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MP में PM की अपील को गाड़ी के धुएं में उड़ा रहे BJP नेता ! 200 वाहनों के काफिले के साथ जगह-जगह शक्ति प्रदर्शन

MP BJP Leaders' massive Convoys: पीएम मोदी ने देश से पेट्रोल-डीजल बचाने और सादगी अपनाने की अपील की, लेकिन मध्य प्रदेश में बीजेपी नेताओं के 200 गाड़ियों वाले काफिले ने इस संदेश की हवा निकाल दी. सादगी के इस विरोधाभास पर विशेष रिपोर्ट.

MP में PM की अपील को गाड़ी के धुएं में उड़ा रहे BJP नेता ! 200 वाहनों के काफिले के साथ जगह-जगह शक्ति प्रदर्शन
  • PM नरेंद्र मोदी की डीजल-पेट्रोल बचाने और सादगी अपनाने की अपील के बावजूद MP में बड़े काफिले सड़कों पर नजर आए
  • भोपाल में नव नियुक्त पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर 200 से अधिक वाहनों के काफिले के साथ निकले
  • शिवपुरी और खंडवा में भी भाजपा नेताओं के बड़े वाहन काफिले के साथ पहुंचने से जाम का आलम दिखा
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MP BJP Convoy Controversy: ऐसे समय में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इज़राइल-ईरान संघर्ष से उत्पन्न वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देशवासियों से सादगी अपनाने की अपील की है डीजल-पेट्रोल की बचत करने, एक वर्ष तक सोना न खरीदने, गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं को टालने और सार्वजनिक परिवहन या कारपूलिंग अपनाने का आग्रह किया है उसी समय मध्य प्रदेश में उनकी अपनी पार्टी के नेता सड़कों पर बिल्कुल उल्टा संदेश देते दिखाई दे रहे हैं.

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हाईवे पर हुकूमत: भोपाल की सड़कों पर 200 वाहनों का रेला

सबसे चौंकाने वाली तस्वीर तब सामने आई जब नव नियुक्त पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर उज्जैन से भोपाल 200 से अधिक वाहनों के विशाल काफिले के साथ पहुंचे. इस काफिले ने न केवल हाईवे बल्कि राजधानी भोपाल की प्रमुख सड़कों पर भारी जाम की स्थिति पैदा कर दी. भीषण गर्मी में आम यात्री, बच्चे, बुजुर्ग और रोजमर्रा के कामकाजी लोग घंटों फंसे रहे, जबकि सत्ता का प्रदर्शन सायरनों और वाहनों की लंबी कतारों के साथ आगे बढ़ता रहा. भाजपा प्रदेश कार्यालय से लेकर डीबी मॉल, बोर्ड ऑफिस चौराहा और अरेरा हिल्स तक सड़कें जाम का प्रतीक बन गईं जहां एक ओर जनता को संयम का संदेश दिया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक वैभव खुलेआम दौड़ रहा था.
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शिवपुरी से खंडवा तक: रसूख के आगे बेबस अपील

विरोधाभास यहीं नहीं रुका. शिवपुरी में पिछोर विधायक प्रीतम सिंह लोधी भी मंदिर विवाद सुलझाने लगभग 200 वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे. वहीं खंडवा में प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र लोधी जिला पंचायत समीक्षा बैठक में दर्जनों वाहनों और सायरनों के साथ पहुंचे.

जब इस पर सवाल उठा तो उन्होंने स्वयं स्वीकार किया, “प्रधानमंत्री की अपील का पालन होना चाहिए. मैंने इस संबंध में कलेक्टर को भी निर्देश दिए हैं. वर्तमान में मेरे साथ काफी वाहन थे, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का साथ चलना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है.”

डैमेज कंट्रोल: ई-रिक्शा का 'फोटो-ऑप' !

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री की अपील के प्रति प्रतिबद्धता जताने की कोशिश करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री की अपील का असर अवश्य पड़ेगा. आज हमारे नेताओं ने ई-रिक्शा से यात्रा कर पहल की है. हालांकि कुछ समर्थक निजी वाहनों से आए. हम सभी कार्यकर्ताओं और नागरिकों से अपील करते हैं कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करें और सार्वजनिक या वैकल्पिक परिवहन का उपयोग करें.” उन्होंने आगे कहा, “हम आयात निर्भरता कम करने और डीजल-पेट्रोल के सीमित उपयोग के लिए निरंतर प्रयासरत हैं.”
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प्रतीकात्मक 'स्कूटर' सवारी और पीछे वाहनों की लंबी कतार

लेकिन इन बयानों ने सवालों को कम करने के बजाय और गहरा कर दिया है. एक ओर कुछ नेताओं द्वारा ई-रिक्शा और ई-स्कूटर की प्रतीकात्मक सवारी दिखाई गई, तो दूसरी ओर सैकड़ों वाहनों के काफिलों ने इन प्रयासों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया. भोपाल में लघु उद्योग निगम अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह ई-रिक्शा से पहुंचे, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ई-स्कूटर से निकले, लेकिन इनके साथ भी समर्थकों के निजी वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं.

जनता से त्याग, खुद के लिए ठाठ?

इस पूरे घटनाक्रम ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सादगी और संसाधन बचत का संदेश केवल आम नागरिकों के लिए है, जबकि सत्ता प्रतिष्ठान स्वयं उसी अपील को सड़कों पर ध्वस्त करता नजर आता है? जब जनता से त्याग की अपेक्षा की जाए और नेतृत्व स्वयं प्रदर्शन की राजनीति में डूबा दिखे, तब संदेश की नैतिक शक्ति कमजोर पड़ जाती है. मध्य प्रदेश की सड़कों पर इस सप्ताह यही विरोधाभास सबसे तेज़ी से दिखाई दिया मंच से मितव्ययिता, सड़क पर महंगी शक्ति-प्रदर्शनी.
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