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ट्रंप के नाम पर सड़क, क्या पहले भी किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर है भारत की कोई सड़क? पढ़िए विदेशी नामों पर भारतीय सड़कों की दिलचस्प कहानी

हैदराबाद में एक सड़क का नाम 'डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू' रखा गया. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वो ऐसा सम्मान पाने वाले पहले राष्ट्रपति हैं. क्या वाकई ट्रंप पहले ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जिनके नाम पर भारत में सड़क रखी गई है? चलिए करते हैं पड़ताल.

ट्रंप के नाम पर सड़क, क्या पहले भी किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर है भारत की कोई सड़क? पढ़िए विदेशी नामों पर भारतीय सड़कों की दिलचस्प कहानी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
AFP/NDTV
  • अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर तेलंगाना ने एक सड़क का नाम डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू रखा है.
  • ट्रंप ने भारत को धन्यवाद देते हुए ट्रूथ पर लिखा- इस तरह सम्मान पाने वाला मैं पहला अमेरिकी राष्ट्रपति हूं.
  • लेकिन इतिहास में झांकें तो पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर भारत में सड़क के नाम रखे गए हैं.

जब हैदराबाद में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास वाली सड़क को डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू का नाम दिया गया तब राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भारत का शुक्रिया अदा करते हुए लिखा कि इस तरह सम्मान पाने वाले वह पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं. ट्रंप के इस बयान के बाद एक सवाल तेजी से चर्चा में आ गया. क्या भारत में इससे पहले भी किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर कोई सड़क रही है? या फिर ट्रंप सचमुच पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं, जिनके नाम पर भारत में कोई सार्वजनिक सड़क बनी है.

ट्रंप पहले अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं

तेलंगाना सरकार ने अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से लगी सड़क का नाम डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू रखा. 

इसके बाद ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, "हैदराबाद में नई डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू. इस तरह सम्मान पाने वाला मैं पहला अमेरिकी राष्ट्रपति हूं. धन्यवाद भारत."

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लेकिन इतिहास में झांकें तो जॉन एफ कैनेडी के नाम पर पुणे में एक रोड का नाम कैनेडी रोड है, इसका उल्लेख महाराष्ट्र की सरकारी वेबसाइट पर मिलता है. हालांकि इसका नाम कैसे पड़ा इसे लेकर कोई सार्वजनिक सरकारी दस्तावेज मौजूद नहीं है. इसी तरह तलिमनाडु के मछलीपट्टनम में भी जेएफ कैनेडी रोड है. यह सड़क 17वीं शताब्दी में डच इस्ट इंडिया कंपनी के शासन काल में बनाए गए बंदर किला की ओर जाती है और अंग्रेजी अखबार द हिंदू की एक लेख में इसका जिक्र भी किया गया है. 

अमेरिका के अन्य प्रसिद्ध राष्ट्रपतियों अब्राहम लिंकन, जॉर्ज वॉशिंगटन, फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट, रोनाल्ड रीगन, जॉर्ज बुश, बराक ओबामा या जो बाइडेन के नाम पर भारत में किसी प्रमुख सरकारी सड़क का प्रमाणित रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.

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विदेशी नेताओं के नाम पर भारत में सड़कें

आजादी के बाद भारत ने जिन देशों के साथ मजबूत रिश्ते बनाए, उनके कई नेताओं के नाम भारतीय शहरों की सड़कों पर दर्ज हो गए. यह सम्मान स्वरूप होने के साथ ही भारत की विदेश नीति का भी हिस्सा था.

सबसे ज्यादा उदाहरण नई दिल्ली में मिलते हैं.

राजधानी के राजनयिक इलाके चाणक्यपुरी में घूमिए तो आपको ऐसा लगेगा जैसे पूरी दुनिया भारत के नक्शे पर उतर आई हो.

यहां नेल्सन मंडेला मार्ग, साइमन बोलिवर मार्ग, क्वामे नक्रूमा मार्ग, आंद्रे मालरो मार्ग, जोसे पी रिजाल मार्ग, जनरल जोसे आर्टिगास मार्ग, ओलोफ पाल्मे मार्ग, आर्कबिशप मकारियोस मार्ग, सर एडमंड हिलेरी मार्ग और तेनजिंग नोर्गे मार्ग जैसी सड़कें मौजूद हैं.

इन नामों के पीछे सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक सोच छिपी हुई है.

दिल्ली की सड़कों का भारत की विदेश नीति कनेक्शन

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जब चाणक्यपुरी को भारत का राजनयिक इलाका बनाने की योजना तैयार की, तब यहां की सड़कों के नामाकरण से भी संदेश दिया गया.

बाद में कई सड़कों का नाम उन नेताओं पर रखा गया जिन्होंने उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष किया, गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व किया या भारत के करीबी मित्र रहे.

भारत में विदेशी नेताओं के सम्मान का सबसे दिलचस्प उदाहरण कोलकाता है.

अमेरिकी वाणिज्य दूतावास का पता है - हो ची मिन्ह सरणी.

यानी अमेरिका का दूतावास उस सड़क पर है जिसका नाम वियतनाम के महान क्रांतिकारी नेता हो ची मिन्ह के नाम पर रखा गया है.

