- पीएम मोदी 15 मई से छह दिन के विदेश दौरे पर यूएई समेत 5 देशों का दौरा करेंगे और द्विपक्षीय संबंध मजबूत करेंगे
- यूएई में ऊर्जा सहयोग, व्यापार, निवेश और भारतीय समुदाय के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण बातचीत होगी
- नीदरलैंड में रक्षा, सुरक्षा, नवाचार और हरित हाइड्रोजन में रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाने पर खासा जोर होगा
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक उथल-पुथल के बीच पीएम मोदी 15 मई से छह दिनों के विदेश दौरे पर जा रहे हैं. इस दौरान वह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समेत 5 देशों का दौरा करेंगे, जहां भारत के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर फोकस रहेगा. दरअसल पीएम मोदी अपनी यात्रा की शुरुआत यूएई से करेंगे, जहां वह राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे. इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और पश्चिम एशिया के हालात पर भी चर्चा होगी. विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं को द्विपक्षीय मुद्दों, विशेष रूप से ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा का अवसर मिलेगा.
यूएई दौरे में क्या समझौते संभव
पीएम मोदी की इस बार की यूएई यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग, व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों पर बातचीत प्रमुख रहेगी. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूती देगा. यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार भी है और पिछले 25 वर्षों में निवेश का सातवां सबसे बड़ा स्रोत रहा है. इसके अलावा यूएई में 45 लाख से अधिक भारतीयों की मौजूदगी के कारण वहां भारतीय समुदाय के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत होना लगभग तया है. इस दौरे में यूएई को शामिल किया जाना खास माना जा रहा है, क्योंकि पीएम मोदी की यात्रा की शुरुआत यहीं से हो रही है. ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, यह पड़ाव भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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नीदरलैंड दौरा: व्यापार और टेक्नोलॉजी पर जोर
यूएई के बाद प्रधानमंत्री मोदी 15 से 17 मई तक नीदरलैंड के दौरे पर रहेंगे. यह 2017 के बाद उनकी दूसरी यात्रा होगी. पीएम मोदी अपनी इस यात्रा के दौरान किंग विलेम-अलेक्जेंडर, रानी मैक्सिमा और प्रधानमंत्री रॉब जेटेन से मुलाकात करेंगे. विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा में रक्षा, सुरक्षा, नवाचार, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर फोकस होगा.
स्वीडन में एआई और ग्रीन ट्रांजिशन पर चर्चा
नीदरलैंड के बाद पीएम मोदी 17 से 18 मई तक स्वीडन जाएंगे. यह यात्रा प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर हो रही है. इस दौरान दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे और व्यापार बढ़ाने के नए रास्तों पर भी चर्चा करेंगे. दोनों देशों के बीच ग्रीन ट्रांजिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती तकनीक, स्टार्टअप, रक्षा, अंतरिक्ष, क्लाइमेट चेंज और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर फोकस रहेगा. इसके साथ ही दोनों प्रधानमंत्री यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ ‘यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' को भी संबोधित करेंगे.
नॉर्वे में नॉर्डिक समिट और ऐतिहासिक दौरा
पीएम मोदी 18 से 19 मई तक नॉर्वे में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. यह 1983 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी. इस दौरान मोदी राजा हेराल्ड पंचम, रानी सोन्या और प्रधानमंत्री योनस गहर स्टोरे से मुलाकात करेंगे. पीएम मोदी भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे. इस यात्रा में व्यापार, निवेश, स्वच्छ और हरित प्रौद्योगिकी तथा नीली अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा.
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इटली दौरे के साथ यात्रा का समापन
अपने दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 19 से 20 मई तक इटली जाएंगे. यह यात्रा प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर हो रही है. इस दौरान वह राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला से मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ द्विपक्षीय मुद्दे पर बातचीत करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए इटली का दौरा किया था.
यूरोप के साथ रिश्तों को नई मजबूती
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा भारत और यूरोप के बीच साझेदारी को मजबूत करने में मदद करेगी, खासकर व्यापार और निवेश के क्षेत्र में
हाल ही में हुए भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के बाद यह दौरा दोनों पक्षों के लिए सहयोग को आगे बढ़ाने का मौका माना जा रहा है.
(पीटीआई और आईएएनएस इनुपट्स के साथ)
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