- ग्वालियर नगर निगम ने आक्रामक कुत्तों की नस्लों के पालतू रखने पर कड़ाई से नियम लागू करने का निर्णय लिया है.
- नगर निगम के निर्देशों के अनुसार बिना रजिस्ट्रेशन और नियम पालन के आक्रामक कुत्ते पालना दंडनीय होगा.
- शहर में पाकिस्तानी बुली, पिटबुल, रॉटविलर और जर्मन शेफर्ड नस्ल के कुत्तों का विशेष सर्वेक्षण कराई जाएगी.
पालतू जानवरों का शौक आज कई घरों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, लेकिन जब यही शौक लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बनने लगे तो प्रशासन को सख्ती करनी पड़ती है. एमपी के ग्वालियर में लगातार सामने आ रही कुत्तों के हमलों की घटनाओं के बाद नगर निगम अब एक्शन मोड में आ गया है. खास तौर पर पाकिस्तानी नस्ल के पाकिस्तानी बुली, अमेरिकी पिटबुल, रॉटविलर और जर्मन शेफर्ड जैसी आक्रामक मानी जाने वाली नस्लों को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं. नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि बिना रजिस्ट्रेशन और निर्धारित नियमों का पालन किए ऐसे कुत्तों को पालना महंगा पड़ सकता है.
खूंखार नस्ल के कुत्तों पर नगर निगम की नजर
ग्वालियर में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पालतू कुत्तों का इस्तेमाल लोगों को डराने-धमकाने या विवाद के दौरान हमला कराने के लिए किया गया. शिकायतों के आधार पर नगर निगम ने शहर में विशेष सर्वे कराने का फैसला लिया है. इसके तहत ऐसे घरों की पहचान की जाएगी, जहां पाकिस्तानी बुली, पिटबुल, रॉटविलर और जर्मन शेफर्ड जैसी नस्लों के कुत्ते पाले जा रहे हैं.
बिना रजिस्ट्रेशन पाए गए तो होगी सख्त कार्रवाई
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति निर्धारित नियमों का पालन किए बिना ऐसे कुत्ते पालता पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इतना ही नहीं, नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित कुत्तों को जब्त कर शेल्टर होम भी भेजा जा सकता है. इसके लिए निगम की टीमें घर-घर जाकर सत्यापन करेंगी.
कुत्तों के हमलों की घटनाएं बनीं चिंता का कारण
ग्वालियर में पिछले कुछ समय के दौरान कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं. जून 2024 में एक इनामी बदमाश द्वारा पुलिस टीम के पीछे रॉटविलर कुत्ता छोड़ने का मामला चर्चा में रहा था. वहीं जनवरी 2024 में एक रॉटविलर ने अपने ही मालिक पर हमला कर दिया था, जिससे उसे गंभीर चोटें आई थीं. इन घटनाओं ने आक्रामक नस्ल के कुत्तों को लेकर बहस तेज कर दी थी.
मीटर रीडर पर तीन कुत्तों से हमला कराने का आरोप
हाल का सबसे चर्चित मामला हजीरा थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर का है. आरोप है कि बिजली विभाग का आउटसोर्स कर्मचारी रविंद्र सिंह राजावत मीटर रीडिंग लेने पहुंचा था. इसी दौरान घर के मालिक वीरू तोमर ने कथित तौर पर अपने पालतू पिटबुल, रॉटविलर और जर्मन शेफर्ड को उस पर छोड़ दिया. हमले में कर्मचारी घायल हो गया और उसके शरीर पर कई जगह काटने के निशान आए. बाद में उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया.
क्या हैं ऐसे कुत्तों को पालने के नियम?
नगर निगम के अनुसार आक्रामक नस्ल के कुत्ते पालने के लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी है. इनके लिए संबंधित निकाय से अनुमति और रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य माना है. कुत्ते को सार्वजनिक स्थान पर ले जाते समय मजबूत पट्टा और मुंह पर सुरक्षा जाली लगाना जरूरी है. साथ ही टीकाकरण का पूरा रिकॉर्ड रखना और उचित प्रशिक्षण दिलाना भी आवश्यक है.
सोसायटी और सार्वजनिक जगहों को लेकर भी नियम
नियमों के तहत ऐसे कुत्तों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है. कई आवासीय परिसरों और सोसायटियों में इनके प्रवेश को लेकर अलग-अलग प्रावधान लागू हैं. प्रशासन का कहना है कि मालिक की लापरवाही किसी अन्य व्यक्ति की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं बननी चाहिए.
नगर निगम के अधिकारी डॉ. गौरव परिहार का कहना है कि शहर में आक्रामक नस्ल के कुत्तों द्वारा लोगों पर हमले की शिकायतें लगातार मिल रही हैं. इसी वजह से ऐसे कुत्तों का सर्वे कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने ऐसे पालतू कुत्ते रखे हैं, वे समय रहते उनका रजिस्ट्रेशन और अन्य औपचारिकताएं पूरी कर लें. नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.
सुरक्षा और जिम्मेदारी दोनों जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पालतू जानवर के साथ जिम्मेदार व्यवहार जरूरी है. उचित प्रशिक्षण, निगरानी और नियमों का पालन न केवल दूसरों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि पालतू जानवर के बेहतर रखरखाव के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है. ग्वालियर नगर निगम की यह पहल इसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है.
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