क्रांतिकारी विरासत और गणेशभक्ति के ऐतिहासिक संगम के रूप में पहचान रखने वाले श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति के 135वें गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई है. क्रांति दिन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक वासा पूजन के साथ इस वर्ष के गणेशोत्सव की विशेष थीम ‘श्री गणेश स्वर्णधाम' का अनावरण किया गया. माता-पिता के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कृति के ‘मातृदेवो भव, पितृदेवो भव' के संदेश पर आधारित यह काल्पनिक देखावा आगामी गणेशोत्सव में श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण बनने की तैयारी में है.
वासा पूजन के साथ गणेशोत्सव की शुरुआत
श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति मंदिर परिसर में आयोजित समारोह में पुणे पुलिस के उपायुक्त (जोन-1) कृषिकेश रावले, अशोक इलेक्ट्रिकल के अशोकभाई शाह तथा उत्सव प्रमुख एवं ट्रस्टी पुनीत बालन के हाथों उत्सव मंडप का पारंपरिक तरीके से वासा पूजन किया गया.
वासा पूजन के बाद इस वर्ष तैयार किए जाने वाले ‘श्री गणेश स्वर्णधाम' देखावे का अनावरण किया गया. ढोल-ताशों की गूंज और ‘गणपति बप्पा मोरया' के जयघोष के बीच हुए इस आयोजन के साथ ही 135वें गणेशोत्सव की तैयारियों का औपचारिक आगाज हुआ. ट्रस्ट की ओर से इस वर्ष भी धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश को जोड़ने वाली प्रस्तुति तैयार की जा रही है.
‘मातृदेवो भव, पितृदेवो भव' होगा थीम का केंद्र
‘श्री गणेश स्वर्णधाम' की संकल्पना भारतीय संस्कृति में माता-पिता के स्थान और उनके प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता पर आधारित है. भगवान गणेश को पार्वतीनंदन और शिवपुत्र के रूप में केंद्र में रखते हुए देखावे के माध्यम से माता-पिता के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कारों के महत्व को दर्शाया जाएगा.
थीम में ‘मातृदेवो भव, पितृदेवो भव' की सनातन परंपरा को प्रमुखता दी जाएगी. इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं, विशेषकर नई पीढ़ी तक यह संदेश पहुंचाना है कि जीवन में माता-पिता का स्थान सर्वोच्च है और उनके प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
हर वर्ष अलग-अलग सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विषयों पर आधारित देखावे प्रस्तुत करने वाले श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति ट्रस्ट की ओर से इस बार भी भव्य प्रस्तुति की तैयारी की जा रही है.
डीजेमुक्त गणेशोत्सव और दहीहंडी की परंपरा
उत्सव प्रमुख एवं ट्रस्टी पुनीत बालन ने कहा कि गणेशोत्सव की धार्मिक पवित्रता और पारंपरिक स्वरूप को कायम रखते हुए आयोजन किया जाएगा. उन्होंने कहा, “क्रांतिकारकों के गणपति माने जाने वाले श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति के 135वें गणेशोत्सव मंडप का वासा पूजन और देखावे का अनावरण क्रांति दिन पर हुआ. इस वर्ष ‘श्री गणेश स्वर्णधाम' नामक काल्पनिक देखावा उभारा जाएगा. उत्सव धार्मिक पवित्रता और परंपरा के साथ मनाया जाएगा. पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी हम डीजेमुक्त गणेशोत्सव और दहीहंडी मनाएंगे.”
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का प्रयास गणेशोत्सव की परंपरा और पवित्रता को बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं तक सकारात्मक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संदेश पहुंचाना है.
डीसीपी कृषिकेश रावले ने जताई खुशी
वासा पूजन का सम्मान प्राप्त करने वाले पुणे पुलिस उपायुक्त (जोन-1) कृषिकेश रावले ने ऐतिहासिक गणपति उत्सव से जुड़ने पर प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने कहा, “श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति के 135वें गणेशोत्सव मंडप के वासा पूजन का मान मुझे मिला, इसका मुझे बेहद आनंद है. पिछले वर्ष भी मैंने इस मंडल का उत्सव देखा था. कार्यकर्ताओं का उत्साह और विसर्जन यात्रा में दिखाई देने वाली अनुशासनबद्धता देखने के बाद समझ आया कि पुणे का गणेशोत्सव इतना अलग और विशेष क्यों है. वासा पूजन का यह सम्मान देने के लिए मैं ट्रस्ट का मन से आभारी हूं.”
क्रांतिकारी विरासत से जुड़ा है गणपति का इतिहास
श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति पुणे के सार्वजनिक गणेशोत्सव और शहर की क्रांतिकारी विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है. सार्वजनिक गणेशोत्सव ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में सामाजिक जागृति और राष्ट्रभावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसी ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ट्रस्ट की ओर से 135वें गणेशोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
क्रांति दिन पर वासा पूजन के साथ शुरू हुए इस वर्ष के गणेशोत्सव में 135 साल पुरानी परंपरा और आधुनिक प्रस्तुति का संगम देखने को मिलेगा. ‘श्री गणेश स्वर्णधाम' जहां भक्तों के लिए भव्य आकर्षण का केंद्र बनने की तैयारी में है, वहीं इसके जरिए माता-पिता के सम्मान, कृतज्ञता और भारतीय संस्कारों का संदेश भी दिया जाएगा.
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