कूनो नेशनल पार्क एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पहुंचकर चीता प्रोजेक्ट की व्यवस्थाओं का जायजा लिया. श्योपुर के कूनो में दो दिवसीय प्रवास पर आईं राष्ट्रपति ने न सिर्फ कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण किया, बल्कि चीतों की सुरक्षा, निगरानी और अब तक की प्रगति से भी रूबरू हुईं.
कूनो पहुंचीं राष्ट्रपति का भव्य स्वागत
रविवार दोपहर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क पहुंचीं. यहां उनके स्वागत के लिए जिले के प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला और बीजेपी सांसद शिवमंगल सिंह तोमर मौजूद रहे. कूनो पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ने अधिकारियों से मुलाकात कर कार्यक्रम की शुरुआत की. वह अपने दौरे के दौरान यहीं रात्रि विश्राम भी करेंगी.
कमांड कंट्रोल सेंटर का किया निरीक्षण
कूनो में पहले दिन राष्ट्रपति ने चीता कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का दौरा किया. यहां अधिकारियों ने उन्हें चीतों की सुरक्षा और उनकी गतिविधियों की निगरानी से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी. सेंटर में लगे आधुनिक सिस्टम के जरिए चीतों की हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है.
प्रदर्शिनी में दिखाई गई प्रोजेक्ट की पूरी तस्वीर
कंट्रोल सेंटर परिसर में लगी विशेष प्रदर्शनी के जरिए राष्ट्रपति को चीता प्रोजेक्ट की अब तक की प्रगति के बारे में विस्तार से बताया गया. अफसरों ने बताया कि वर्तमान में भारत में कुल 52 चीते हैं, जिनमें से 49 कूनो नेशनल पार्क में मौजूद हैं, जबकि 3 चीतों को गांधी सागर अभयारण्य भेजा गया है.
बोत्सवाना से लाए चीतों की जानकारी
अधिकारियों ने राष्ट्रपति को उस प्रक्रिया के बारे में भी बताया, जिसके तहत बोत्सवाना से चीते भारत लाए गए थे. वहीं इन चीतों की गतिविधियों, उनकी देखरेख और उनके अनुकूलन से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई. यह प्रोजेक्ट भारत में चीतों को फिर से बसाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
सुरक्षा और ट्रैकिंग सिस्टम पर दी गई जानकारी
राष्ट्रपति को खुले जंगल में रहने वाले चीतों की सुरक्षा के लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं की भी जानकारी दी गई. अधिकारियों ने बताया कि चीतों की लोकेशन, उनकी गतिविधि और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है.
आज करेंगी जंगल सफारी
अपने दौरे के दूसरे दिन यानी सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कूनो नेशनल पार्क में जंगल सफारी करेंगी. इस दौरान वह खुले क्षेत्र में विचरण कर रहे चीतों को करीब से देखेंगी. भारत की धरती पर दोबारा बसाए गए चीतों को उनके प्राकृतिक माहौल में देखने का यह खास मौका होगा.
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