- नीट परीक्षा में पेपर लीक के मामले में भोपाल के मेडिकल छात्र डॉ. शुभम खैरनार को हिरासत में लिया गया
- नासिक में पहली डिजिटल कॉपी तैयार कर देश के अन्य राज्यों में सॉल्वर गैंग्स को भेजी गई थी
- प्रश्नपत्र की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए निजी कुरियर कर्मचारी ने पेपर को तीस मिनट के लिए एक्सेस किया था
NEET परीक्षा में हुई धांधली को लेकर हर पल चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. अब जांच एजेंसियों ने नासिक से डॉ. शुभम खैरनार नाम के एक आरोपी को हिरासत में लिया है. हैरानी की बात यह है कि शुभम खुद एक मेडिकल छात्र है. वह भोपाल के एक कॉलेज में BAMS (आयुर्वेदिक चिकित्सा) के अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा है. शुभम की गिरफ्तारी के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि इस नेटवर्क के तार कितने गहरे और प्रोफेशनल तरीके से जुड़े हुए हैं.
इस पूरे प्रकरण में अब महाराष्ट्र का नाशिक शहर जांच के केंद्र में आ गया है. ताजा जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि नीट परीक्षा का पेपर लीक करने की पहली डिजिटल कॉपी नासिक के ही एक गुप्त ठिकाने पर तैयार की गई थी. इसके बाद ही इसे देश के अन्य राज्यों में सक्रिय 'सॉल्वर गैंग्स' को भेजा गया.
कुरियर सेवा की भूमिका संदिग्ध
नाशिक में प्रश्नपत्र की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए एक निजी कुरियर सेवा के कर्मचारी का इस्तेमाल किया गया. सूत्रों के मुताबिक, जब प्रश्नपत्रों का सुरक्षित ट्रंक अपने गंतव्य की ओर जा रहा था, तब उस कर्मचारी ने कथित तौर पर इसे 30 मिनट के लिए एक्सेस करने की अनुमति दी. इसी आधे घंटे के भीतर पेपर की डिजिटल कॉपी तैयार कर ली गई थी.
पोर्टेबल स्कैनर का हुआ इस्तेमाल
आमतौर पर ऐसी घटनाओं में लोग मोबाइल से फोटो खींचते हैं, लेकिन यहां मामला बहुत हाईटेक था. टेलीग्राम ग्रुप्स पर पेपर की स्पष्टता बनाए रखने के लिए अपराधियों ने हाई डेफिनिशन पोर्टेबल स्कैनर का उपयोग किया. इसका मकसद यह था कि सॉल्वर गैंग के पास जाने वाला हर अक्षर बिल्कुल साफ दिखे, ताकि उन्हें पेपर हल करने में कोई समस्या न हो.
AI मॉनिटरिंग को चकमा देने के लिए 'शैडो सर्वर' का जाल
यह चोरी सिर्फ पेपर स्कैन करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसे फैलाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता का भी सहारा लिया गया. जांच एजेंसियां नासिक के बाहरी इलाके में एक 'शैडो सर्वर' की तलाश कर रही हैं. आशंका है कि पेपर की इमेजेस इसी सर्वर पर होस्ट की गई थीं, ताकि NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम को धोखा दिया जा सके. इतना ही नहीं, अपनी लोकेशन छिपाने के लिए मास्टरमाइंड ने नासिक के एक छोटे आईटी स्टार्टअप की लीज लाइन का इस्तेमाल किया, जिससे उनका डेटा सामान्य इंटरनेट ट्रैफिक में घुलमिल जाए और पकड़ा न जा सके.
जांच में यह भी पता चला है कि नासिक से जो पेपर लीक हुआ, उसमें केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) के 120 सवालों का एक विशिष्ट सेट था, जो असली परीक्षा के सवालों से हूबहू मेल खाता था. सबसे डराने वाली बात यह है कि अपराधियों ने परीक्षा शुरू होने से करीब 42 घंटे पहले ही इस लीक को अंजाम दे दिया था. फिलहाल, एजेंसियां उस 'ब्लाइंड लिंक' की जांच कर रही हैं, जहां नासिक के एक कोचिंग संचालक और राजस्थान के मास्टरमाइंड ने मिलकर इस पूरी लॉजिस्टिक्स चेन में सेंध लगाने की साजिश रची थी.
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