Madhya Pradesh High Court: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को कड़ी टिप्पणी के साथ रद्द कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज किया, गवाहों के बयानों का सही मूल्यांकन नहीं किया और भोपाल स्थित ससुराल में 33 साल की ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma Case) की संदिग्ध मौत से जुड़े गंभीर आरोपों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया.
जस्टिस देवनारायण मिश्रा की 17 पन्नों की सख्त टिप्पणी वाले इस आदेश ने न सिर्फ भोपाल सेशन कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया, बल्कि अब मामले में कस्टोडियल इंटरोगेशन यानी हिरासत में पूछताछ का रास्ता भी साफ कर दिया है. हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने जांच एजेंसी द्वारा जुटाए अहम सबूतों को नजरअंदाज किया, जिनमें वॉट्सऐप चैट, गवाहों के बयान, दहेज प्रताड़ना के आरोप और ट्विशा की मौत की संदिग्ध परिस्थितियां शामिल थी. हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत बचाव पक्ष के दस्तावेजों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया.
हाईकोर्ट ने इस आरोप को भी गंभीरता से लिया कि साइबर क्राइम, साइबर फॉरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकीं रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह (Giribala Singh) ने संभवतः अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल सबूतों से छेड़छाड़ और जांच को प्रभावित करने में किया हो.
वॉट्सऐप चैट और गवाहों के बयानों ने हाईकोर्ट को झकझोरा
हाईकोर्ट की टिप्पणियां इस पूरे मामले की बेहद परेशान करने वाली तस्वीर पेश करती हैं. ट्विशा शर्मा की शादी (Twisha Sharma Marriage) 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी, जो गिरिबाला सिंह का बेटा है. शादी के महज पांच महीने बाद 12 मई को ट्विशा का भोपाल स्थित ससुराल में कथित तौर पर फांसी पर लटका शव मिला, लेकिन जिस बात ने हाईकोर्ट को सबसे झकझोरकर रख दिया, वह थे वॉट्सऐप चैट और गवाहों के बयानों से सामने आए आरोप.
गर्भवती के बाद बच्चे के पिता को लेकर था शक
कोर्ट के सामने यह आरोप आया कि ट्विशा को उसकी प्रेग्नेंसी को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था, उसके पति और ससुराल पक्ष बच्चे के पिता को लेकर शक कर रहे थे और उस पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया जा रहा था.
हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि ट्विशा ने अपने परिवार को बताया था कि वह “बहुत बुरी तरह फंस चुकी है”, उसे न खुलकर जीने दिया जा रहा था और न ही रोने दिया जा रहा था, और वह चाहती थी कि उसे ससुराल से वापस ले जाया जाए.
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शरीर पर चोटों को लेकर कोर्ट की विस्फोटक टिप्पणी
आदेश की सबसे विस्फोटक टिप्पणियों में से एक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट (Twisha Sharma Postmortem Report) को लेकर थी. हाईकोर्ट ने कहा कि ट्विशा की मौत सिर्फ फांसी से नहीं हुई दिखाई देती, बल्कि उसके शरीर पर छह एंटेमॉर्टम चोटें (मौत से पहले की) भी मिलीं, जो हाथ, उंगली और सिर पर थीं. कोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि ये चोटें शव को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लग सकती थीं.
कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के पहले दिन से ही ट्विशा के माता-पिता और रिश्तेदारों ने समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह दोनों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे.
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