Jagdishpur Cabinet Meeting: मध्य प्रदेश की राजनीति, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत एक बार फिर साथ दिखाई देने वाली है. 19 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में प्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक भोपाल के समीप स्थित ऐतिहासिक जगदीशपुर में आयोजित की जा रही है. यह केवल एक प्रशासनिक बैठक नहीं बल्कि उस ऐतिहासिक स्थल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास भी माना जा रहा है, जिसने 308 वर्षों बाद अपनी मूल पहचान वापस पाई है. कभी इस्लामनगर कहलाने वाला यह क्षेत्र अब फिर से जगदीशपुर के नाम से जाना जाता है. राज्य सरकार की डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठकों की श्रृंखला में यह आठवां महत्वपूर्ण पड़ाव होगा, जहां इतिहास, विरासत और विकास को एक मंच पर लाने की कोशिश की जाएगी.
क्यों खास है जगदीशपुर में होने वाली कैबिनेट बैठक?
भोपाल से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित जगदीशपुर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है. यहां स्थित गोंड महल, रानी महल और चमन महल प्रदेश की महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरों में गिने जाते हैं. राज्य सरकार का मानना है कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर कैबिनेट बैठक आयोजित करने से आम लोगों में उन स्थानों के प्रति जागरूकता बढ़ती है और पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलता है. इसी सोच के तहत अब जगदीशपुर को डेस्टिनेशन कैबिनेट का अगला केंद्र बनाया गया है.

Jagdishpur Cabinet Meeting: जगदीशपुर का किला
308 साल बाद लौटी थी जगदीशपुर की पहचान
जगदीशपुर का नाम वर्ष 2023 में सबसे ज्यादा चर्चा में आया था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस्लामनगर का नाम बदलकर फिर से जगदीशपुर करने की घोषणा की थी. सरकार के अनुसार, जगदीशपुर मूल रूप से देवड़ा राजपूत शासकों द्वारा बसाया गया था. यहां के शासक राजा नरसिंह देवड़ा थे. इतिहास के अनुसार अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद खान ने धोखे से राजा नरसिंह देवड़ा की हत्या कर इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और उसका नाम बदलकर इस्लामनगर रख दिया. तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाम परिवर्तन के समय कहा था कि यह केवल नाम बदलने का फैसला नहीं, बल्कि 308 वर्षों बाद ऐतिहासिक पहचान की वापसी है.

Jagdishpur Cabinet Meeting: जगदीशपुर क्यों है खास?
गौरवशाली इतिहास का गवाह है किला
जगदीशपुर का किला अपनी विशिष्ट वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है. यहां मौजूद महलों और स्मारकों में राजपूत, गोंड और मुगलकालीन स्थापत्य शैली का अनूठा संगम दिखाई देता है. इतिहासकारों के अनुसार, दोस्त मोहम्मद खान द्वारा सत्ता हासिल करने के बाद भी यह क्षेत्र लंबे समय तक अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने में सफल रहा. आज भी यहां की इमारतें उस दौर की कहानी बयां करती हैं.
एमपी में डेस्टिनेशन कैबिनेट मॉडल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक की परंपरा को लगातार आगे बढ़ाया है. राजधानी भोपाल से बाहर विभिन्न ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनजातीय महत्व वाले क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें आयोजित कर सरकार वहां की विरासत को राष्ट्रीय चर्चा में लाने का प्रयास कर रही है.
इस पहल को प्रदेशभर में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है.
अब तक कहां-कहां हो चुकी हैं कैबिनेट बैठकें?
- 3 जनवरी 2024 : जबलपुर के शक्ति भवन में कैबिनेट बैठक आयोजित हुई. यह बैठक वीरांगना रानी दुर्गावती की स्मृतियों से जुड़े महाकौशल क्षेत्र को समर्पित थी.
- 5 अक्टूबर 2024 : दमोह जिले के सिंग्रामपुर में बैठक आयोजित कर रानी दुर्गावती के शौर्य को नमन किया गया.
- 24 जनवरी 2025 : महेश्वर (खरगोन) में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की स्मृति में बैठक हुई.
- 20 मई 2025 : इंदौर के राजवाड़ा में अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती वर्ष के अवसर पर विशेष बैठक आयोजित की गई.
- 3 जून 2025 : पचमढ़ी स्थित राजभवन में जनप्रिय जननायक राजा भभूत सिंह की स्मृति में मंत्रिपरिषद की बैठक हुई.
- 9 दिसंबर 2025 : खजुराहो के महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर में बैठक आयोजित हुई, जिससे विश्व धरोहर स्थल को नई चर्चा मिली.
- 2 मार्च 2026 : बड़वानी जिले के नागलवाड़ी स्थित भीलट बाबा देवस्थल पर बैठक हुई, जो जनजातीय संस्कृति और परंपरा को समर्पित थी.
उज्जैन में भी प्रस्तावित है कैबिनेट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही संकेत दे चुके हैं कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी भविष्य में कैबिनेट बैठक आयोजित की जाएगी. इसके साथ ही कृषि कैबिनेट को भी प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित करने की योजना पर काम चल रहा है.
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