छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से चौंकाने वाला मामला सामने आया है. प्रशासन से अपनी बेटी को वापस लगाने की गुहार लगा रहे परिवार की सुनने को कोई अधिकारी तैयार नहीं है. छह महीने से कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू स्थित में बाल विकास गृह नाबालिग छात्रा फंसी हुई है. परिवार प्रशासन के लगातार चक्कर काट रहा है, लेकिन उनकी बेटी अभी तक घर नहीं लौट पाई है. इस मामले को लेकर अब कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) सामने आया है.
ये है मामला
मामला सूरजपुर जिले के चांदनी थाना क्षेत्र के करौटी इलाके का है. 15 साल की नाबालिग छात्रा 30 जुलाई 2025 को रहस्यमय तरीके से लापता हो गई थी. परिजनों का कहना है कि नाबालिग छात्रा जिला मुख्यालय स्थित सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में पढ़ाई करती थी और वकील कॉलोनी में किराए के मकान में अपनी सहेलियों के साथ रह रही थी.

परिवार ने बताया कि कोई अज्ञात व्यक्ति ने बच्ची को बहला-फुसलाकर घर से ले गया था. छात्रा के गायब होने पर परिजनों ने तुरंत थाने में शिकायत दर्ज कराई और बाल संरक्षण इकाई को भी इसकी जानकारी दी.
जिसके साथ गई वह तो लौट आया
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि नाबालिग छात्रा बेंगलुरु के यशवंतपुर इलाके में स्थित एक बाल विकास गृह में है. किशोरी जिस व्यक्ति के साथ गई थी, वह तो वापस लौट आया, लेकिन छात्रा आज तक अपने घर नहीं पहुंच सकी.
जिन्हें जाना था बेंगलुरू, वो पुलिसकर्मी ही नहीं गए
कुछ महीने पहले महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस टीम परिजनों के साथ बच्ची को लेने बेंगलुरु गई थी, लेकिन वहां बड़ी लापरवाही सामने आई. बेंगलुरू जाने वाले जिन पुलिस कर्मियों का सूची में नाम था वह पुलिसकर्मी नहीं गए थे, जबकि उनकी जगह दूसरे पुलिसकर्मी पहुंच गए थे. आईडी और सूची का मिलान नहीं होने पर बेंगलुरु प्रशासन ने बच्ची को सौंपने से इनकार कर दिया. इस बार पुलिस कर्मियों की लापरवाही के चलते छात्रा परिवार के पास लौट नहीं सकी और बेंगलुरू में फंसी हुई है.
एनएसयूआई ने सौंपा ज्ञापन
फ़िलहाल अब इस मामले को लेकर एनएसयूआई ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर बच्ची को जल्द वापस नहीं लाया गया तो आंदोलन किया जाएगा.
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