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MP News: घोटाले की जांच या ‘सेटिंग’ का खेल? विवादित अफसरों को ही सौंप दी 4.37 करोड़ के घपले की पड़ताल

आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता की स्वीकृति के बाद सहायक संचालक अभिजित पांडे ने पांच सदस्यीय जांच दल का गठन किया है. लेकिन इस दल में शामिल अधिकारियों का पूर्व रिकॉर्ड ही जांच की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है.

MP News: घोटाले की जांच या ‘सेटिंग’ का खेल? विवादित अफसरों को ही सौंप दी 4.37 करोड़ के घपले की पड़ताल
स्कूलों का निरीक्षण करती टीम.

मध्य पद्रेश के मैहर जिले के रामनगर क्षेत्र में स्कूल रिपेयरिंग कार्यों के नाम पर हुए 4.37 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. जहां एक ओर कलेक्टर स्तर की रिपोर्ट सामने आने के बाद कार्रवाई की उम्मीद थी, वहीं दूसरी ओर लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा गठित जांच दल की निष्पक्षता पर ही सवाल उठने लगे हैं.

बताया जा रहा है कि आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता की स्वीकृति के बाद सहायक संचालक अभिजित पांडे ने पांच सदस्यीय जांच दल का गठन किया है. लेकिन इस दल में शामिल अधिकारियों का पूर्व रिकॉर्ड ही जांच की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है. टीम में शामिल संविदा उपयंत्री नरेश कुमार भतकरिया को पूर्व में भोपाल कलेक्टर द्वारा सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है, हालांकि बाद में अपील के बाद उन्हें बहाल कर दिया गया था. इसी तरह उपयंत्री सूर्यकांत मेहरा पर भी पहले से शिकायतें रही हैं. होशंगाबाद से राज्य शिक्षा केंद्र में पदस्थापना के बाद भी उन पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें सीमित कार्यों में बैठाया गया था. बाद में वे सांदीपनी प्रकोष्ठ में पहुंच गए. निर्माण कार्यों में स्वीकृति के बदले लेन-देन के आरोप भी उन पर लगते रहे हैं.

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जिनकी भूमिका पर सवाल, उनके मातहतों को जांच का जिम्मा

जांच दल में उप संचालक (वित्त) अमित श्रीवास्तव और सहायक संचालक (वित्त) प्रकाशचंद्र सूर्यवंशी भी शामिल हैं, जो ज्वाइंट डायरेक्टर राजेश मौर्य के अधीन कार्य करते हैं. खास बात यह है कि रामनगर घोटाले में आरोप खुद राजेश मौर्य पर ही लगे हैं. ऐसे में उनके अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा जांच किए जाने को लेकर निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

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9-9 स्कूलों की जांच कर रहीं दो टीमें 

जानकारी के अनुसार, मामले की जांच के लिए दो अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं, जो 9-9 स्कूलों में जांच कर रही हैं. आरोप है कि जांच टीम ठेकेदार विजय सिंह ठाकुर को साथ लेकर स्कूलों का निरीक्षण कर रही है और उसी से पूछताछ कर रही है कि कौन-कौन से कार्य कराए गए. ठेकेदार द्वारा ही पुराने और नए कार्यों को दिखाया जा रहा है, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. विजय सिंह ठाकुर महाकाल ट्रेडर्स, रुद्र ट्रेडर्स और वाणी कंस्ट्रक्शन जैसी फर्मों से जुड़ा बताया जा रहा है. आरोप है कि पूरे मामले में उसने पर्दे के पीछे रहकर काम किया और अब जांच को भी प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है.

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मीडिया से बनाई दूरी, नहीं की बात 

जांच के दौरान अधिकारियों ने मीडिया के सामने कोई बयान देने से भी परहेज किया. दूसरी ओर एसडीओपी ख्याति मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस की एक अलग टीम भी मामले की जांच कर रही है. ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इस घोटाले की निष्पक्ष जांच हो पाती है या नहीं.

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