Shivpuri Coaching Centers Strike: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद देशभर में कोचिंग संस्थानों (Coaching Centers) की सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच तेज हो गई है. इसी क्रम में मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में भी प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई शुरू की है. पिछले कुछ दिनों में 26 से अधिक कोचिंग सेंटरों को सुरक्षा मानकों में कमी पाए जाने पर सील किया जा चुका है. प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में अब जिले के कोचिंग संचालक खुलकर सामने आ गए हैं. उनका आरोप है कि प्रशासन बिना स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए कार्रवाई कर रहा है. इसी के विरोध में कोचिंग संचालकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया, ज्ञापन सौंपा और सभी कोचिंग संस्थानों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने की घोषणा कर दी.
26 से ज्यादा कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई
शिवपुरी जिले में प्रशासन द्वारा कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच लगातार की जा रही है. इस दौरान अब तक 26 से अधिक कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई की जा चुकी है और कई संस्थानों को सील भी किया गया है. प्रशासन का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करना बताया जा रहा है. हालांकि इस कार्रवाई से जिले भर के कोचिंग संचालकों में असंतोष बढ़ गया है.

Shivpuri Coaching Centers Strike: कोचिंग संचालकों का पत्र
कलेक्ट्रेट पहुंचकर किया प्रदर्शन
प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में शिवपुरी के कोचिंग संचालक एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा. संचालकों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा मानकों के नाम पर कार्रवाई तो की जा रही है, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया जा रहा कि किन-किन नियमों का पालन अनिवार्य रूप से करना है. इसी असमंजस के चलते उन्होंने सामूहिक रूप से अपने संस्थान बंद करने का निर्णय लिया है.
स्पष्ट गाइडलाइन की कर रहे मांग
कोचिंग संचालकों ने प्रशासन से लिखित रूप में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है. उन्होंने विशेष रूप से तीन प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है.
- अग्नि सुरक्षा नियमों की स्पष्ट जानकारी : संचालकों का कहना है कि कोचिंग संस्थानों के लिए लागू फायर सेफ्टी नियमों की लिखित जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे उसी के अनुरूप व्यवस्थाएं कर सकें.
- अग्निशमन यंत्रों की अनिवार्यता : वे यह भी जानना चाहते हैं कि संस्थानों में किस प्रकार और कितनी क्षमता के अग्निशमन यंत्र लगाए जाना आवश्यक हैं.
- कार्रवाई से पहले स्पष्ट निर्देश : संचालकों का आरोप है कि बिना पर्याप्त मार्गदर्शन दिए सीधे सीलिंग और दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
संचालकों ने क्या कहा?
उमेश श्रीवास्तव ने NDTV को बताया कि हम कोचिंग संचालकों का कहना है कि वे छात्रों की सुरक्षा के महत्व को समझते हैं और सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उनका कहना है कि जब तक प्रशासन यह स्पष्ट नहीं करता कि संस्थानों में कौन-कौन सी व्यवस्थाएं अनिवार्य हैं, तब तक वे कोचिंग का संचालन नहीं कर पाएंगे. इसी कारण सभी संचालकों ने संयुक्त रूप से संस्थान बंद करने का निर्णय लिया है.
हजारों छात्रों की पढ़ाई पर असर
कोचिंग संस्थानों के अचानक बंद होने का सीधा असर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर पड़ रहा है. शिवपुरी जिले में बड़ी संख्या में विद्यार्थी NEET, JEE, SSC, बैंकिंग, पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निजी कोचिंग संस्थानों पर निर्भर हैं. बीच सत्र में पढ़ाई रुकने से छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है. कई छात्रों का कहना है कि महत्वपूर्ण परीक्षाओं से पहले कोचिंग बंद होना उनकी तैयारी को प्रभावित कर सकता है.
अभिभावकों में भी बढ़ी चिंता
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन पढ़ाई भी बाधित नहीं होनी चाहिए. उनका मानना है कि प्रशासन और कोचिंग संचालकों के बीच संवाद स्थापित कर जल्द समाधान निकाला जाना चाहिए ताकि सुरक्षा मानकों का पालन भी हो और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो.
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल कोचिंग संचालकों की ओर से ज्ञापन सौंपे जाने के बाद सभी की नजर जिला प्रशासन पर टिकी हुई है. उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन जल्द ही सुरक्षा मानकों को लेकर विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा और कोचिंग संचालकों के साथ चर्चा कर इस गतिरोध का समाधान तलाशेगा. तब तक शिवपुरी के हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अनिश्चितता के बीच बनी हुई है.
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