छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई में वेदांता के पावर प्लांट में हुए धमाके में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है. इसे लेकर ग्रुप चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 8-10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है. अग्रवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर उद्योगपति नवीन जिंदल ने सवाल उठाए तो पारस ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन प्रवेश जैन ने उनकी तीखी आलोचना की.
प्रवेश जैन ने सोशल मीडिया पोस्ट में जिंदल को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि आपका दिल कहां है? इस भयावह हादसे में कई परिवार पूरी तरह तबाह हो गए. कई पिता, पति और बेटे मारे गए. कई घरों के इकलौते कमाने वाले हमेशा के लिए चले गए. फिर भी आप एक अरबपति उद्योगपति का बचाव कर रहे हैं.
Mr. Navin Jindal, where is your heart? Twenty families in Chhattisgarh are shattered, fathers, husbands, sons blown to pieces in Anil Aggarwal's plant, their lone earners gone forever. Yet you tweet in defence of the billionaire instead of picking up the phone to your own…
— Pravesh Jain (@PRAVESHPARAS) April 18, 2026
उद्योगपतियों के संगठनों की चुप्पी पर सवाल उठाने वाले जिंदल के बयान पर भी जैन ने उन्हें आड़े हाथ लेते हुए कहा कि ये कॉरपोरेट एकजुटता का मामला नहीं है. ऐसे मामलों में जब संबंधित कंपनी के चेयरमैन के खिलाफ रुटीन एफआईआर दर्ज होती है तो उसके पीछे वजह होती है. मौतें आपराधिक लापरवाही से होती हैं. जैन ने सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी उन लाखों मजदूरों के लिए आंसू बहाए हैं, जो महज 10 हजार रुपये के लिए 12-12 घंटे की शिफ्ट में अपनी जान जोखिम में डालते हैं. कभी नहीं.
इससे पहले, नवीन जिंदल ने औपचारिक जांच से पहले अनिल अग्रवाल का नाम एफआईआर में जोड़ने पर सवाल उठाए थे और इसे गंभीर चिंता का विषय बताया था. उन्होंने कहा कि अनिल अग्रवाल एक साधारण पृष्ठभूमि वाले इंसान हैं, जिन्होंने शून्य से शुरू करके एक वैश्विक साम्राज्य खड़ा किया है. उस प्लांट के संचालन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी.
जिंदल ने सवाल उठाया कि जब किसी पीएसयू प्लांट प्लांट या रेलवे में दुर्घटनाएं होती हैं तो क्या चेयरमैन को नामजद किया जाता है? नहीं. यही स्टैंडर्ड प्राइवेट सेक्टर पर भी लागू होना चाहिए. जिंदल ने हालांकि वेदांता प्लांट हादसे को "बेहद दर्दनाक" बताते हुए कहा कि कई परिवारों ने अपना सब कुछ खो दिया है. उनके लिए उचित मुआवजा और निष्पक्ष जांच ऐसी शर्तें हैं, जिन पर समझौता नहीं किया जा सकता.
इस बीच, वेदांता पावर प्लांट में हुए हादसे में मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है. करीब 14 लोग अब भी घायल हैं. बता दें कि 14 अप्रल को सिंघीतराई प्लांट के बॉयलर 1 में उस वक्त जोरदार धमाका हुआ था, जब बॉयलर से टर्बाइन तक उच्च दबाव वाली भाप ले जाने वाला स्टील का पाइप फट गया था. इससे 600 डिग्री तापमान वाली अत्यधिक गर्म भाप ने वहां मौजूद लोगों को चपेट में ले लिया.
धमाके के बाद पुलिस की शुरुआती जांच में यह पाया गया कि बॉयलर की भट्टी के अंदर अत्यधिक ईंधन जमा होने के कारण दबाव बढ़ गया था, जिससे धमाका हुआ. शुरुआती जांच में पावर प्लांट में मेंटिनेंस में लापरवाही और संचालन में कोताही की तरफ भी इशारा किया गया है. फोरेंसिक जांच में भी पुष्टि हुई है कि ईंधन का जमाव और उससे पैदा हुआ अत्यधिक दबाव ही धमाके की प्रमुख वजह था.
सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि इस मामले में डभरा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (किसी की लापरवाही से मृत्यु होना), 289 (मशीनरी को लेकर लापरवाहीपूर्ण आचरण) और 3(5) (सामान्य आशय) के तहत FIR दर्ज की गई है. FIR में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटेल सहित 8-10 लोगों को नामज़द किया गया है.
इस घटना के तुरंत बाद वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि सिंघीतराई प्लांट में हुई अत्यंत दुखद दुर्घटना से मेरा मन बहुत व्यथित है. इस हादसे में पीड़ित हर व्यक्ति मेरा परिवार है. आपके आंसू मेरे हैं, आपका दर्द मेरा अपना है. दुख की इस घड़ी में मैं पूरी तरह आपके साथ खड़ा हूं. हमारा पूरा सहयोग और हरसंभव मदद आपके साथ है... इस मामले की तह तक जाने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.
इस बीच, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वेदांता हादसे में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि चाहे कोई कितना भी बड़ा हो, कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने पुलिस पर एफआईआर की कॉपी उपलब्ध न कराने का भी आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वेदांता कंपनी में पहले हुए हादसे में करीब 40 लोगों की मौत हुई थी, जिस पर तत्कालीन सरकार ने लीपापोती कर दी थी.
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