- रीवा के गुढ़ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा विधायक अपने घर में लगभग अठारह घंटे तक बाढ़ के पानी में फंसे रहे.
- बीहर नदी के किनारे विधायक आवास का ग्राउंड फ्लोर पानी में डूब गया था, जिससे उन्हें दूसरी मंजिल पर रहना पड़ा.
- विधायक ने बाढ़ के लिए नदी-नालों पर अतिक्रमण और जल निकासी की अपर्याप्त योजना को मुख्य कारण बताया.
एमपी के रीवा में आई बाढ़ ने इस बार सिर्फ आम लोगों को ही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों को भी प्रभावित किया. गुढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह खुद अपने घर में करीब 18 घंटे तक बाढ़ के पानी से घिरे रहे. बीहर नदी के किनारे स्थित उनके आवास का ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह पानी में डूब गया, जिसके कारण उन्हें परिवार समेत दूसरी मंजिल पर शरण लेनी पड़ी. पानी उतरने के बाद बाहर निकले विधायक ने बाढ़ के लिए नदी-नालों पर बढ़ते अतिक्रमण और नए पुलों की डिजाइन को जिम्मेदार ठहराया.
अभिषेक तिवारी की रिपोर्ट...
बाढ़ के बीच दूसरी मंजिल पर बिताने पड़े 18 घंटे
लगातार बारिश के बाद बीहर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और आसपास के इलाकों में पानी भर गया. इसी दौरान भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह का घर भी बाढ़ की चपेट में आया. हालात ऐसे बन गए कि घर का ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह पानी में डूब गया और विधायक को दूसरी मंजिल पर रहना पड़ा. करीब 18 घंटे बाद जब बारिश थमी और नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम हुआ, तब वे नीचे उतर सके.
पानी उतरने के बाद शुरू हुई सफाई
बाढ़ का पानी घटने के बाद विधायक ने अपने घर की साफ-सफाई शुरू करवाई. घर के अंदर कीचड़ और गंदगी भर गई थी. फर्नीचर से लेकर घरेलू सामान तक बाढ़ के असर से प्रभावित हुआ. पूरे इलाके में भी बाढ़ के बाद सफाई और सामान्य स्थिति बहाल करने का काम जारी है.

विधायक ने बाढ़ की वजह बताई.
अतिक्रमण को बताया बाढ़ की बड़ी वजह
नागेंद्र सिंह का कहना है कि रीवा में यह पहली बार बाढ़ नहीं आई है. उन्होंने कहा कि नदी-नालों और जल निकासी मार्गों पर लगातार अतिक्रमण बढ़ा है. शहर की आबादी बढ़ती गई, लेकिन उसके अनुरूप जल निकासी की व्यवस्था विकसित नहीं की. उनका मानना है कि यही कारण है कि बारिश का पानी तेजी से निकल नहीं पाता और बाढ़ की स्थिति बन जाती है.
जल निकासी की योजना पर उठाए सवाल
विधायक ने कहा कि शहर में निर्माण कार्यों के दौरान कई बार यह नहीं सोचा जाता कि बारिश का पानी आखिर निकलेगा कहां. कई लोग बिना उचित योजना के निर्माण कर लेते हैं, जबकि प्रशासन की ओर से भी पर्याप्त निगरानी नहीं हो पाती. उन्होंने कहा कि यदि समय रहते जल निकासी की व्यापक योजना बनाई जाती तो हालात इतने खराब नहीं होते.
नए पुलों की डिजाइन पर भी जताई चिंता
नागेंद्र सिंह ने रीवा में हाल के वर्षों में बने पुलों की संरचना पर भी सवाल खड़े किए. उनका कहना है कि पुराने पुल अधिक चौड़े और ऊंचे बनाए जाते थे, जिससे नदी का पानी बिना किसी रुकावट के आगे निकल जाता था. लेकिन नए पुलों में पानी के बहाव के लिए पर्याप्त जगह नहीं छोड़ी गई है. ऐसे में तेज बारिश के दौरान पानी की रफ्तार धीमी पड़ जाती है और जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है.
पुराने पुलों का दिया उदाहरण
विधायक ने कहा कि रीवा का पुराना 'बड़ी पुल' और प्रयागराज का यमुना ब्रिज दशकों पहले बनाए थे. इन पुलों की ऊंचाई और चौड़ाई ऐसी है कि भारी बारिश के बाद भी पानी आसानी से निकल जाता है. उन्होंने दावा किया कि इन पुराने पुलों पर कभी पानी नहीं चढ़ा, जबकि बाद में बने कई पुलों में क्षमता कम होने के कारण जलभराव बढ़ा है.
पूरे शहर को झेलनी पड़ी बाढ़ की मार
विधायक के अनुसार इस बार की बाढ़ ने पूरे रीवा को प्रभावित किया. उन्होंने कहा कि शायद ही कोई ऐसा मोहल्ला बचा हो, जहां घरों में पानी न घुसा हो. अचानक हुई भारी बारिश और पानी के निकास का सीमित रास्ता, दोनों मिलकर इस आपदा की बड़ी वजह बने.
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