.”

मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग और बढ़ता संकट

अंत में भाई जगताप ने साफ शब्दों में दोहराया कि, “मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ को इस हार की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए.”

BMC चुनाव नतीजों के बाद यह बयानबाजी बताती है कि मुंबई कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर घमासान अब सार्वजनिक हो चुका है.  आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी हाईकमान इस अंदरूनी बगावत पर क्या रुख अपनाता है. नेतृत्व में बदलाव या फिर संकट को नजरअंदाज करने की पुरानी रणनीति?

फिलहाल, इतना तय है कि BMC चुनाव ने कांग्रेस की हार से ज्‍यादा पार्टी की अंदरूनी कमजोरियों को उजागर कर दिया है. 
 

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