- इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन ने अपने बेस किचन को फ्लेमलेस किचन में बदलने की प्रक्रिया शुरू की
- आईआरसीटीसी के किचन में अब आधे से अधिक भोजन इलेक्ट्रिक इंडक्शन सिस्टम पर तैयार किया जा रहा
- भविष्य में बेस किचन की छत पर सोलर पैनल लगाकर वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत का उपयोग करने की योजना है
पश्चिम एशिया में बदले राजनीतिक हालतों के बीच इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने अपने किचन में बड़ा बदलाव किया है. आईआरसीटीसी अब अपने बेस किचन को फ्लेमलेस किचन की ओर शिफ्ट कर रहा है. इसके तहत अब यात्रियों के लिए बन रहा ज्यादातर खाना इलेक्ट्रिक इंडक्शन सिस्टम पर बनाया जा रहा है.
फ्लेमलेस किचन क्या है?
आईआरसीटीसी की रीबा ने बताया कि बेस किचन में आज की तारीख में 50 प्रतिशत खाना इलेक्ट्रिक इंडक्शन सिस्टम से बनाया जा रहा है. दाल, चावल, रोटी और कई सब्जियों की ग्रेवी इलेक्ट्रिक सिस्टम पर पकाया जा रहा है. आने वाले समय में हम इसे बढ़ाना चाहते हैं.
सोलर पर शिफ्ट होने की योजना
रीबा ने बताया कि आईआरसीटीसी आने वाले समय में ऐसी योजना पर काम कर रहा है जिसमें बेस किचन की छत पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे. इस तरह सोलर पैनल के माध्यम से वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल करके भोजन बनाया जा सकता है.
ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है. इस अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के कारण कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका असर किचन पर पड़ेगा. ऐसे में इस समस्या से निपटने के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन ने तकनीकि का सहारा लिया है ताकि यात्रियों को भोजना की समस्या नहीं हो.
सिलेंडर की समस्या?
रीबा ने कहा कि हमें अभी तक कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की किसी भी प्रकार की समस्या नहीं है. हमारे किचन में प्रतिदिन 25 हजार यात्रियों का खाना बनता है, जिसके लिए हमारे पास सभी तरह के पर्याप्त इंतजाम हैं. आीआरसीटीसी के बेस किचन में 1000 लोगो के भोजन के लिए औसतन एक सिलेंडर की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि इस लिहाज से फिलहाल एक बेस किचन में लगभग 25 सिलेंडर की जरूरत होती है. यह बेस किचन के स्वरूप पर भी निर्भर करता है. रीबा ने कहा कि हमें प्रतिदिन जितने सिलेंडर की जरूरत होती है, उसके लिए एंडवास में ही व्यवस्था करके रखते हैं ताकि किसी भी प्रकार से काम प्रभावित नहीं हो,
प्रतिदिन 16.5 लाख लोगों को मिल रहा भोजन
रेलवे का दावा है कि आईआरसीटीसी की ओर से देश में प्रतिदिन 16.5 लाख लोगों को भोजन परोसा जा रहा है. यह सुविधा फिलहाल निर्बाध रूप से जारी है. पिछले दिनों आईआरसीटीसी की तरफ से अपने कैटरिंग यूनिट्स को निर्देश दिए गए थे कि वर्तमान संकट के मद्देनजर गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है. ऐसे में अतिरिक्त इंतजाम जैसे इंडक्शन और ओवन किए जाएं ताकि यात्रियों को खाने-पीने की समस्या नहीं हो. साथ ही रेडी टू ईट भोजना भी तैयार रखने को कहा गया है.
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