Rajneesh Agrawal Rajya Sabha: "मुझे तो कोई जानकारी ही नहीं है... आप सच बोल रहे हैं क्या? किसी ने मुझे बताया भी नहीं..." फोन पर जब एनडीटीवी ने रजनीश अग्रवाल की प्रतिक्रिया के लिये उन्हें भाजपा की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची के बारे में बताया गया, तो कुछ पल के लिए रजनीश अग्रवाल को यकीन ही नहीं हुआ. फिर भावुक स्वर में उनके मुंह से निकला- "यह सिर्फ हमारी पार्टी में ही संभव है...". मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भाजपा ने अपने हिस्से की दो सीटों पर राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश महामंत्री रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है. लेकिन राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा रजनीश अग्रवाल के नाम की हो रही है.
कारण साफ है- ऐसे समय में जब राज्यसभा की दौड़ में अक्सर पूर्व मंत्री, बड़े जनाधार वाले नेता या लंबे समय से चुनावी राजनीति में सक्रिय चेहरे आगे दिखाई देते हैं, भाजपा ने एक ऐसे नेता पर भरोसा जताया है जो वर्षों से संगठन के पर्दे के पीछे रहकर पार्टी की चुनावी मशीनरी को मजबूत करता रहा है.
जिनकी पहचान मंच से नहीं, बूथ से बनी
सागर जिले के मंडीबामोरा कस्बे से आने वाले रजनीश अग्रवाल को भाजपा में बूथ प्रबंधन, संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति का विशेषज्ञ माना जाता है. ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त रजनीश ने अपनी राजनीतिक यात्रा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता युवा मोर्चा से शुरू की.
उनके नेतृत्व में प्रदेश के करीब 65 हजार बूथों का डिजिटलीकरण किया गया. विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा की सूक्ष्म चुनावी रणनीति हर 30 मतदाताओं पर "अर्ध-पन्ना प्रभारी" नियुक्त करने से लेकर बूथ स्तर पर वोट प्रतिशत बढ़ाने तक की योजना तैयार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. पार्टी नेताओं का मानना है कि हाल के चुनावों में भाजपा की लगातार सफलता के पीछे जिस मजबूत संगठनात्मक ढांचे ने काम किया, उसके प्रमुख शिल्पकारों में रजनीश अग्रवाल भी शामिल हैं.
कई बड़े नाम से संभावितों की लिस्ट में
राज्यसभा के लिए भाजपा के संभावित उम्मीदवारों की चर्चा में कैलाश विजयवर्गीय, डॉ. नरोत्तम मिश्रा, अरविंद भदौरिया और अखंड प्रताप सिंह जैसे कई बड़े नाम शामिल थे. लेकिन आख़िरकार पार्टी नेतृत्व ने एक ऐसे चेहरे को चुना जिसकी ताकत जनसभाओं की भीड़ नहीं, बल्कि बूथ स्तर का संगठन है. सूत्रों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की राय ने भी रजनीश अग्रवाल के नाम को मजबूती प्रदान की. भाजपा के भीतर इस फैसले को संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान देने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है. अहम ये भी है कि रजनीश अग्रवाल और नितिन नबीन भारतीय जनता युवा मोर्चा में साथ काम कर चुके हैं. 2011 में नितिन नबीन रजनीश अग्रवाल की शादी में भी शामिल हुए थे.
जब इस बारे में शिवराज सिंह चौहान से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा,
"मैं तो टिकट मांगने भी नहीं गया"
रजनीश अग्रवाल दिव्यांग हैं, लेकिन पार्टी के सहयोगी बताते हैं कि काम के मामले में वे अक्सर अपने साथियों से कहीं आगे निकल जाते हैं. राजनीति में तीन दशक बिताने के बावजूद उन्होंने शायद ही कभी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया हो. यही वजह है कि राज्यसभा का टिकट मिलने की खबर उनके लिए भी किसी आश्चर्य से कम नहीं थी. उन्होंने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, "हमारी पार्टी में एक सामान्य कार्यकर्ता को भी राज्यसभा जैसे सदन में भेजा जा सकता है.मैं तो टिकट मांगने कहीं गया भी नहीं. अभी घर पर ही बैठा हूं"
पर्दे के पीछे रहकर लगाई लंबी छलांग
सागर के एक छोटे कस्बे से निकलकर, छात्र राजनीति और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के रास्ते, राज्यसभा तक पहुंचने वाले रजनीश अग्रवाल की कहानी भाजपा के उस मॉडल की मिसाल बन गई है जिसमें कभी-कभी सबसे बड़ी राजनीतिक छलांग वे लोग लगाते हैं, जो सबसे लंबे समय तक पर्दे के पीछे काम करते हैं. भाजपा ने रजनीश अग्रवाल के साथ पंजाब से आने वाले राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को भी मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है. चुघ लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय हैं और जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और तेलंगाना जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों और क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. उनकी उम्मीदवारी के जरिए भाजपा ने एक ओर संगठन के जमीनी कार्यकर्ता रजनीश अग्रवाल को सम्मान दिया है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय नेतृत्व और रणनीतिक अनुभव को भी राज्यसभा में जगह देने का संतुलन बनाया है। चुघ की एंट्री को पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है.
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