Bhojshala Case: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भोजशाला में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया. वर्षों से नियमित पूजा-अर्चना की प्रतीक्षा कर रहे हिंदू समाज के लोग शनिवार सुबह से उत्साहित दिखाई दे रहे हैं. फैसले आने के बाद पहले सूर्योदय से ही लोग पूजा-अर्चना करने पहुंच गए.
भोजशाला आने वाले लोगों के चेहरों पर खुशी और संतोष साफ नजर आया. वर्षों से भोजशाला मुक्ति आंदोलन से जुड़ी महिला सरला ने भावुक होते हुए कहा कि इस दिन का इंतजार उन्हें बरसों से था. उन्होंने बताया कि जैसे ही हाईकोर्ट का आदेश आया, हिंदू समाज में खुशी की लहर दौड़ गई. किसी की आंखों में खुशी के आंसू थे तो कोई उत्साह में झूम उठा. उनके अनुसार, यह दिन हिंदू समाज के लंबे संघर्ष का परिणाम है और अब श्रद्धालु प्रतिदिन यहां पूजा करने आएंगे.
#WATCH | Dhar, MP | A devotee says, "We are delighted that we were able to have darshan and there was no fee unlike previous times. Now the entire Hindu society can conduct pooja everyday... We are elated after yesterday's verdict and all of us were crying and dancing with… https://t.co/NWQ3w9n66r pic.twitter.com/F2d0AYRexb
— ANI (@ANI) May 16, 2026
भोजशाला पहुंचे श्रद्धालु प्रमोद सोलंकी ने कहा कि वर्षों बाद उन्हें यहां अगरबत्ती लगाने और शांतिपूर्वक पूजा करने का अवसर मिला है. उन्होंने बताया कि वे पहले भी प्रत्येक मंगलवार को नियमित रूप से पूजा के लिए आते रहे हैं, लेकिन अब न्यायालय के आदेश के बाद प्रतिदिन पूजा-अर्चना करने की भावना लेकर यहां पहुंचे हैं.
#WATCH | Dhar, MP | A devotee says, "After years, we got the chance to have darshan without any obstacle. The court gave a great verdict. I will come here every day to offer prayers." https://t.co/NWQ3w9n66r pic.twitter.com/hg9MAOwRcq
— ANI (@ANI) May 16, 2026
वहीं, राजेश शुक्ला ने न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि वर्षों के संघर्ष में धार की जनता ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया है. उन्होंने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की. राजेश शुक्ला ने कहा कि फिलहाल प्रतीकात्मक रूप से मां वाग्देवी की पूजा की जा रही है.
हाईकोर्ट ने भोजशाला को बताया मंदिर
हाईकोर्ट ने 15 मई, 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए भोजशाला को मंदिर करार दिया था. अदालत का कहना है कि भोजशाला परिसर-कमाल मस्जिद का विवादित क्षेत्र एक मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र है. केंद्र सरकार देवी सरस्वती की मूर्ति ला सकती है. हालांकि यहां ASI का पूरा नियंत्रण रहेगा.
भोजशाला मामले में विष्णुजैन ने कोर्ट के फैसले पर बताया कि भोजशाला की पूरी इमारत को राजा भोज के द्वारा बनवाया गया है. कोर्ट ने पूजा-पाठ का अधिकार दिया है. अब इस परिसर में सिर्फ पूजा होगी, नमाज की अनुमति नहीं है. कोर्ट ने कहा- ये कमाल औला मस्जिद नहीं है. मुस्लिम समाज सरकार के पास अपनी मांग रख सकते हैं. सरकार मुस्लिम समाज को वैकल्पिक जमीन दे. ये धार में भी हो सकती है.
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