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'नाबालिग बेटी पहले, बालिग बेटा बाद में' टीचर पिता को MP हाई कोर्ट से फटकार, कहा- 'बेटी पर कंजूसी गलत'

11 अगस्त 2025 को कुटुंब न्यायालय नीमच ने सुनवाई के दौरान पत्नी को हर माह 5 हजार रुपये और बेटी को भरण-पोषण के लिए 2000 रुपये देने का आदेश दिया था. इसके खिलाफ मां-बेटी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

'नाबालिग बेटी पहले, बालिग बेटा बाद में' टीचर पिता को MP हाई कोर्ट से फटकार, कहा- 'बेटी पर कंजूसी गलत'
बेटा-बेटी में फर्क करने वाले पिता को हाईकोर्ट से फटकार

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बेटा और बेटी की शिक्षा के बीच भेदभाव करने वाले सरकारी शिक्षक पिता को जमकर फटकार लगाई है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि नाबालिग बेटी पहले और बालिग बेटा बाद में... हाईकोर्ट ने मां-बेटी द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि कोई भी पिता अपने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर लैंगिक आधार पर दोहरा मापदंड नहीं अपना सकता. यदि पिता अपने बालिग बेटे की महंगी टेक्निकल एजुकेशन पर हर साल लाखों रुपये खर्च कर सकता है, तो वह नाबालिग बेटी के भरण-पोषण और पढ़ाई की अनदेखी नहीं कर सकता.

कोर्ट ने कहा- 'बालिग बेटा से पहले नाबालिग बेटी हकदार'

हाई कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा कि कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टि से नाबालिग बेटी, बालिग बेटे की तुलना में प्राथमिकता के आधार पर वित्तीय सहायता की पहली हकदार है. कोर्ट ने साफ किया कि भरण-पोषण का मतलब सिर्फ रोटी-कपड़ा नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीने का अधिकार है.

बेटी को 10,000 रुपये प्रतिमाह देने का आदेश

कुटुंब न्यायालय नीमच ने नाबालिग बेटी के लिए महज 2,000 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण तय किए थे. इसके खिलाफ मां-बेटी ने हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की. हाईकोर्ट ने उस राशि को न केवल अपर्याप्त माना, बल्कि इसमें पांच गुना बढ़ोतरी करते हुए इसे सीधे 10,000 रुपये प्रतिमाह करने का आदेश दिया. पत्नी का गुजारा भत्ता भी 5 हजार से बढ़ाकर 7500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है. बढ़ा हुआ भरण-पोषण आवेदन तिथि 22 फरवरी 2024 से ही प्रभावी होगा.

मां-बेटी ने खटखटाया था HC का दरवाजा

बता दें कि विगत 11 अगस्त 2025 को कुटुंब न्यायालय नीमच ने टीचर पति को हर माह 5 हजार रुपये पत्नी और 2 हजार रुपये बेटी को देने का आदेश दिया. इसके खिलाफ पत्नी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. याचिका में बताया कि बेटे की शिक्षा (बी.टेक.) के लिए उनके पति सालाना 5.45 लाख रुपये खर्च कर रहे हैं. हर माह 5-6 हजार पॉकेट मनी देते हैं... उनका वेतन प्रतिमाह 72,915 रुपये हैं. बेटी की पढ़ाई के लिए बेहद कम राशि देते हैं. नीमच कोर्ट द्वारा तय राशि से बच्ची की पढ़ाई सम्भव नहीं है.

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Dev Shrimali
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