- IIT इंदौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ईईजी तकनीक से इंसानी दिमाग के सिग्नल्स का गहन अध्ययन किया जा रहा है.
- शोध का मुख्य फोकस युवाओं में ध्यान भटकने की समस्या और मानसिक दबाव के दौरान दिमाग की प्रतिक्रिया पर है.
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बड़ी मात्रा में दिमागी डेटा का विश्लेषण कर पैटर्न और बदलावों की पहचान करता है.
इंसानी दिमाग को दुनिया की सबसे जटिल संरचनाओं में गिना जाता है. हम क्या सोचते हैं, कैसे ध्यान लगाते हैं, कब तनाव महसूस करते हैं और किन परिस्थितियों में हमारा फोकस भटकता है, इन सभी प्रक्रियाओं के पीछे दिमाग में लगातार कई तरह के सिग्नल बनते और बदलते रहते हैं. इन्हीं संकेतों को समझने के लिए आईआईटी इंदौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से महत्वपूर्ण शोध किया जा रहा है. वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि अलग-अलग परिस्थितियों में दिमाग कैसे प्रतिक्रिया देता है और उसके सिग्नल्स में क्या बदलाव आते हैं.
AI और EEG की मदद से दिमाग का अध्ययन
आईआईटी इंदौर के मेहता फैमिली स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज एंड बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की एआई-ईईजी लैब में दिमाग के सिग्नल्स पर गहन अध्ययन किया जा रहा है. इसके लिए ईईजी (इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राफी) तकनीक का उपयोग किया जाता है, जो दिमाग की इलेक्ट्रिकल गतिविधियों को रिकॉर्ड करती है. शोधकर्ताओं का प्रयास है कि इन संकेतों को बेहतर तरीके से समझकर दिमाग से जुड़े बदलावों का विश्लेषण किया जा सके.
युवाओं के डिस्ट्रैक्टेड ब्रेन पर विशेष फोकस
शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा युवाओं में बढ़ रही ध्यान भटकने की समस्या से जुड़ा है. पढ़ाई, काम या डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के दौरान दिमाग किस तरह प्रतिक्रिया देता है, इसका अध्ययन किया जा रहा है. इसके अलावा मानसिक दबाव और मेडिटेशन के समय दिमाग में होने वाले बदलावों को भी रिकॉर्ड किया जा रहा है ताकि अलग-अलग मानसिक अवस्थाओं को बेहतर तरीके से समझा जा सके.
बड़े डेटा में पैटर्न खोज रहा AI
ईईजी के जरिए बड़ी मात्रा में डेटा तैयार होता है. इस डेटा का विश्लेषण करना सामान्य तरीकों से काफी समय लेने वाला काम होता है. ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. AI हजारों सिग्नल्स का तेजी से विश्लेषण कर उनमें मौजूद समानताओं, बदलावों और पैटर्न की पहचान करने में मदद कर रहा है. इससे शोधकर्ताओं को दिमाग की कार्यप्रणाली को अधिक सटीक तरीके से समझने का अवसर मिल रहा है.
कई क्षेत्रों में चल रहा शोध
संस्थान में केवल दिमागी सिग्नल्स का अध्ययन ही नहीं, बल्कि न्यूरल सिग्नल प्रोसेसिंग, ब्रेन कनेक्टिविटी और न्यूरल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में भी काम किया जा रहा है. इसके साथ ही बायोमेडिकल रिसर्च में AI के उपयोग को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हो सकें.
अल्जाइमर जैसी बीमारियों पर भी नजर
आईआईटी इंदौर के कुछ शोध प्रोजेक्ट अल्जाइमर और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जुड़े हुए हैं. वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसी बीमारियों के शुरुआती संकेत दिमागी गतिविधियों में किस रूप में दिखाई देते हैं. यदि इन संकेतों की समय रहते पहचान की जा सके, तो भविष्य में मरीजों की स्थिति का आकलन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है.
शोधकर्ता स्पष्ट करते हैं कि वर्तमान में AI का उपयोग किसी बीमारी का सीधे इलाज करने के लिए नहीं किया जा रहा है. फिलहाल इसका उद्देश्य दिमाग से निकलने वाले संकेतों और उनमें होने वाले परिवर्तनों को समझना है. हालांकि आने वाले समय में यही अध्ययन ब्रेन हेल्थ की स्क्रीनिंग को अधिक प्रभावी बनाने और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की शुरुआती पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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