मां की ममता और साहस की मिसाल बनी एक घटना मध्यप्रदेश के सागर जिले के खुरई से सामने आई है. यहां एक ढाई वर्षीय मासूम खेलते-खेलते करंट की चपेट में आ गया और बिजली प्रवाहित लोहे के पाइप से चिपक गया. बेटे की चीख सुनकर बाहर पहुंची मां ने जब यह भयावह दृश्य देखा तो बिना अपनी जान की परवाह किए उसे बचाने के लिए दौड़ पड़ी. करंट का झटका लगने के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी और दूसरी कोशिश में बेटे को मौत के मुंह से बाहर खींच लिया. इस संघर्ष में मां खुद भी घायल हो गई, लेकिन उसकी बहादुरी ने एक बड़ा हादसा टाल दिया. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में मां के साहस की चर्चा हो रही है.
खेलते-खेलते करंट की चपेट में आया मासूम
घटना सागर जिले के खुरई स्थित जेल रोड की एक आवास कॉलोनी की है. यहां रहने वाले कप्तान अहिरवार का ढाई वर्षीय बेटा श्रेयांश अहिरवार घर के बाहर खेल रहा था. खेलते समय वह पास के एक मकान के बाहर लगे लोहे के पाइप के संपर्क में आ गया. बताया जा रहा है कि पाइप में बिजली का करंट प्रवाहित हो रहा था. जैसे ही मासूम ने पाइप को छुआ, वह करंट की चपेट में आ गया और उसी से चिपक गया.

Brave Mother: बच्चे को बचाने वाली बहादुर मां
बेटे की चीख सुन दौड़ी मां
करंट लगने के बाद श्रेयांश जोर-जोर से चीखने लगा. बच्चे की आवाज सुनकर उसकी मां ज्योति अहिरवार घर के अंदर से भागकर बाहर आईं. बाहर पहुंचते ही उन्होंने देखा कि उनका बेटा करंट से तड़प रहा है और पाइप से चिपका हुआ है. कुछ क्षणों के लिए स्थिति बेहद भयावह थी, लेकिन मां ने घबराने के बजाय बेटे को बचाने का फैसला किया.

Brave Mother Child Rescue: बच्चा जिसको बचाया गया
पहली कोशिश में मां को भी लगा करंट
ज्योति अहिरवार ने बिना देर किए बेटे को पाइप से अलग करने का प्रयास किया. जैसे ही उन्होंने बच्चे को पकड़कर खींचना चाहा, उन्हें भी तेज करंट का झटका लगा. करंट लगने से वह खुद भी प्रभावित हुईं, लेकिन उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे. एक मां के लिए उस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता बेटे की जान बचाना थी.
दूसरी बार पूरी ताकत से खींचा बेटा
पहले झटके के बावजूद ज्योति ने साहस नहीं खोया. उन्होंने दोबारा हिम्मत जुटाई और पूरी ताकत से बेटे को पाइप से अलग करने की कोशिश की. आखिरकार वह सफल रहीं और श्रेयांश को करंट प्रवाहित पाइप से दूर खींच लिया. इस दौरान मां और बेटे दोनों बिजली की चपेट में आकर घायल हो गए. मासूम के हाथ झुलस गए, जबकि मां को भी करंट का असर झेलना पड़ा.
अस्पताल में कराया गया भर्ती
घटना के बाद परिवार और आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों की मदद से मां और बेटे को तुरंत खुरई के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया. डॉक्टरों ने दोनों का उपचार शुरू किया. अस्पताल सूत्रों के अनुसार दोनों की स्थिति खतरे से बाहर है और चिकित्सा निगरानी में लगातार उपचार किया जा रहा है.
पिता बोले- पत्नी की हिम्मत ने बचाई जान
मासूम के पिता कप्तान अहिरवार ने बताया कि घटना बेहद डराने वाली थी. उन्होंने कहा कि अगर उनकी पत्नी ज्योति ने साहस और सूझबूझ नहीं दिखाई होती, तो बेटे की जान बचाना मुश्किल हो सकता था. परिवार इस बात से राहत महसूस कर रहा है कि मां और बेटा दोनों सुरक्षित हैं और उनकी हालत में सुधार हो रहा है.
पूरे इलाके में हो रही मां की बहादुरी की चर्चा
घटना के बाद स्थानीय लोग ज्योति अहिरवार के साहस की सराहना कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि एक मां अपने बच्चे के लिए किसी भी खतरे से लड़ सकती है और इस घटना ने इसे साबित कर दिया. कई लोगों ने इसे ममता, साहस और त्याग की अनूठी मिसाल बताया है.
ममता की मिसाल बनी घटना
खुरई की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि मां और बच्चे के अटूट रिश्ते की कहानी भी है. करंट के झटकों और जान के खतरे के बीच ज्योति अहिरवार ने जिस साहस का परिचय दिया, उसने अपने बेटे को नया जीवन दे दिया. यह घटना बताती है कि संकट की घड़ी में मां अपने बच्चों की सबसे बड़ी रक्षक बनकर सामने आती है और जरूरत पड़ने पर अपनी जान की भी परवाह नहीं करती.
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