- खंडवा के श्री तिरोले कुनबी पटेल समाज ने शादी समारोहों में DJ, प्री-वेडिंग शूट और रिंग सेरेमनी पर रोक लगा दी.
- समाज ने बारात में DJ बजाने पर वर और वधु पक्ष दोनों को 21-21 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है.
- विवाह से पहले के आयोजनों में केवल परिवार के करीबी सदस्य शामिल होंगे और अनावश्यक खर्चों से बचाव किया जाएगा.
शादियों में बढ़ते दिखावे, फिजूलखर्ची और सामाजिक प्रतिस्पर्धा पर लगाम लगाने के लिए खंडवा जिले के श्री तिरोले कुनबी पटेल समाज ने बड़ा फैसला लिया है. समाज ने तय किया है कि अब विवाह समारोहों में DJ, प्री-वेडिंग शूट और रिंग सेरेमनी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा. इतना ही नहीं, यदि किसी शादी में बारात के दौरान DJ बजाया गया तो वर और वधु पक्ष दोनों पर 21-21 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. समाज का मानना है कि बढ़ते खर्च के कारण कई परिवार आर्थिक दबाव और कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं, इसलिए सादगीपूर्ण और संस्कारयुक्त सामाजिक व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है.
ओंकारेश्वर की बैठक में लिए गए अहम फैसले
श्री तिरोले कुनबी पटेल समाज की दो दिवसीय वार्षिक बैठक ओंकारेश्वर में आयोजित की. इस बैठक में समाज के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने संगठन, अनुशासन, सामाजिक एकता और आर्थिक सादगी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए. सभी प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी.
DJ पर पूरी तरह प्रतिबंध
बैठक का सबसे बड़ा निर्णय शादी समारोहों में DJ पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का रहा. अब समाज के किसी भी विवाह कार्यक्रम में बारात के दौरान DJ नहीं बजाया जाएगा. यदि कोई परिवार इस नियम का उल्लंघन करता है तो वर पक्ष और वधु पक्ष दोनों को 21-21 हजार रुपये यानी कुल 42 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा. यह राशि समाज के संगठन कोष में जमा की जाएगी.
फैसले का असर भी दिखने लगा
समाज के पदाधिकारियों के अनुसार, DJ प्रतिबंध के फैसले का असर तुरंत दिखाई देना शुरू हो गया है. निर्णय के 24 घंटे के भीतर ही समाज के 10 परिवारों ने अपने यहां शादी के लिए पहले से बुक किए गए DJ रद्द कर दिए. समाज इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मान रहा है.
प्री-वेडिंग शूट और रिंग सेरेमनी पर भी रोक
समाज ने विवाह से पहले होने वाले प्री-वेडिंग फोटोशूट और भव्य रिंग सेरेमनी को भी अनावश्यक खर्च का कारण माना है. इसी वजह से इन आयोजनों को बढ़ावा नहीं देने का फैसला किया गया है. समाज का मानना है कि इन कार्यक्रमों की वजह से विवाह समारोह जरूरत से ज्यादा खर्चीले होते जा रहे हैं.
नई व्यवस्था के तहत सगाई कार्यक्रम में केवल परिवार के करीबी सदस्य और रिश्तेदार ही शामिल होंगे. बड़े मंच, भव्य सजावट और अनावश्यक खर्चों से बचने पर जोर दिया जाएगा. इससे सामाजिक आयोजनों को सरल और कम खर्चीला बनाने में मदद मिलेगी.
सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों में भी सादगी
बैठक में केवल शादी समारोहों को लेकर ही नहीं, बल्कि अन्य सामाजिक आयोजनों को लेकर भी निर्णय लिए. बच्चे के जन्म के बाद होने वाले गोद भराई और पावना-पावनी जैसे कार्यक्रमों में भी मेहमानों की संख्या सीमित रखने पर सहमति बनी है, ताकि परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े.
अंतिम यात्रा की परंपरा में बदलाव
समाज ने अंतिम संस्कार से जुड़ी एक पुरानी परंपरा को भी बदलने का निर्णय लिया है. अब अंतिम यात्रा में कपड़े ले जाने की परंपरा समाप्त की जाएगी. इसके स्थान पर केवल घी, कपूर और अगरबत्ती ले जाने की व्यवस्था रहेगी. समाज का कहना है कि इससे अनावश्यक खर्च में कमी आएगी.
साल में सिर्फ एक बार होगा धन संग्रह
समाज ने आर्थिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए नया नियम बनाया है. अब विभिन्न अवसरों पर बार-बार चंदा या धन संग्रह नहीं किया जाएगा. पूरे वर्ष में केवल एक बार ही धन संग्रह किया जाएगा, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा.
युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए भी योजना
बैठक में समाज के विकास से जुड़े कई प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई. सितंबर में युवाओं के लिए सेक्टर स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इसके अलावा महिला सम्मेलन, बालिका शिक्षा जागरूकता कार्यक्रम और किसानों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित करने का निर्णय लिया गया है.
समाज के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए रोजगार मेलों के आयोजन की भी योजना बनाई गई है. इन मेलों के माध्यम से युवाओं को रोजगार संबंधी जानकारी और विभिन्न कंपनियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा.
खंडवा जिले में बड़ा सामाजिक आधार
श्री तिरोले कुनबी पटेल समाज का खंडवा जिले में मजबूत सामाजिक आधार माना जाता है. समाज के अनुसार जिले के 106 गांवों में करीब 15 हजार परिवार और लगभग 80 हजार लोग इस समाज से जुड़े हैं. पदाधिकारियों का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य किसी पर प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि समाज को दिखावे, फिजूलखर्ची और कर्ज के बोझ से बचाकर सादगी, संस्कार और आर्थिक संतुलन की ओर ले जाना है.
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