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NEET पेपर लीक: नए कानून के बावजूद क्यों नहीं थमे पेपर लीक? जान लीजिए क्या है प्रावधान और सजा

फरवरी 2024 में मोदी सरकार ने The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Bill, 2024 संसद में पेश किया. चर्चा के बाद यह बिल फरवरी 2024 में ही पारित हो गया और जून 2024 में यह कानून लागू भी हो गया.

NEET पेपर लीक: नए कानून के बावजूद क्यों नहीं थमे पेपर लीक? जान लीजिए क्या है प्रावधान और सजा
  • नीट परीक्षा को पेपर लीक होने के कारण रद्द कर दिया गया, जिसमें 22.80 लाख परीक्षार्थी शामिल थे.
  • फरवरी 2024 में संसद ने पेपर लीक रोकने हेतु सख्त कानून पास किया, जिसमें दस साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है.
  • नया कानून परीक्षा में अनियमितताओं में शामिल अधिकारियों और कर्मचारी को भी जेल और भारी जुर्माने की सजा देता है.

देश भर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली परीक्षा नीट (NEET) को एक बार फिर रद्द करना पड़ा है. 3 मई को आयोजित इस परीक्षा में 22.80 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए थे. परीक्षा रद्द करने की वजह पेपर लीक बताई गई है. शुक्रवार को राजस्थान में नीट का पेपर लीक होने की खबर सामने आने के बाद से ही परीक्षा रद्द होने के कयास लगाए जा रहे थे. ताजा घटनाक्रम के बाद पेपर लीक रोकने के लिए वर्ष 2024 में बनाए गए कानून को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है.

दरअसल, 2023 के आखिर में राजस्थान समेत तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे. राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सत्तारूढ़ कांग्रेस के खिलाफ पेपर लीक को बड़ा मुद्दा बनाया था. चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस को करारी शिकस्त देते हुए सत्ता पर कब्जा कर लिया. चुनावी अभियान के दौरान बीजेपी ने पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अन्य धांधलियों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने का वादा किया था. उसी वादे को पूरा करने के लिए फरवरी 2024 में मोदी सरकार ने The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Bill, 2024 संसद में पेश किया. चर्चा के बाद यह बिल फरवरी 2024 में ही पारित हो गया और जून 2024 में यह कानून लागू भी हो गया.

10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान

इस कानून का मकसद नीट जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को रोकने के लिए जवाबदेही तय करना और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करना था. कानून में पेपर लीक को संगठित और सामूहिक अपराध की श्रेणी में रखा गया है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम पांच साल और अधिकतम दस साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है. इसके साथ ही कम से कम एक करोड़ रुपये का जुर्माना भी तय किया गया है.

कानून में परीक्षा के आयोजन से जुड़ी निजी एजेंसियों और संस्थानों के कर्मचारियों व अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है. यदि परीक्षा आयोजित करने वाली किसी एजेंसी के अधिकारी या कर्मचारी पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं में शामिल पाए जाते हैं, तो उन्हें भी अधिकतम दस साल तक की कैद और न्यूनतम एक करोड़ रुपये के जुर्माने की सजा दी जा सकती है.

ऐसे में पेपर लीक के चलते ताजा नीट परीक्षा के रद्द होने से यह सवाल उठने लगा है कि जिस मकसद से यह कानून बनाया गया था, क्या वह अपने उद्देश्य में असफल रहा है. साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि अब जब यह ताजा मामला सामने आ चुका है, तो क्या नए कानून के तहत दोषियों को सख्त सजा दिलाई जा सकेगी.

नीट यूजी पेपर लीक: अब तक की सबसे बड़ी बातें

  • पेपर लीक का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला मिला
  • गेस पेपर और असली प्रश्नपत्र में भारी समानता
  • हाई-टेक स्कैनिंग और एन्क्रिप्टेड नेटवर्क का इस्तेमाल
  • राजस्थान SOG ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया
  • सीकर और कोचिंग कनेक्शन जांच के घेरे में
  • अब पूरी जांच CBI के हाथ में
  •  पुराने पेपर लीक माफिया और इंटर-स्टेट नेटवर्क की भी जांच जारी

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