छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच दशकों पुराने महानदी जल विवाद के स्थायी समाधान की दिशा में नई दिल्ली स्थित श्रमशक्ति भवन में एक महत्वपूर्ण पहल हुई. केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें महानदी जल विवाद के जल्द सुलझने के संकेत मिले हैं. अगले तीन महीने में इसे लेकर एक रिपोर्ट बनाई जाएगी.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक में स्पष्ट किया कि महानदी दोनों पड़ोसी राज्यों की साझा जीवनरेखा है. इसका जल किसानों की आजीविका, पेयजल आपूर्ति, औद्योगिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ा है. ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी दोनों राज्यों के हितों पर जोर देते हुए पानी बंटवारे का समाधान खोजने की बात कही.
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बैठक में क्या तय हुआ?
महानदी के बारे में सबकुछ जानिए...
- छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की सिहावा की पहाड़ियों से निकलने वाली इस नदी की लंबाई करीब 900 किलोमीटर है.
- यह छत्तीसगढ़ से पूर्व की दिशा में बहते हुए ओडिशा पहुंचती है. इसके बाद बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है.
- महानदी का मुख्य बेसिन छत्तीसगढ़ और ओडिशा में है, लेकिन इसकी सहायक नदियों- शिवनाथ, हंसदेव, ईब, जोंक, तेल का जाल मध्य प्रदेश, झारखंड और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ है.
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छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच क्या है पानी को लेकर विवाद
ओडिशा का छत्तीसगढ़ पर आरोप है कि उसने बिना सहमति के महानदी की ऊपरी धारा पर कई बैराज और एनिकेट्स बनाए हैं. जिससे पानी का बहाव रुक रहा है, इस कारण गर्मी की सीजन में ओडिशा में पानी का बहाव कम हो जाता है. इससे हीराकुंड बांध में जलस्तर कम होता है, इसका असर सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन और मत्स्य पालन पर पड़ता है. वहीं, छत्तीसगढ़ इस आरोप को सही नहीं मानता. उसका कहना है कि महानदी का करीब 53% कैचमेंट एरिया (मुख्य बेसिन उसके क्षेत्र में आता है. वह अपने वैधानिक हिस्से का ही पानी इस्तेमाल कर रहा है. छत्तीसगढ़ का कहना है कि ओडिशा अपने हिस्से के पानी का सही प्रबंधन नहीं कर पा रहा है.
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