छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस समय एक संवेदनशील जमीन विवाद ने भूचाल ला दिया है. विवाद के केंद्र में हैं सूबे के वन मंत्री और बीजेपी के प्रमुख आदिवासी नेता केदार कश्यप. उन पर आरोप है कि करोड़ों रुपये के कीमती कमर्शियल प्लॉट के लेन-देन के लिए सरकारी फाइलों में उनकी जाति को 'सामान्य' दर्ज किया गया है. इतना ही नहीं, उनकी पत्नी की कंपनी को एक संकरी सड़क पर मौजूद जमीन के बदले, प्रस्तावित 150 फीट चौड़ी मुख्य सड़क पर करीब 20 करोड़ रुपये का आलीशान अंतिम भूखंड (प्लॉट) अलॉट कर दिया गया है.
क्या है पूरा मामला और क्यों खड़ा हुआ 'सामान्य' जाति का बखेड़ा?
विवाद की शुरुआत कांग्रेस नेता और रायपुर के जाने-माने डॉक्टर राकेश गुप्ता के एक खुलासे से हुई. उन्होंने जमीन से जुड़े सरकारी दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया कि नारायणपुर जैसी अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीट से आने वाले आदिवासी नेता केदार कश्यप की पत्नी की कंपनी के रिकॉर्ड में जाति की जगह 'सामान्य' लिखा हुआ है. जबकि कानून के मुताबिक, आदिवासियों की जमीन के हस्तांतरण और लेन-देन को लेकर बेहद कड़े नियम हैं.

Kedar Kashyap Land Row: इसी संकरी जमीन के बदले मंत्री केदार कश्यप की पत्नी को कथित तौर पर प्राइम लोकेशन पर प्लाट दिए जाने का प्रस्ताव है.
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या करोड़ों रुपये की इस जमीन के सौदे को आसान बनाने के लिए और कानूनी अड़चनों से बचने के लिए रिकॉर्ड में जानबूझकर जाति छुपाकर 'सामान्य' दर्ज की गई ? हालांकि, इस पर बीजेपी ने सफाई दी है कि जमीन किसी व्यक्ति के नहीं बल्कि राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम पर है. चूंकि कंपनी की कोई जाति नहीं होती, इसलिए सरकारी रिकॉर्ड में उसे 'सामान्य' लिखा गया है.
संकरी गली की जमीन के बदले मिला प्राइम प्लॉट
आरोपों की फेहरिस्त सिर्फ जाति तक ही सीमित नहीं है. विवाद का दूसरा और सबसे बड़ा पहलू रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की नगर विकास योजना में हुए जमीन के लेन-देन के खेल से जुड़ा है.वन मंत्री केदार कश्यप की पत्नी शांति कश्यप 'राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी की डायरेक्टर हैं. कंपनी के पास रायपुर के कचना इलाके के एक कोने में, नालापारा के पास करीब 1.33 एकड़ जमीन थी, जो बेहद संकरी सड़क से जुड़ी थी.
यह प्लॉट प्रस्तावित 150 फीट चौड़ी मुख्य सड़क (MR-43 रोड) के ठीक किनारे पर है.
20 करोड़ रुपये की जमीन का खेल: कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल
कांग्रेस का सीधा आरोप है कि इतनी शानदार लोकेशन मिलने के बाद इस प्लॉट की बाजार में कीमत करीब 20 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी. कांग्रेस नेता डॉक्टर राकेश गुप्ता ने सवाल उठाया है कि आखिर एक संकरी गली में मौजूद मामूली जमीन के बदले, मंत्री जी की पत्नी की कंपनी को ही इतनी प्राइम लोकेशन पर मुख्य हाईवे के किनारे करोड़ों का प्लॉट क्यों दिया जा रहा है? क्या यह सीधे तौर पर वीआईपी ट्रीटमेंट और पद का दुरुपयोग नहीं है? कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मुख्य सचिव से इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.
आरडीए की सफाई: नियम के तहत हुआ सब, आपत्तियों का है इंतजार
इस बढ़ते विवाद पर रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) बैकफुट पर जरूर है, लेकिन वह किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार कर रहा है. आरडीए के उपाध्यक्ष जेपी शर्मा का कहना है कि यह प्लॉट अलॉटमेंट किसी राजनीतिक प्रभाव में नहीं किया गया है. योजना की नीति के अनुसार, जिन लोगों की ज्यादा जमीन ली गई है, उन्हें मुख्य सड़क से लगे प्लॉट दिए जा रहे हैं. ऐसे कुल 17 भू-स्वामी हैं जिन्हें मुख्य सड़क के किनारे प्लॉट मिले हैं, जिनमें कांग्रेस से जुड़े लोग भी शामिल हैं. हालांकि, प्राधिकरण ने यह भी साफ किया है कि यह योजना अभी अंतिम नहीं है, इस पर दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं और जांच के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा.
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