मध्य प्रदेश की उपजाऊ मिट्टी से उपजा एक ऐसा अनमोल खजाना है, जिसके आगे दुनिया भर के अन्य अनाज फीके नजर आते हैं. हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध 'शरबती गेहूं' की, जिसे अपनी बेजोड़ चमक और लाजवाब गुणवत्ता के कारण ग्लोबल लेवल पर 'गोल्डन ग्रेन' (सुनहरा दाना) कहा जाता है. हाल ही में इसे मिले जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग ने इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत पहचान दी है, जिससे इसकी साख और बढ़ गई है.अहम ये है कि इसी महीने भारत सरकार के एपीडा (APEDA) और मध्य प्रदेश सरकार ने शरबती गेहूं के सीधे निर्यात के लिए 'विशेष डायरेक्ट एक्सपोर्ट कॉरिडोर' शुरू किया है. इसके साथ ही बाजार में नकली शरबती की पहचान खत्म करने के लिए इसी सीजन से हर बोरी पर 'जीआई क्यूआर कोड ट्रेसिबिलिटी' अनिवार्य कर दी गई है. अपनी बेजोड़ प्राकृतिक मिठास और शानदार स्वास्थ्य लाभों के कारण इस प्रीमियम गेहूं ने खाड़ी देशों मसलन- यूएई, सऊदी अरब, कतर, ओमान और कुवैत के संपन्न परिवारों में अपनी धाक जमा ली है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस गेहूं को खरीदने के लिए विदेशी खरीदार हमेशा कतार में खड़े रहते हैं. नई तकनीक के आते ही खाड़ी देशों से ऑर्डर में अचानक 30% का उछाल देखा गया है.
ग्लोबल लेवल पर शरबती गेहूं की बढ़ती मांग का अंदाजा आप दुबई के एक प्रमुख अनाज आयातक यूसुफ अली अल-मंसूर के बयान से लगा सकते हैं. वे कहते हैं-
मांग में भारी उछाल: निर्यात और कीमतों का नया रिकॉर्ड
दरअसल मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में शरबती गेहूं सिर्फ एक पारंपरिक फसल नहीं, बल्कि ग्लोबल मंच पर राज्य का सबसे बड़ा ब्रांड बन चुका है. मंडी के हालिया रुझानों और निर्यात के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस प्रीमियम अनाज की लोकप्रियता साफ दिखाई देती है. जहां सामान्य गेहूं की सरकारी खरीद और बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आसपास घूमते हैं, वहीं शरबती गेहूं खुली नीलामी में रिकॉर्ड तोड़ रहा है.

उत्पादन के जिलेवार आंकड़े
शरबती गेहूं का मुख्य उत्पादन मध्य प्रदेश के चुनिंदा बेल्ट में होता है, जिसमें सीहोर, विदिशा, अशोकनगर, होशंगाबाद और हरदा शामिल हैं. इन क्षेत्रों की काली मटियार मिट्टी में सल्फर और पोटाश की अधिकता होती है, जो इसे विशेष स्वाद देती है. मध्य प्रदेश से कुल गेहूं निर्यात में सामान्य गेहूं की हिस्सेदारी तो बड़ी है ही, लेकिन मूल्य और मुनाफे के मामले में शरबती गेहूं सबसे आगे है. एपीडा (APEDA) और राज्य कृषि विपणन बोर्ड के इनपुट के अनुसार, शरबती गेहूं के शुद्ध निर्यात के आंकड़े पिछले तीन सालों में इस प्रकार रहे हैं:

अकेले सीहोर और विदिशा जिले मिलकर इस कुल उत्पादन का लगभग 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं.. वित्तीय वर्ष 2023-24 में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और घरेलू स्टॉक की समीक्षा के बीच एमपी से लगभग 32,000 मीट्रिक टन शुद्ध शरबती गेहूं खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को एक्सपोर्ट किया गया जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में ब्रांडिंग और सीधे लॉजिस्टिक्स सपोर्ट की वजह से 44,000 मीट्रिक टन के आंकड़े को पार कर गया है. जिसमें यूएई और सऊदी अरब की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा यानि लगभग 60%)है.
ये देश हैं शरबती गेहूं के सबसे बड़े दीवाने
एमपी के इस प्रीमियम गेहूं की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ रही है. इसके सबसे बड़े खरीदार देशों की सूची में ये नाम प्रमुख हैं:
खाड़ी देश (Gulf Countries): संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, ओमान, कुवैत और कतर जैसे देशों के अमीर परिवारों में इस गेहूं की सबसे ज्यादा डिमांड है.
यूरोप और अन्य देश: इसके अलावा कुछ यूरोपीय देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में भी प्रीमियम आटे के रूप में इसकी बंपर सप्लाई होती है.
क्यों हर कोई है इसका दीवाना?
शरबती गेहूं को दुनिया का सबसे प्रीमियम गेहूं माना जाता है और इसके पीछे ठोस वजहें हैं:
कुदरती मिठास और चमक: सीहोर, विदिशा और अशोकनगर जैसे जिलों की मिट्टी में सल्फर की मात्रा अधिक होती है, जिससे इस गेहूं के दानों में एक प्राकृतिक मिठास और सोने जैसी चमक होती है. इसी मिठास के कारण इसे 'शरबती' कहा जाता है.
पानी की कम जरूरत: इस गेहूं की खेती मुख्य रूप से बारानी (rain-fed) इलाकों में होती है, जहां सिंचाई की बहुत कम जरूरत पड़ती है.
बेजोड़ रोटियां: इस गेहूं में ग्लूकोज और सुक्रोज जैसे साधारण शर्करा की मात्रा आम गेहूं (जिसमें केवल स्टार्च होता है) के मुकाबले लगभग 2% अधिक होती है. यही वजह है कि इसकी रोटियां बेहद मुलायम, स्वादिष्ट और लंबे समय तक ताजी रहती हैं.
कीटनाशकों से मुक्ति: शुष्क वातावरण और कम सिंचाई में उगने के कारण शरबती गेहूं की फसल में रोग लगने की आशंका न के बराबर होती है. इससे किसानों को कीटनाशकों के भारी इस्तेमाल की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे यह आटा स्वास्थ्य के लिहाज से काफी सुरक्षित और ऑर्गेनिक माना जाता है.
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स्वाद और बनावट का वैज्ञानिक कारण
इसके मूल कारणों को देखें, तो शरबती गेहूं में सामान्य गेहूं के मुकाबले ग्लूकोज और सुक्रोज जैसी शर्करा की मात्रा लगभग 1.5 से 2 प्रतिशत अधिक पाई जाती है. इसमें पानी की सोखने की क्षमता (Water Absorption Capacity) अधिक होती है, जिससे इसकी रोटियां 10 से 12 घंटे बाद भी उतनी ही मुलायम रहती हैं. चूंकि इसकी खेती पूरी तरह से बारानी (कम सिंचाई वाले क्षेत्रों) में होती है, इसलिए इसके दानों की प्राकृतिक संरचना और चमक किसी भी हाइब्रिड या विदेशी किस्म से कहीं बेहतर होती है. यही कारण है कि आज वैश्विक बाजार में इसकी मांग लगातार बनी हुई है और यह मध्य प्रदेश के किसानों के लिए समृद्धि का सबसे बड़ा जरिया साबित हो रहा है.
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