बच्चों के लिए खेलना और फिजिकल एक्टिविटी करना बेहद जरूरी है. इससे न केवल उनकी बॉडी मजबूत होती है, बल्कि खेलने से बच्चे का दिमाग भी एक्टिव रहता है. खेलते समय बच्चा फोकस करना, जल्दी फैसले लेना, दूसरों के साथ मिलकर काम करना और हार के बाद फिर से कोशिश करना सीखता है. इसी कड़ी में चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट श्वेता गांधी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने बच्चों के लिए 5 ऐसे स्पोर्ट्स बताए हैं, जो उनके शरीर और दिमाग के दोनों के विकास में तेजी से मदद कर सकते हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में-
बच्चों के लिए 5 बेस्ट स्पोर्ट्स
नंबर 1- टेनिस या बैडमिंटन (Badminton)लिस्ट में सबसे पहला नाम आता है टेनिस या बैडमिंटन का. चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट कहती हैं, टेनिस और बैडमिंटन में बच्चे को बॉल या शटल पर लगातार ध्यान देना पड़ता है. इससे उन्हें हाथ और आंख के बीच सही तालमेल बनाने में मदद मिलती है. साथ ही बच्चे का फोकस बढ़ता है, जल्दी फैसला लेने की क्षमता बेहतर होती है, बच्चा जल्दी रिफ्लेक्स करता है. ऐसे में आप अपने बच्चे को रोज ये स्पोर्ट खिला सकते हैं.
नंबर 2- मार्शल आर्ट्स (Martial Arts)साइकोलॉजिस्ट बताती हैं, कराटे, जूडो और ताइक्वांडो जैसे मार्शल आर्ट्स सिर्फ सेल्फ डिफेंस सीखने के लिए नहीं होते हैं. इनसे बच्चे को बैलेंस और शरीर का सही तालमेल बनाने में भी मदद मिल सकती है. इसके साथ ही बच्चों में कॉन्फिडेंस बढ़ता है, वे खुद पर कंट्रोल करना सीखते हैं.
नंबर 3- फुटबॉल (Football)फुटबॉल बच्चों को एक्टिव रखने वाला स्पोर्ट है. इसमें बच्चे को लगातार दौड़ना, बॉल पर नजर रखना और सही समय पर फैसला लेना होता है. इससे बच्चे का स्टैमिना और फुर्ती तो बढ़ती ही है, साथ ही वह टीम के साथ खेलना, दूसरे खिलाड़ियों को समझना और मिलकर लक्ष्य हासिल करना सीखता है. खेल के दौरान जल्दी फैसला लेने की आदत भी बनती है, जिससे भी बच्चे का ब्रेन डेवलेपमेंट होता है.
नंबर 4- स्विमिंग (Swimming)स्विमिंग बच्चों के लिए एक अच्छी फुल-बॉडी एक्सरसाइज है. इसमें शरीर के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं. तैरने से कार्डियो फिटनेस और स्टैमिना बढ़ाने में मदद मिल सकती है. साथ ही पानी में तैरते समय बच्चे को अपने हाथ-पैर और शरीर को एक साथ सही तरीके से चलाना होता है. इससे शरीर और दिमाग के बीच तालमेल बनाने में मदद मिलती है.
नंबर 5- कैलिस्थेनिक्स (Calisthenics)कैलिस्थेनिक्स में बच्चा अपना खुद का बॉडी वेट उठाता है. आसान भाषा में कहें, तो बच्चा अपने शरीर के वजन से ही एक्सरसाइज करता है. इसमें हैंगिंग, क्रॉलिंग, बैलेंस बनाना, स्क्वॉटिंग और आसान पुश-अप्स जैसी एक्टिविटी शामिल होती हैं.
साइकोलॉजिस्ट बताती हैं, इन एक्टिविटी से बच्चों के हाथ-पैर और शरीर की ताकत बढ़ाने में मदद मिलती है. साथ ही उनका बैलेंस, शरीर पर कंट्रोल और चलने-फिरने की क्षमता भी बेहतर हो सकती है.
रिसर्च में भी बताया गया फायदेमंदश्वेता गांधी कहती हैं, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में एक रिसर्च की गई, इसमें 5 से 12 साल की उम्र के 25,334 बच्चों को शामिल किया गया. रिसर्च में पाया गया कि शारीरिक गतिविधियों से बच्चों के ध्यान लगाकर काम करने, क्रिएटिविटी, फ्लूइड इंटेलिजेंस यानी नई समस्या को समझकर हल करने की क्षमता और वर्किंग मेमोरी को बढ़ाने में मदद मिल सकती है. इसलिए बच्चों के रोजाना के रूटीन में पढ़ाई के साथ-साथ खेल को जगह देना भी उतना ही जरूरी है. ऐसे में आप अपने बच्चे की पसंद के अनुसार इनमें से किसी भी एक या दो स्पोर्ट को चुन सकते हैं.
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