- मध्य प्रदेश रोजगार पोर्टल पर 6 माह में पंजीकृत बेरोजगार युवाओं की संख्या घटकर 17.71 लाख रह गई है.
- सरकार के पास यह जानकारी नहीं है कि कितने युवाओं को नौकरी मिली या पंजीकरण समाप्त होने के कारण क्या हैं.
- पंजीकृत युवाओं में दसवीं से लेकर स्नातकोत्तर तक विभिन्न शैक्षणिक वर्ग के युवा रोजगार की तलाश में शामिल हैं.
मध्य प्रदेश में बेरोजगारी के आंकड़ों को लेकर विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए जवाब ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. रोजगार की तलाश में पंजीकृत युवाओं की संख्या महज छह महीने में 25.96 लाख से घटकर 17.71 लाख रह गई है. यानी करीब 8.25 लाख नाम रोजगार पोर्टल से कम हो गए.
हैरानी की बात यह है कि सरकार के पास यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि इन युवाओं को नौकरी मिली, उनका पंजीयन क्यों समाप्त हुआ या वे अब किस स्थिति में हैं? वहीं निजी क्षेत्र में जारी किए ऑफर लेटर के बाद भी यह रिकॉर्ड नहीं रखा कि कितने युवाओं ने वास्तव में नौकरी ज्वाइन की. इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार की रोजगार व्यवस्था और आंकड़ों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं.
विधानसभा में सामने आए आंकड़े
कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल के जवाब में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल ने बताया कि 30 जून 2026 तक मध्य प्रदेश रोजगार पोर्टल पर 17 लाख 71 हजार 132 युवा रोजगार की प्रतीक्षा में पंजीकृत हैं. सरकार की ओर से प्रस्तुत यह आंकड़ा चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि दिसंबर 2025 में विधानसभा में इसी पोर्टल पर पंजीकृत बेरोजगार युवाओं की संख्या 25 लाख 96 हजार बताई थी.
6 महीने में 8.25 लाख बेरोजगार कम, उठे सवाल
विपक्ष का दावा है कि छह महीने के भीतर करीब 8.25 लाख पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या कम हो गई. कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सवाल उठाया है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर युवाओं के नाम रोजगार पोर्टल से कैसे और किस आधार पर हटाए. उनका कहना है कि सरकार ने इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
किस शैक्षणिक वर्ग के कितने युवा पंजीकृत
सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं में 1,70,718 दसवीं पास, 5,01,474 बारहवीं पास, 7,29,708 स्नातक, 2,32,905 स्नातकोत्तर और 1,36,327 अन्य शिक्षित युवा शामिल हैं. ये सभी रोजगार की तलाश में पोर्टल पर पंजीकृत हैं.
सामाजिक वर्ग के आंकड़े भी आए सामने
रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं में 3,32,046 अनुसूचित जाति, 2,98,621 अनुसूचित जनजाति, 7,12,612 अन्य पिछड़ा वर्ग और 4,27,853 सामान्य वर्ग के युवा शामिल हैं. वहीं लिंग के आधार पर देखें तो 8,31,661 महिलाएं और 9,39,471 पुरुष रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
ऑफर लेटर तो दिए, लेकिन नौकरी मिली या नहीं
सरकार के जवाब के अनुसार इस अवधि में निजी क्षेत्र में करीब 2,700 युवाओं को ऑफर लेटर जारी किए. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि रोजगार के अवसर सीमित रहे, तो लाखों युवाओं के नाम पोर्टल से कैसे कम हो गए. सरकार ने यह भी बताया कि जून 2017 से जून 2026 के बीच निजी क्षेत्र में 8 लाख 17 हजार 744 युवाओं को ऑफर लेटर जारी किए हैं, लेकिन इसके बाद उनकी रोजगार स्थिति का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा.
सरकार ने स्वीकार किया है कि ऑफर लेटर जारी होने के बाद यह निगरानी नहीं की जाती कि संबंधित युवक या युवती ने नौकरी ज्वाइन की या नहीं. इसके अलावा कितने लोगों ने नौकरी छोड़ दी, कितनों की नौकरी चली गई और कितने अभी भी कार्यरत हैं, इसकी जानकारी भी विभाग के पास उपलब्ध नहीं है. यही नहीं, सरकारी नौकरियों का समेकित रिकॉर्ड भी विभाग के पास नहीं होने की बात सामने आई है.
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