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मराठा आरक्षण पर चर्चा कर रही है मंत्रिमंडल समिति, निकालेंगे संवैधानिक समाधान: सीएम फडणवीस

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “मराठा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए अधिकृत मंत्रिमंडल उप-समिति जरांगे की मांगों पर चर्चा कर रही है. समिति कानूनी और संवैधानिक ढांचे के भीतर समाधान ढूंढ निकालेगी.”

मराठा आरक्षण पर चर्चा कर रही है मंत्रिमंडल समिति, निकालेंगे संवैधानिक समाधान: सीएम फडणवीस
  • सीएम फडणवीस ने मराठा आरक्षण मुद्दे पर संवैधानिक समाधान खोजने के लिए मंत्रिमंडल उप-समिति गठित की है
  • मनोज जरांगे ने मराठा समुदाय के लिए ओबीसी श्रेणी में 10% आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई में भूख हड़ताल शुरू की है
  • सरकार ने मराठा और ओबीसी समुदाय के बीच तनाव नहीं बढ़ाने की अपील की है और विपक्ष को राजनीतिकरण से बचने को कहा है
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मुंबई:

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि मराठा आरक्षण के मुद्दे पर राज्य मंत्रिमंडल की उप-समिति मनोज जरांगे की मांगों पर चर्चा कर रही है और वह संवैधानिक ढांचे के भीतर एक वैध समाधान ढूंढ निकालेगी. मराठा आरक्षण कार्यकर्ता जरांगे के अपनी मांगों को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने को लेकर उन्होंने कहा कि जरांगे को केवल एक दिन के लिए विरोध-प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई है. उन्होंने विरोध-प्रदर्शन जारी रखने के लिए नई अनुमति मांगी है और पुलिस इस पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी.

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ये सच है कि कुछ छिटपुट जगहों पर आंदोलनकारियों ने रास्ता रोको किया था. थोड़ा ट्रैफिक बाधित किया, लेकिन पुलिस द्वारा उनसे बात करने के बाद उन जगहों पर भी आंदोलनकारियों ने सहयोग किया है और उसे खाली कर दिया है. उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन बंबई उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार काम कर रहा है और उसे उसके आदेशों का पालन करना होगा.

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मुख्यमंत्री कहा, “मराठा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए अधिकृत मंत्रिमंडल उप-समिति जरांगे की मांगों पर चर्चा कर रही है. समिति कानूनी और संवैधानिक ढांचे के भीतर समाधान ढूंढ निकालेगी.”

जरांगे मराठों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में 10 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहे हैं. वह चाहते हैं कि मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए, जो ओबीसी श्रेणी में शामिल एक कृषक जाति है, ताकि वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के पात्र बन सकें. हालांकि, ओबीसी समुदाय जरांगे की मांग का विरोध कर रहे हैं.

फडणवीस ने कहा कि उनकी सरकार मराठों को ओबीसी के विरुद्ध खड़ा करने के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी समुदाय के साथ अन्याय नहीं होने देगी. पिछले दस वर्षों में मेरी सरकार ने मराठों के कल्याण के लिए बहुत कुछ किया है, जो किसी अन्य सरकार ने नहीं किया. मराठों को शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण देने के लिए पिछले साल लागू किया गया 10 प्रतिशत कोटा कानूनी रूप से वैध है.

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उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण मुद्दे से राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना की. फडणवीस ने कहा, “इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करें और ओबीसी तथा मराठों के बीच तनाव बढ़ाने की कोशिश न करें. हमारा सामाजिक ताना-बाना महत्वपूर्ण है.”

सीएम ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में ही जब-जब हमारी गठबंधन सरकार थी, इसी दौरान मराठा समाज को न्याय मिला है, किसी और समय में मराठा समाज को न्याय नहीं मिला है, आरक्षण देने का काम भी हमने ही किया है.

वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए मैंने मराठा समाज को 10% आरक्षण दिया. आज भी उस आरक्षण का लाभ मराठा समाज को मिल रहा है. साथ ही कुणबी रिकॉर्ड खोजने के लिए जस्टिस शिंदे कमेटी हमने गठित की थी, वह भी काम कर रही है और लाखों कुणबी रिकॉर्ड भी उसमें मिले हैं. उसका भी लाभ उन्हें हो रहा है. साथ ही सारथी के माध्यम से भी विभिन्न कोर्सेस हमने शुरू किए हैं, उसका भी समाज को फायदा हो रहा है.

शिंदे ने कहा कि पहले 2016 में, 2017 में भी देवेंद्र फडणवीस जब मुख्यमंत्री थे, उस समय भी मराठा समाज को आरक्षण दिया गया था, हाईकोर्ट में टिका भी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में कुछ लोग गए उसके खिलाफ गए. जिस तरह से उस आरक्षण के लिए प्रयास करना चाहिए था, ध्यान देना चाहिए था, दुर्भाग्य से वैसा नहीं हुआ, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद आरक्षण 10 फीसदी मैंने दिया.

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उन्होंने कहा कि मराठा समाज के भाई-बहनों से मेरा एक ही विनम्र निवेदन है कि समाज में कहीं भी कोई दरार पैदा ना हो, ओबीसी समाज का आरक्षण कम करके मराठा समाज को आरक्षण मिले, ऐसी भूमिका नहीं होनी चाहिये. मराठा समाज के लिए जो भी किया जा सका, वह किया है, आगे भी वे जो उचित है, जो हमें कानून के दायरे में रहकर करना होगा.

इधर मनोज जारंगे पाटिल के ख़िलाफ इजाजत की शर्तों का पालन नहीं करने को लेकर शिकायत दर्ज की गई है. वकील गुणरत्न सदावर्ते ने ऑनलाइन शिकायत कर मनोज जरांगे-पाटिल और उनके सहयोगियों के खिलाफ BNS 2023 और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए.

इसमें कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करना न्यायालय की अवमानना है. कानून-व्यवस्था भंग करने और हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने के लिए जरांगे-पाटिल को गिरफ्तार किया जाए.

वकील गुणरत्न सदावर्ते ने कहा कि यह एक ऐसा विरोध प्रदर्शन है, जिसमें कानून का उल्लंघन किया गया है. मैंने इस बारे में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. यह विरोध प्रदर्शन कानून का उल्लंघन करते हुए हो रहा है. मैं पुलिस से बात कर रहा हूं. मनोज जारंगे के पास सिर्फ़ एक मुखौटा है, इसके पीछे राजनीति हो रही है.

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