उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है. राहत आयुक्त कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस आसमानी आफत और इससे जुड़े हादसों में अब तक 56 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 46 लोग घायल हुए हैं. प्रदेश के कई हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही तेज हवाओं और लगातार बारिश ने कानपुर,वाराणसी,प्रयागराज,गोरखपुर और बरेली समेत दर्जनों जिलों में जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया है. कई शहरों में पेड़ उखड़ गए हैं, बिजली के खंभे गिर गए हैं और सड़कें व गांव पानी में डूब चुके हैं. ऐसे सवाल उठता है कि आखिर जब मानसून की विदाई हो रही है तब ये प्रदेश में मूसलाधार बारिश का दौर क्यों चल रहा है?
आंकड़ें बता रहे हैं स्थिति कितनी गंभीर है
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अमूमन इस सीजन में रोजाना औसतन सिर्फ 1.8 मिलीमीटर बारिश होती है. लेकिन रविवार सुबह तक के 24 घंटों में राज्य में रिकॉर्ड 45.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से कई गुना ज्यादा है. सूबे के 75 में से 56 जिलों में अत्यधिक और भारी बारिश दर्ज की गई है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस बाढ़ जैसे हालात के पीछे कारण कोई साधारण मौसमी बदलाव नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के आसमान में दो बेहद ताकतवर मौसमी प्रणालियों (Weather Systems) का आपस में टकराना है. दूसरी शब्दों में कहें तो, बंगाल की खाड़ी से उठा एक 'डीप डिप्रेशन' यानि गहरे दबाव का क्षेत्र और पश्चिम से आ रहा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ठीक उस समय आपस में मिल गए, जब उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून विदा हो रहा था. इन दोनों के मिलने से यूपी के आसमान में बारिश का एक महा-चक्रव्यूह रच दिया.
मौसम विभाग का क्या कहना है?
मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिल श्रीवास्तव के मुताबिक -"मौसम विभाग ने पश्चिमी यूपी में सोमवार यानि 28 सितंबर को आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया है, जबकि पूर्वी यूपी के लिए कोई विशेष चेतावनी नहीं है. राहत की बात यह है कि अब पूरे प्रदेश में बारिश की तीव्रता धीरे-धीरे कम हो रही है." उन्होंने आगे समझाया कि मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों पर बने 'कम दबाव के क्षेत्र' (Well-Marked Low Pressure Area) की वजह से ही पश्चिमी यूपी में कुछ जगहों पर अत्यंत भारी और पूर्वी यूपी में भारी बारिश दर्ज की गई है.
बंगाल की खाड़ी से कैसे पहुंचा यह तूफान?
इस आफत की शुरुआत बंगाल की खाड़ी में बने एक गहरे दबाव Deep Depression से हुई थी. यह तूफान आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तट को पार करते हुए जमीन के रास्ते मध्य प्रदेश के उत्तर-पूर्वी हिस्से से होता हुआ उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में दाखिल हुआ. जैसे ही यह उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ा, यह 'कम दबाव के क्षेत्र' में बदल गया. चूंकि इसमें बंगाल की खाड़ी से भारी मात्रा में नमी (Moisture) मौजूद थी, इसलिए इसने लगातार पानी बरसाना जारी रखा.
ऊपर से आ गया 'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' का डबल अटैक
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ वे ठंडे तूफान होते हैं जो भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) और कैस्पियन सागर से उठकर हवाओं के सहारे भारत के उत्तर-पश्चिम हिस्से की तरफ आते हैं.जब मध्य प्रदेश के रास्ते यूपी में घुसी मानसूनी हवाओं की गर्मी का सामना इस ठंडे पश्चिमी विक्षोभ से हुआ, तो आसमान में भारी अस्थिरता पैदा हो गई. इस टकराव ने यूपी के मैदानी और तराई इलाकों में बादलों को ऐसा चार्ज किया कि कई जगहों पर क्लाउडबर्स्ट यानि बादल फटने जैसी मूसलाधार बारिश हो गई.
नदियां उफान पर, किसानों को अलर्ट जारी
इस भीषण बारिश के कारण घाघरा और राप्ती जैसी यूपी की प्रमुख नदियां कई जगहों पर खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे धान, मक्का, गन्ना और दलहन की फसलों से तुरंत जल निकासी का इंतजाम करें ताकि फसलें सड़ने से बच सकें. इसके अलावा, तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को अकेले खड़े पेड़ों के नीचे शरण न लेने की सख्त हिदायत दी गई है.
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