साल 1968 में पश्चिम बंगाल सरकार ने इस सड़क का नाम बदला था. बाद में यह भारत-वियतनाम दोस्ती का भी प्रतीक बन गई.

यह शायद दुनिया के सबसे दिलचस्प कूटनीतिक संयोगों में से एक है.

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पुडुचेरी में आज भी जिंदा है फ्रांस

विदेशी नामों वाली सड़कों का इतिहास पुडुचेरी में सबसे बेहतरीन तरीके से झलकता है.

यहां आज भी र्यू ड्यूमा, र्यू सफ्रें, र्यू रोमां रोलां और कई दूसरी सड़कें फ्रांसीसी दौर की याद दिलाती हैं.

इन सड़कों के नाम इसलिए नहीं बदले गए क्योंकि वे शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं.

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Photo Credit: truthsocial.com/@realDonaldTrump

हैदराबाद का ट्रंप एवेन्यू क्यों अलग है?

दिल्ली की अधिकांश ऐसी सड़कें आधुनिक इतिहास से जुड़े प्रसिद्ध नामों से जुड़ी हैं. कोलकाता की सड़क भारत-वियतनाम दोस्ती की मिसाल है. पुडुचेरी की सड़कें विरासत से जुड़ी है.

पर डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू वर्तमान राजनीति, व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की तस्वीर दिखलाता है.

यह सड़क हैदराबाद के उस इलाके में है जहां माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजन जैसी दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के दफ्तर मौजूद हैं. लिहाजा यह सड़क भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों का प्रतीक भी बन गई है.

जब सड़कों के नाम बदल कर उसे किसी विदेशी नेता के नाम पर रखा जाता है तो ये सिम्बॉलिक डिप्लोमेसी कहलाता है. यह केवल सम्मान नहीं बल्कि उस देश के साथ मजबूत रिश्ते और उस देश के महत्व को दर्शाता है. भारत आजादी के बाद से ऐसा करता आया है. इसे देशों के बीच दोस्ती, सम्मान, नीति और भविष्य की ओर इशारा भी माना जाता है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर हरियाणवी गांव

हालांकि इक्का-दुक्का सड़कों को छोड़ कर  कोई सड़क बेशक अन्य किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर नहीं है, पर हरियाणा के गुरुग्राम जिले के दोलतापुर नसिराबाद गांव में जब जिमी कार्टर बतौर अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी पत्नी के साथ जब  3 जनवरी 1978 को आए थे, तो तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की सलाह पर गांव का नाम बदल कर कार्टरपुरी कर दिया गया था.

दरअसल, 1960 के दशक में जिमी कार्टर की मां लिलियन भारत में एक नर्सिंग अधिकारी के तौर पर काम कर चुकी थीं. उस दौरान उनका इस गांव के जैलदार परिवार की हवेली में आना-जाना था और गांव से उनका गहरा लगाव था. 1978 में स्वास्थ्य कारणों से उनकी मां तो नहीं आ सकीं, पर उन्होंने अपने राष्ट्रपति बेटे को इस गांव में जाने के लिए प्रेरित किया था.

इसी तरह 2017 में हरियाणा के ही मेवात के मरोड़ा गांव का नाम ट्रंप सुलभ गांव रखा गया था. सुलभ इंटरनेशनल ने स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने और कॉरपोरेट फंडिंग को आकर्षित करने के लिए यह कदम उठाया था.

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अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर इमारतें

राजधानी दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के परिसर में अमेरिकी राजदूत के आधिकारिक निवास को रूजवेल्ट हाउस के नाम से जाना जाता है. यह नाम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट के सम्मान में रखा गया है.

इसी तरह साउथ मुंबई में ब्रीच कैंडी इलाके में मौजूद लिंकन हाउस एक आलीशान और हेरिटेज बंगला है. 1933 में इसका निर्माण हुआ, तब यह वांकानेर के महाराज का निवास स्थान था. बाद में इसे अमेरिकी सरकार ने लीज पर ले लिया और कई दशकों तक यूएस कांसुलेट यहीं से चला करता था. तब इसका नाम लिंकन हाउस रखा गया था. हालांकि 2015 में इसे उद्योगपति साइरस पूनावाला ने खरीद लिया है.

Abraham Lincoln

प्रतीकात्मक तस्वीरः अब्राहम लिंकन की मूर्ति
Photo Credit: AFP

अब्राहम लिंकन पर जारी किया था डाक टिकट

भारतीय डाक विभाग ने अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की याद में 15 अप्रैल 1965 को एक विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया था. जो उनकी 100वीं पुण्यतिथि पर जारी किया गया था. उस समय इस डाक टिकट की कीमत 15 पैसे थी और इसे गहरे भूरे और बफ रंग में छापा गया था. इस पर अब्राहम लिंकन का चेहरा बना हुआ था.

जब बिल क्लिंटन साल 2000 में भारत आए तो वो दिल्ली के आईटीसी मौर्या शेरेटन में ठहरे थे. वहां के बुखारा रेस्टोरेंट में जिस टेबल पर उन्होंने खाना खाया उसे अनौपचारिक तौर पर आज भी क्लिंटन टेबल कहा जाता है.

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