दतिया उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार की घोषणा के बाद शुरू हुआ राजनीतिक बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों में नाराजगी खुलकर सामने आई है. विरोध प्रदर्शन, हाईवे जाम और सामूहिक इस्तीफों के बीच अब पहली बार नरोत्तम मिश्रा सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं.
उन्होंने कार्यकर्ताओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि पार्टी के फैसले का सम्मान करें और किसी भी तरह का विरोध या ऐसा कदम न उठाएं जिससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचे. वहीं भाजपा नेतृत्व भी लगातार यह संदेश दे रहा है कि पार्टी का निर्णय अंतिम है और सभी कार्यकर्ताओं को मिलकर अधिकृत उम्मीदवार के लिए काम करना चाहिए.
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टिकट घोषणा के बाद बढ़ा सियासी तापमान
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा ने आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. इसके बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में असंतोष देखने को मिला. कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए और नाराज समर्थक सड़कों पर उतर आए. स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब ग्वालियर-झांसी हाईवे पर जाम लगा दिया गया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं.
जिला संगठन में भी दिखी नाराजगी
भाजपा के इस फैसले का असर संगठन के भीतर भी दिखाई दिया. जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह समेत कई पदाधिकारियों और कार्यकारिणी के सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. चुनाव से ठीक पहले संगठन में पैदा हुई यह स्थिति भाजपा के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है. पार्टी अब नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने की कोशिशों में जुटी हुई है.
पहली बार सामने आए नरोत्तम मिश्रा
टिकट नहीं मिलने के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा पहली बार ग्वालियर के डबरा में मीडिया के सामने आए. उन्होंने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के वीडियो मिले हैं. इस दौरान उन्होंने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और किसी भी उग्र कदम से बचने की अपील की.
कार्यकर्ताओं से की भावुक अपील
नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है और कार्यकर्ताओं को उसका सम्मान करना चाहिए. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी कार्यकर्ता पेट्रोल या मिट्टी का तेल डालकर विरोध जैसी गतिविधियों में शामिल न हो. उन्होंने कहा कि अपनी बात रखने के लिए पार्टी के भीतर उचित मंच मौजूद हैं और विरोध का तरीका संगठन को नुकसान पहुंचाने वाला नहीं होना चाहिए.
"मार्ग अवरुद्ध न करें"
डॉ. मिश्रा ने कहा कि उन्होंने पहले भी कार्यकर्ताओं से यही कहा था और आज भी दोहरा रहे हैं कि किसी भी हालत में सड़कें जाम न करें और न ही ऐसा कोई काम करें जिससे आम लोगों को परेशानी हो. उन्होंने संकेत दिया कि अनुशासन और संगठन की मर्यादा भाजपा की सबसे बड़ी ताकत रही है और कार्यकर्ताओं को इसका पालन करना चाहिए.
नरोत्तम की भूमिका पर सबकी नजर
हालांकि नरोत्तम मिश्रा ने खुले तौर पर पार्टी के फैसले का सम्मान करने की बात कही है, लेकिन अब राजनीतिक गलियारों की नजर इस बात पर टिकी है कि वह चुनाव प्रचार में कितनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं. उनके समर्थकों की नाराजगी और संगठन के भीतर की स्थिति आने वाले दिनों में दतिया उपचुनाव की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है.
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