- दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने के हादसे में मध्य प्रदेश के कटनी निवासी अक्षत सिंह यादव की मौत हो गई.
- अक्षत दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज में सेकंड ईयर के छात्र थे और यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे.
- परिवार के अनुसार अक्षत का सपना प्रशासनिक सेवा में जाना था और वह अपने पिता का नाम रोशन करना चाहता था.
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने के हादसे ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी. इस हादसे में मध्य प्रदेश के कटनी निवासी अक्षत सिंह यादव की मौत ने हर किसी को झकझोर दिया है. पढ़ाई में तेज, सपनों से भरा और यूपीएससी की तैयारी कर रहा अक्षत अपने परिवार की उम्मीदों का केंद्र था. वह अक्सर अपने पिता से कहता था, 'पापा, आपको एक दिन अफसर बनकर दिखाऊंगा.' लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने उसके सारे सपने अधूरे छोड़ दिए. बेटे का शव देखकर माता-पिता का दर्द छलक पड़ा और परिवार की आंखों के सामने उसके साथ बिताए हर पल की यादें ताजा हो गईं.
दरअसल, सत्य निकेतन हादसे में जान गंवाने वाले अक्षत सिंह यादव दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज में सेकंड ईयर के छात्र थे. हादसे की जानकारी मिलने के बाद उनके परिजन नई दिल्ली स्थित एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचे. बेटे का शव देखते ही परिवार टूट गया. बहन लीची सदमे में है और परिवार के लोग अब भी इस सच को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि अक्षत अब उनके बीच नहीं है.
कटनी से दिल्ली तक का सपना
अक्षत का परिवार मध्य प्रदेश के कटनी जिले की दुबे कॉलोनी में रहता है. उनके पिता रोजगार के लिए राजस्थान के कोटा में काम करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं. परिवार ने हमेशा अक्षत की पढ़ाई को प्राथमिकता दी और उसे आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किया. अक्षत भी परिवार की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहता था और इसी लक्ष्य के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा था.
यूपीएससी की तैयारी कर रहा था अक्षत
परिजनों के अनुसार, अक्षत सिर्फ कॉलेज की पढ़ाई ही नहीं कर रहा था, बल्कि वह यूपीएससी की तैयारी में भी जुटा हुआ था. उसके पिता बताते हैं कि शिक्षक हमेशा उसकी मेहनत और लगन की तारीफ करते थे. अक्षत का सपना प्रशासनिक सेवा में जाना था और वह अक्सर अपने पिता से कहा करता था कि एक दिन अफसर बनकर उनका नाम रोशन करेगा. परिवार के लिए यही सपना अब सबसे बड़ी याद बनकर रह गया है.
'पहले हम चार थे, अब सिर्फ तीन रह गए'
अक्षत की मां बेटे को याद करते हुए बार-बार भावुक हो रही हैं. उनका कहना है कि परिवार में पहले चार सदस्य थे, लेकिन अब एक सदस्य हमेशा के लिए उनसे दूर चला गया. उन्होंने बताया कि जिस बेटे को उन्होंने नौ महीने कोख में रखा, गोद में खिलाया और बड़े प्यार से पाला, आज उसी को अंतिम बार देखना पड़ रहा है. परिवार के लिए यह दुख शब्दों में बयान करना मुश्किल है.
मां ने बताया कि हादसे से कुछ दिन पहले ही उनकी अक्षत से वीडियो कॉल पर बातचीत हुई थी. उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वह बेटे से उनकी आखिरी बातचीत होगी. परिवार अब उसी कॉल की छोटी-छोटी बातों को याद कर रहा है और हर याद उन्हें अंदर तक झकझोर रही है.
राखी मनाकर लौटे थे दिल्ली
परिजनों के मुताबिक, अक्षत हाल ही में रक्षाबंधन के अवसर पर घर आए थे. छुट्टियां बिताने के बाद वह दोबारा दिल्ली लौट गए थे. पिता ने उन्हें कुछ दिन और रुकने के लिए कहा था, लेकिन अक्षत ने बताया कि टिकट हो चुका है और पढ़ाई के कारण वापस जाना जरूरी है. किसी ने नहीं सोचा था कि यही उनका आखिरी विदा होगा.
तलवार और किताबों का था शौक
अक्षत को पढ़ाई के साथ-साथ किताबें पढ़ना बहुत पसंद था. जब भी उसके पास पैसे होते, वह नई किताबें खरीद लेता था. वह प्रतियोगिताओं और क्विज कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था. परिवार के मुताबिक उसे तलवारें रखने का भी शौक था. कुछ दिन पहले घर में एक तलवार आई थी, जिसे वीडियो कॉल पर देखकर वह काफी खुश हुआ था और उसने बहन को भी दिखाने के लिए कहा था. आज परिवार उसी बातचीत को याद कर भावुक हो रहा है.
पिता ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
बेटे को खोने के बाद अक्षत के पिता ने हादसे की जांच की मांग की है. उनका कहना है कि ऐसी इमारतों की नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि वहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर शहरों में भेजते हैं और उन्हें सुरक्षित रहने की उम्मीद होती है. लेकिन इस हादसे ने उस भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है.
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