मध्य प्रदेश में ड्रग्स के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई जारी है, लेकिन इसके बावजूद नशे का कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा. पिछले 10 दिनों में पुलिस ने करीब 2 करोड़ रुपये से ज्यादा के अवैध मादक पदार्थ जब्त किए हैं. कार्रवाई बड़ी है, लेकिन इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इतनी सख्ती के बावजूद ड्रग्स की सप्लाई प्रदेश में लगातार कैसे जारी है?
बरामदगी के आंकड़े चौंकाने वाले
पिछले कुछ वर्षों में ड्रग्स से जुड़े मामलों के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले रहे हैं. करीब दो साल पहले भोपाल में 1800 करोड़ रुपये की ड्रग्स फैक्ट्री पकड़ी गई थी, वहीं 2025 में 92 करोड़ रुपये की एमडी ड्रग्स बरामद हुई थी. इसके बावजूद हालात ज्यादा नहीं बदले हैं. आज भी राजधानी भोपाल में अवैध कफ सिरप से लेकर सिंथेटिक ड्रग्स तक का नेटवर्क सक्रिय है और धीरे-धीरे यह कारोबार छोटे जिलों तक भी फैलता जा रहा है.
लगातार कार्रवाई से भी नेटवर्क खत्म नहीं
पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और तस्करों को पकड़ने के साथ नेटवर्क भी तोड़े जा रहे हैं. लेकिन बड़ी चुनौती यह है कि जैसे ही एक रैकेट खत्म होता है, कुछ ही दिनों में नया नेटवर्क खड़ा हो जाता है. एडीसीपी क्राइम ब्रांच शैलेंद्र सिंह चौहान के मुताबिक, पुलिस अपना काम पूरी गंभीरता से कर रही है, लेकिन जब तक बाजार में डिमांड बनी रहेगी, तब तक सप्लाई भी किसी न किसी रूप में जारी रहेगी.
नए इलाकों में भी फैल रहा नशे का जाल
पहले प्रदेश के मंदसौर, नीमच और रतलाम जैसे इलाके ड्रग्स तस्करी के लिए जाने जाते थे, लेकिन अब भोपाल और इंदौर के साथ-साथ छोटे जिलों में भी नशे का कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है. सिंथेटिक ड्रग्स और अवैध दवाइयों का नेटवर्क तेजी से फैलना पुलिस और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.
जागरूकता भी उतनी ही जरूरी
2 करोड़ की हालिया बरामदगी, 92 करोड़ की एमडी और 1800 करोड़ की फैक्ट्री जैसे मामले साफ संकेत देते हैं कि समस्या अभी खत्म नहीं हुई है. सवाल यही है कि नए सप्लाई चैन आखिर कहां से तैयार हो रहे हैं. ऐसे में सिर्फ पुलिस कार्रवाई काफी नहीं, बल्कि आम लोगों को भी जागरूक होना होगा, तभी इस बढ़ते नशे के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी.
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