- छत्तीसगढ़ के कारोबारी के खिलाफ जीएसटी विभाग ने कर चोरी सहित कुल पांच सौ सत्रह करोड़ रुपये वसूलने का आदेश दिया.
- जांच में पाया गया कि पांच साल में अवैध गुटखे का निर्माण और बिक्री कर 317 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की.
- विभाग ने नोटिस जारी कर 90 दिनों में भुगतान न करने पर उसकी संपत्तियों की कुर्की और नीलामी की चेतावनी दी.
छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित जर्दायुक्त गुटखे के कारोबार से जुड़े चर्चित कारोबारी गुरमुख जुमनानी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. राज्य जीएसटी विभाग ने कर चोरी, जुर्माना और ब्याज को जोड़ते हुए उनके खिलाफ 517 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश जारी किया. विभाग का दावा है कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच अवैध गुटखा निर्माण और बिक्री के जरिए 317 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की. अब यदि तय समय सीमा के भीतर यह राशि जमा नहीं की तो कारोबारी की चिन्हित संपत्तियों की कुर्की और नीलामी की कार्रवाई शुरू की जाएगी.
दरअसल, जीएसटी विभाग की जांच में वर्ष 2025 के दौरान 317 करोड़ रुपये की कर चोरी का मामला सामने आया था. विभाग के अनुसार यह राशि अब तक जमा नहीं की. इस पर निर्धारित जुर्माना और 24 प्रतिशत ब्याज जोड़ने के बाद कुल देनदारी बढ़कर 517 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. विभाग ने कारोबारी को नोटिस जारी कर भुगतान करने के निर्देश दिए.
90 दिन में भुगतान नहीं किया तो होगी कुर्की
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि 90 दिनों के भीतर पूरी राशि जमा नहीं की, तो संपत्तियों की कुर्की और नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. प्रशासन ने गुरमुख जुमनानी से जुड़ी 52 संपत्तियों की पहचान की है. इनमें 12 संपत्तियां सीधे उनके नाम पर दर्ज हैं, जबकि अन्य संपत्तियां विभिन्न रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर बताई हैं.
कई जिलों में बदल-बदलकर चलाता रहा कारखाने
जांच में सामने आया है कि गुरमुख जुमनानी वर्ष 2021 से 2025 के बीच प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में अवैध रूप से जर्दायुक्त गुटखे का निर्माण और सप्लाई कर रहा था. अधिकारियों के मुताबिक विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा. धमतरी, राजनांदगांव, दुर्ग और रायपुर के जोरा क्षेत्र में गुप्त रूप से इकाइयां संचालित की.
रात के अंधेरे में चलता था पूरा कारोबार
जांच एजेंसियों के अनुसार अवैध गुटखे की पैकेजिंग और उत्पादन का काम बेहद गोपनीय तरीके से किया जाता था. उत्पादन गतिविधियां रात 10 बजे से सुबह 5 बजे के बीच ही संचालित होती थीं, ताकि प्रशासन और स्थानीय लोगों की नजर से बचा जा सके. इसी वजह से लंबे समय तक यह नेटवर्क अधिकारियों की पकड़ से दूर रहा.
छापेमारी में मिलीं 15 मशीनें
खाद्य सुरक्षा विभाग से मिली सूचना के बाद जून 2025 में जीएसटी विभाग ने दुर्ग और राजनांदगांव के संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की थी. कार्रवाई के दौरान 15 मशीनें गुटखा बनाते हुए मिलीं. अधिकारियों ने इन मशीनों की उत्पादन क्षमता और पैकेजिंग की रफ्तार के आधार पर पिछले पांच वर्षों के कारोबार का आकलन किया.
हर मिनट 250 पैकेट बनाती थी एक मशीन
विभागीय जांच में पता चला कि एक मशीन से प्रति मिनट करीब 250 पैकेट तैयार किए जाते थे. औसतन महीने में 18 दिन उत्पादन होता था और प्रतिदिन करीब 50 बोरा 'सितार' ब्रांड गुटखा बाजार में पहुंचाया जाता था. जांच में यह भी सामने आया कि गुटखा तैयार करने के लिए मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से विशेष कारीगर बुलाए गए थे.
गिरफ्तारी के बाद मिली थी जमानत
317 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी सामने आने के बाद आरोपी लंबे समय तक फरार रहा था. बाद में उसने आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उसे जेल भेजा गया. बताया गया कि करीब 100 दिन जेल में रहने के बाद उसे जमानत मिल गई. इससे पहले वर्ष 2023 में भी मोहन नगर पुलिस ने नशीली दवाओं की बिक्री के आरोप में उसे गिरफ्तार किया था और उसे 15 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था.
सील फैक्ट्री से मशीनें गायब होने का मामला भी आया सामने
मामले की जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई थी. तत्कालीन कार्रवाई के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जिस फैक्ट्री को सील किया था, उसकी छत तोड़कर अंदर रखी मशीनें और अन्य सामान गायब कर दिए गए थे. इस घटना ने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया था.
मामले का चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है. अभियोजन पक्ष को मजबूत बनाने के लिए विभाग ने आरोपी के तीन कर्मचारियों को सरकारी गवाह बनाया है. उनके शपथ पत्र भी न्यायालय में जमा कराए गए हैं, ताकि वे भविष्य में अपने बयानों से मुकर न सकें.
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