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उज्जैन से झालावाड़ तक फोरलेन! अधर में अटकी 2700 करोड़ की योजना, सिंहस्थ-2028 के लिए अहम है निर्माण

उज्जैन से झालावाड़ तक प्रस्तावित 134 किलोमीटर लंबे फोरलेन प्रोजेक्ट का काम अब भी टेंडर प्रक्रिया में अटका हुआ है. करीब 2721 करोड़ रुपये की यह महत्वाकांक्षी योजना सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है.

उज्जैन से झालावाड़ तक फोरलेन! अधर में अटकी 2700 करोड़ की योजना, सिंहस्थ-2028 के लिए अहम है निर्माण
  • उज्जैन से झालावाड़ तक 134 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क परियोजना की लागत 2,700 करोड़ रुपये से अधिक निर्धारित है.
  • परियोजना सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी.
  • टेंडर प्रक्रिया में लगातार देरी और तारीखों के बार-बार बदलाव से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है.

उज्जैन से राजस्थान के झालावाड़ तक प्रस्तावित 134 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क को मालवा क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जा रहा है. करीब 2,700 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाली यह सड़क सिर्फ दो राज्यों को जोड़ने का काम नहीं करेगी, बल्कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों की रीढ़ भी मानी जा रही है. 

पिछले साल इस परियोजना की घोषणा के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही निर्माण शुरू होगा, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी मामला टेंडर प्रक्रिया में ही उलझा हुआ है. बार-बार बदलती तारीखों के कारण अब लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इस बहुप्रतीक्षित फोरलेन का काम कब शुरू होगा.

मालवा की बड़ी परियोजना अभी भी इंतजार में

उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन को लंबे समय से क्षेत्र की सबसे जरूरी सड़क परियोजनाओं में शामिल किया जाता रहा है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले वर्ष उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस परियोजना को मंजूरी मिलने की घोषणा की थी. करीब 134 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के निर्माण पर 2,721 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं. इसे सिंहस्थ-2028 की तैयारियों से जुड़ी अहम परियोजना के रूप में भी देखा जा रहा है.

घोषणा हुई, लेकिन जमीन पर काम शुरू नहीं

परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी कई बार सार्वजनिक मंचों से इस सड़क को प्राथमिकता देने की बात कह चुके हैं. लेकिन हकीकत यह है कि अब तक निर्माण एजेंसी का चयन भी नहीं हो सका है और पूरा मामला टेंडर प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में अटका हुआ है.

सांसद के बयान से जगी थी नई उम्मीद

10 जुलाई को देवास-शाजापुर संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ. महेंद्र सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि 14 जुलाई को टेंडर खोले जाएंगे. उन्होंने दावा किया कि इसके बाद निर्माण एजेंसी का चयन कर काम शुरू कराया जाएगा और करीब एक साल में परियोजना पूरी हो सकती है. इस बयान के बाद क्षेत्र में उत्साह का माहौल बन गया था.

लोगों की उम्मीदें ज्यादा देर नहीं टिक सकीं. सांसद के बयान के कुछ समय बाद ही एनएचएआई की टेंडर वेबसाइट पर नया संशोधन सामने आ गया. इसमें टेंडर जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 21 जुलाई कर दी गई. इसके बाद फिर सवाल खड़े होने लगे कि आखिर वास्तविक स्थिति क्या है और परियोजना कब आगे बढ़ेगी.

बार-बार बदल रही हैं टेंडर की तारीखें

यह पहला मौका नहीं है जब टेंडर प्रक्रिया में बदलाव किया गया हो. पिछले कई महीनों से अलग-अलग कारणों के चलते कभी आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाई जा रही है तो कभी टेंडर खोलने की तारीख आगे खिसकाई जा रही है. लगातार हो रहे इन बदलावों से लोगों में अविश्वास बढ़ रहा है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण परियोजना में बार-बार संशोधन होना चिंता का विषय है.

सिंहस्थ-2028 के लिए बेहद अहम परियोजना

उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन को सिंहस्थ-2028 के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस सड़क के बनने से उज्जैन के महाकाल लोक और नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी शक्तिपीठ के बीच आवागमन आसान होगा. सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को इसका सीधा फायदा मिलेगा. साथ ही धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है.

व्यापार और उद्योग को भी होगा बड़ा लाभ

यह सड़क मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच संपर्क को मजबूत करेगी. कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास को भी इससे बढ़ावा मिलेगा. वर्तमान में लंबी दूरी तय करने में अधिक समय लगता है, लेकिन फोरलेन बनने के बाद यात्रा तेज और सुविधाजनक हो जाएगी.

उज्जैन से झालावाड़ तक मौजूदा सड़क का बड़ा हिस्सा दो लेन का है. कई स्थानों पर खतरनाक मोड़ और दुर्घटना संभावित क्षेत्र मौजूद हैं. भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण हादसे भी होते रहते हैं. फोरलेन बनने के बाद यातायात अधिक सुरक्षित होने और दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है.

दो हिस्सों में होगा निर्माण कार्य

एनएचएआई ने इस परियोजना को दो पैकेज में बांटा है. पहले पैकेज में उज्जैन से आकली-कड़िया तक करीब 86.5 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा, जिस पर 1,462 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे. दूसरे पैकेज में आकली-कड़िया से सुसनेर होते हुए राजस्थान के झालावाड़ जंक्शन तक लगभग 72.7 किलोमीटर हिस्से का फोरलेन निर्माण किया जाएगा, जिसकी लागत 1,259 करोड़ रुपये से अधिक है.

पूरे कॉरिडोर को आधुनिक मानकों के अनुसार विकसित किया जाएगा. योजना में 6 फ्लाईओवर, कई बड़े पुल और 115 बॉक्स अंडरपास बनाए जाने का प्रस्ताव है. इससे यातायात अधिक सुरक्षित, तेज और बाधारहित हो सकेगा. 

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