- मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस विधायकों ने राहुल गांधी के समर्थन में धरना दिया था.
- विपक्ष ने NEET परीक्षा और दिल्ली में छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग की थी.
- नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने NEET मुद्दे को विधानसभा कार्यवाही से असंबंधित बताया था.
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को राजनीति उस समय और गरमा गई, जब कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन ने विधानसभा से निकलकर राजभवन तक का रुख कर लिया. NEET परीक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक और कार्यकर्ता पहले विधानसभा परिसर में धरने पर बैठे, फिर राजभवन के सामने प्रदर्शन करने पहुंचे.
प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर धरना समाप्त कराया. हालांकि बाद में सभी को छोड़ दिया गया. पूरे घटनाक्रम के दौरान जमकर नारेबाजी, धक्कामुक्की और गहमागहमी का माहौल देखने को मिला.
NEET मुद्दे पर शुरू हुआ विवाद
विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस ने NEET परीक्षा और दिल्ली में छात्रों से जुड़े मामलों पर चर्चा की मांग उठाई. विपक्ष का कहना था कि यह देशभर के छात्रों और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है, इसलिए सदन में इस पर चर्चा होना जरूरी है. लेकिन सत्ता पक्ष इस मांग से सहमत नहीं हुआ, जिसके बाद विपक्ष ने विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया.
कैलाश विजयवर्गीय के बयान से बढ़ी नाराजगी
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में कहा कि NEET का विषय सीधे तौर पर राज्य विधानसभा की कार्यवाही से जुड़ा मामला नहीं है, इसलिए इस पर चर्चा नहीं हो सकती. मंत्री के इस बयान पर कांग्रेस विधायकों ने कड़ी आपत्ति जताई. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है. इसके बाद सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली.

जीतू पटवारी ने प्रदर्शन स्थल पर की नारेबाजी.
विधानसभा परिसर में धरने पर बैठे कांग्रेस विधायक
सरकार के रुख से नाराज कांग्रेस विधायक विधानसभा परिसर के भीतर ही धरने पर बैठ गए. उन्होंने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विधानसभा में मौजूद थे, जबकि विपक्ष लगातार सरकार पर छात्रों के मुद्दे की अनदेखी का आरोप लगाता रहा. कुछ समय तक विधानसभा परिसर राजनीतिक नारों और विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बना रहा.
पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हुई गहमागहमी
धरना खत्म कराने पहुंची पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी. प्रदर्शनकारी बार-बार पुलिस कार्रवाई का विरोध करते रहे. कई कार्यकर्ता पुलिस वाहन के सामने लेट गए, जिसके कारण स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गई. इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्कामुक्की भी हुई. पुलिस ने मौके से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजभवन के बाहर की नारेबाजी.
जीतू पटवारी को भी हिरासत में लिया
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जीतू पटवारी को भी मौके से हटाने की कोशिश की. कांग्रेस नेताओं ने इसका विरोध किया, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई जारी रखी. बाद में पटवारी समेत अन्य कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर प्रदर्शन स्थल से हटाया गया. हालांकि कुछ समय बाद सभी को रिहा कर दिया गया.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई. उनका कहना था कि छात्रों से जुड़े विवादों और NEET परीक्षा से संबंधित मामलों को लेकर केंद्र सरकार को जवाब देना चाहिए. इसी मांग को लेकर कार्यकर्ताओं ने राजभवन के सामने जोरदार प्रदर्शन किया और लगातार नारेबाजी करते रहे.
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