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दुष्कर्म के आरोपी को बचाने की साजिश में नायब तहसीलदार और पटवारी समेत 4 अफसर फंसे, 7 पर FIR

भिंड कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए तहसीलदार, पटवारी और सरपंच समेत 7 पर FIR के आदेश दिए हैं. आरोप है कि सभी ने दुष्कर्म के आरोपी को दस्तावेजों से 'नाबालिग' दिखाने की साजिश रची थी.

दुष्कर्म के आरोपी को बचाने की साजिश में नायब तहसीलदार और पटवारी समेत 4 अफसर फंसे, 7 पर FIR
भिंड कोर्ट ने 4 प्रशासनिक अधिकारियों समेत 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए.

भिंड: महाराष्ट्र के ठाणे में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को कानून की गिरफ्त से बचाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे नाबालिग घोषित करने के सनसनीखेज मामले में भिंड जिला न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने प्रथम दृष्टया साजिश और कूटरचना के आरोपों को गंभीर मानते हुए 4 प्रशासनिक अधिकारियों सहित 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश सिटी कोतवाली थाना पुलिस को दिए हैं. 

कोर्ट के आदेश के दायरे में तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा, तत्कालीन पटवारी संजीव शर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजनी जादौन, तत्कालीन सचिव शेर सिंह यादव, सरपंच राजकुमार दुबे, कल्लू यादव, आशुतोष सिंह यादव आरोपी शामिल हैं. आरोप है कि सभी ने मिलकर भिंड जिले के ऊमरी थाना क्षेत्र के यादवन के पुरा का रहने बाला आरोपी विमल यादव के पक्ष में फर्जी दस्तावेज तैयार किए और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की. 

जानिए क्‍या है पूरा मामला?  

दरसअल, पूरा मामला साल 2025 में महाराष्ट्र के ठाणे में दर्ज नाबालिग से दुष्कर्म के केस से जुड़ा है. आरोप है कि घटना के समय विमल यादव बालिग था, लेकिन उसे नाबालिग साबित करने के लिए उसके पिता उमेश यादव ने कथित रूप से प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य लोगों की मिलीभगत से फर्जी शपथ-पत्र और दस्तावेज तैयार कराए. 

सिटी कोतवाली थाना पुलिस दर्ज करेगी एफआईआर.

सिटी कोतवाली थाना पुलिस दर्ज करेगी एफआईआर.

दस्तावेजों में एक साल कम कर दी आयु 

आरोपों के मुताबिक आरोपी की वास्तविक जन्मतिथि 12 दिसंबर 2006 थी, जिसे बदलकर 25 दिसंबर 2007 कर दिया गया. इस तरह दस्तावेजों में एक वर्ष की हेराफेरी कर आरोपी को नाबालिग दर्शाने का प्रयास किया गया, ताकि उसे कानून का लाभ मिल सके. यह भी आरोप है कि तत्कालीन नायब तहसीलदार की सहमति से पटवारी, ग्राम सचिव, सरपंच और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने रिकॉर्ड में हेरफेर कर षड्यंत्र पूर्वक फर्जी जन्म प्रमाणपत्र तैयार किया. इस पूरे फर्जीवाड़े के बदले बड़ी रकम के लेन-देन के आरोप भी लगाए गए हैं. 

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कोर्ट ने दिए एफआईआर के आदेश  

मामले में अधिवक्ता गौरव भारद्वाज ने जिला न्यायालय में परिवाद पेश किया था. सुनवाई के दौरान 18 मार्च 2026 को कोर्ट ने कलेक्टर को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए. कलेक्टर ने जांच की जिम्मेदारी एसडीएम को सौंपी. जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत होने के बाद न्यायालय ने आरोपों को गंभीर मानते हुए सिटी कोतवाली पुलिस को संबंधित आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 336 (2), 336 (3), 340 (1), 340 (2) के तहत एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई करने के आदेश दिए. कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है.

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