नेपाल में लगातार हुई भारी बारिश का असर अब बिहार में साफ दिखाई दे रहा है. गंडक नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और इसके कारण पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, बगहा, गोपालगंज, मोतिहारी, बेतिया और सारण समेत कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है. नदी का बढ़ता जलस्तर हजारों गांवों तक पहुंच चुका है और लाखों लोग इसकी चपेट में आ गए हैं.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा गंडक का जलस्तर
बगहा क्षेत्र में दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर करीब 91.28 मीटर दर्ज किया गया जो अब तक का उच्चतम स्तर माना जा रहा है. वहीं गंडक बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है. नेपाल से लगातार आ रहे अतिरिक्त पानी के कारण आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है.
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बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया. इसके बाद उन्होंने बेतिया के बथना स्थित बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण किया. मुख्यमंत्री ने सामुदायिक रसोई और स्वास्थ्य शिविर का जायजा लिया तथा राहत शिविर में रह रहे लोगों से सीधे बातचीत की. मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हर स्तर पर उनके साथ खड़ी है और किसी भी जरूरतमंद को सहायता से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा.

दुर्गा पूजा से पहले मिलेगी 7 हजार रुपये की मदद
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रभावित परिवारों की पहचान कर दुर्गा पूजा से पहले उनके खातों में 7,000 रुपये की अनुग्रह सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जाए. उन्होंने राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने का भी आदेश दिया.
तटबंध टूटने से बढ़ी परेशानी
बाढ़ के बीच चंपारण तटबंध के कई स्थानों पर टूटने की खबरें सामने आई हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से तटबंध की समुचित मरम्मत नहीं हुई थी. लगातार बढ़ते जलदबाव और नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण कमजोर हिस्से टूट गए, जिससे कई इलाकों में तेजी से पानी फैल गया.
राज्य सरकार ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को राहत एवं बचाव कार्य तेज रखने के निर्देश दिए हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल में बारिश का दौर जारी रहने और गंडक के जलस्तर में कमी नहीं आने के कारण गोपालगंज सहित कई जिलों में बाढ़ का खतरा अभी बना हुआ है. ऐसे में प्रशासन और लोगों दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है.
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