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Twisha Sharma Case: ‘टनल व्यू’ से मिनट-दर-मिनट जांच करेगी CBI, बयानों में झोल और टाइम गैप पर पैनी नजर 

ट्विशा शर्मा केस में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है और अब ‘टनल व्यू’ एनालिसिस के जरिए घटना से पहले के हर मिनट की पड़ताल की जा रही है. बयानों में झोल, संदिग्ध मूवमेंट और टाइम गैप पर खास नजर रखी जा रही है.

Twisha Sharma Case: ‘टनल व्यू’ से मिनट-दर-मिनट जांच करेगी CBI, बयानों में झोल और टाइम गैप पर पैनी नजर 

ट्विशा शर्मा केस में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए सवाल और संदेह भी गहराते जा रहे हैं. अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में सीबीआई ने अपनी जांच का दायरा और सख्त करते हुए ‘टनल व्यू' एनालिसिस तकनीक अपनाने की तैयारी की है. इस तकनीक के जरिए ट्विशा की मौत से पहले के हर एक मिनट को बारीकी से खंगाला जाएगा. खासतौर पर बयानों में विरोधाभास, संदिग्ध गतिविधियां और गायब टाइम गैप अब जांच के केंद्र में हैं.

‘टनल व्यू' एनालिसिस से मिनट-दर-मिनट जांच

सीबीआई अब “टनल व्यू” एनालिसिस के जरिए केस को नए तरीके से देखने जा रही है. इस तकनीक में घटना से पहले के हर मिनट को जूम करके देखा जाता है, ताकि कोई भी छोटी से छोटी बात नजरअंदाज न हो. एजेंसी का मकसद है कि ट्विशा के आखिरी पलों की सटीक टाइमलाइन तैयार की जा सके.

बयानों में झोल और संदिग्ध मूवमेंट पर फोकस

जांच एजेंसी खास तौर पर इस बात पर ध्यान दे रही है कि गवाहों और आरोपियों के बयानों में कई जगह अंतर दिखाई देता है. इसके अलावा, घटना के वक्त कुछ संदिग्ध मूवमेंट और समय का ऐसा अंतर सामने आया है, जो अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. सीबीआई इन्हीं पहलुओं को जोड़कर पूरी तस्वीर समझने की कोशिश कर रही है.

CCTV और मोबाइल डेटा को किया जाएगा सिंक

मामले में सामने आए CCTV फुटेज में तारीख और समय को लेकर भी सवाल उठे हैं. ऐसे में अब सीबीआई CCTV के टाइमस्टैम्प, मोबाइल फोन की एक्टिविटी और इंटरनेट इस्तेमाल के डेटा को आपस में मिलाकर असली समय का पता लगाएगी. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि घटना के वक्त वास्तव में क्या हुआ था.

वर्चुअल वॉकथ्रू से बनेगी पूरी कहानी

सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने कटारा हिल्स स्थित घर का वर्चुअल वॉकथ्रू तैयार करना शुरू कर दिया है. इस डिजिटल मॉडल में घर के तीनों फ्लोर, कमरों की स्थिति और वहां मौजूद हर गतिविधि को फिर से बनाया जा रहा है, ताकि ट्विशा के आखिरी घंटों को दोबारा समझा जा सके.

डिजिटल सबूतों की भी हो रही गहन जांच

जांच टीम मोबाइल फोन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, Wi-Fi लॉग और इंटरनेट डेटा का भी बारीकी से विश्लेषण कर रही है. कोशिश यह भी है कि कहीं घटना के बाद कोई डिजिटल सबूत बदला, डिलीट या छिपाया तो नहीं गया. इस पहलू को भी जांच में काफी अहम माना जा रहा है.

हर एंगल से जांच में जुटी CBI

सीबीआई अब इस मामले को बेहद सतर्कता से हर एंगल से खंगाल रही है. एजेंसी का फोकस सिर्फ घटनास्थल ही नहीं, बल्कि उससे पहले और बाद के हर छोटे-बड़े पहलू पर है. माना जा रहा है कि इस नई तकनीक और जांच के तरीके से केस के कई अहम राज खुल सकते हैं.

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