पहले गरीबों के वितरित किए जाने वाले अनाज में कंकड़-पत्थर के टुकड़े आदि की शिकायत मिलती थी लेकिन अब मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ से तो अलग ही तरह का मामला सामने आया है. यहां गरीबों को बांटे जाने वाले सरकारी गेहूं की बोरी में अनाज के साथ एक जानवर का कंकाल मिला है. जी हां आपने सही पढ़ा है. टीकमगढ़ जिले के एक सरकारी राशन वितरण प्रणाली की दुकान से ये बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. इस घटना के बाद से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. वे इसे वे गरीबों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं. दूसरी तरफ सहायक खाद्य अधिकारी समर्थ तिवारी का कहना है कि खराब अनाज विदिशा से आया है और उसे वापस किया जाएगा.
घर जाकर बोरी खोली तो उड़े होश
यह पूरा मामला टीकमगढ़ जिले के नन्हीटेहरी गांव का है. यहां सहकारी महिला समिति द्वारा संचालित उचित मूल्य की दुकान से ग्रामीणों को राशन का वितरण किया जा रहा था. गांव के ही कोमल लोधी जब राशन दुकान पर अपना गेहूं लेने पहुंचे, तो वितरण करने वाले कर्मचारी ने दो हितग्राहियों के हिस्से का गेहूं एक ही बोरी में पैक करके उन्हें दे दिया. कोमल लोधी जब इस बोरी को लेकर अपने घर पहुंचे और उसे खोला, तो उनके होश उड़ गए. बोरी के भीतर अनाज के बीच में एक खोपड़ी और हाथ-पैर की हड्डियों का कंकाल पड़ा हुआ था. घबराए परिजनों ने तुरंत इसकी सूचना अन्य ग्रामीणों को दी और बोरी को वापस उचित मूल्य की दुकान पर ले आए.

टीकमगढ़ के इसी राशन दुकान से सरकारी गेहूं की बोरी से जानवर का कंकाल मिला है. जिसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है.
Photo Credit: सूर्य प्रकाश गोस्वामी
विदिशा के वेयरहाउस से आया था सरकारी गेहूं
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने राशन दुकान पर जमकर हंगामा और विरोध प्रदर्शन किया. सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला और आबकारी व खाद्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे. टीकमगढ़ के सहायक खाद्य अधिकारी समर्थ तिवारी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि राशन की यह खेप नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से विदिशा जिले के संकल्प वेयरहाउस से टीकमगढ़ आई थी. अधिकारियों के मुताबिक, जैसे ही बोरी में कंकाल मिलने की बात सामने आई, तुरंत राशन का वितरण रुकवा दिया गया.
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जांच के आदेश और अनाज वापस भेजने की तैयारी
प्रशासन ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं. सहायक खाद्य अधिकारी का कहना है कि विदिशा से टीकमगढ़ पहुंचे इस पूरे लॉट के खराब और संदिग्ध अनाज को वापस विदिशा वेयरहाउस भेजा जा रहा है. इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि पैकिंग और लोडिंग के दौरान इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई. उधर, ग्रामीणों का कहना है कि पहले राशन के अनाज में कंकड़-पत्थर मिलना आम बात थी, लेकिन अब कंकाल जैसी चीजें निकलना सीधे तौर पर गरीबों के जीवन के साथ क्रूर मजाक है. ग्रामीण अब इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
सरकारी गोदामों की बदहाली और सुरक्षा पर खड़े हुए सवाल
इस घटना ने मध्य प्रदेश में सरकारी अनाजों के भंडारण और नागरिक आपूर्ति निगम के वेयरहाउसों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है. नियमों के मुताबिक, भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के गोदामों में रखे अनाज की हर 15 दिनों में 'फोर्टिफाइड' जांच और कीटनाशक छिड़काव होना अनिवार्य है. एफएसएसएआई (FSSAI) के फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के तहत किसी भी राशन खेप को जारी करने से पहले क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर का क्लीयरेंस जरूरी होता है. लेकिन विदिशा के 'संकल्प वेयरहाउस' से बिना कड़े क्वालिटी चेक के टीकमगढ़ तक कंकाल युक्त गेहूं की खेप पहुंच जाना यह दर्शाता है कि भंडारण के दौरान न तो बोरियों की सुरक्षा की गई और न ही लोडिंग के वक्त उनकी जांच हुई.
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