रक्षाबंधन के बाद राजधानी भोपाल रविवार को एक बार फिर अपनी पुरानी सांस्कृतिक परंपरा के रंग में रंगी नजर आई. किन्नर समाज का पारंपरिक भुजरिया जुलूस पूरे उत्साह, श्रद्धा और भव्यता के साथ निकाला. मंगलवारा और बुधवारा से शुरू हुए इस जुलूस में भोपाल ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से आए हजारों किन्नरों ने हिस्सा लिया. रंग-बिरंगे परिधानों, सोने-चांदी के आभूषणों और आकर्षक श्रृंगार में सजे किन्नरों को देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ जुटी रही. पारंपरिक आस्था और आधुनिक अंदाज का अनोखा संगम इस जुलूस में साफ दिखाई दिया.
पारंपरिक भुजरिया जुलूस में उमड़ा उत्साह
भोपाल में किन्नर समाज का पारंपरिक भुजरिया जुलूस धूमधाम से निकाला. शहर के मंगलवारा और बुधवारा क्षेत्र से शुरू हुए इस चल समारोह में हजारों किन्नर शामिल हुए. जुलूस के दौरान पूरे मार्ग में उत्सव जैसा माहौल बना रहा. किन्नर समाज के लोगों ने पारंपरिक तरीके से भुजरिया पर्व मनाते हुए अपनी संस्कृति और परंपरा का प्रदर्शन किया.
सज-धजकर निकले किन्नर, बनी आकर्षण का केंद्र
जुलूस में शामिल किन्नर रंग-बिरंगे और आकर्षक परिधानों में नजर आए. कई किन्नरों ने भारी आभूषण पहने हुए थे, जबकि कुछ दुल्हन की तरह सजे हुए दिखाई दिए. सोने-चांदी के गहनों, विशेष मेकअप और अलग-अलग अंदाज में तैयार होकर पहुंचे प्रतिभागी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे. पूरे रास्ते लोग उनकी झलक पाने और तस्वीरें लेने के लिए उत्साहित दिखाई दिए.
बग्गियों और झांकियों ने बढ़ाई भव्यता
भुजरिया जुलूस में कई किन्नर बग्गियों और सजे हुए वाहनों में सवार होकर निकले. वहीं बड़ी संख्या में किन्नर सिर पर भुजरिया की टोकरियां रखकर चल रहे थे. अलग-अलग झांकियां और पारंपरिक प्रस्तुतियां जुलूस की भव्यता को और बढ़ा रही थीं. लोगों ने जगह-जगह खड़े होकर इस आयोजन का स्वागत किया.
फैशन शो जैसा नजर आया माहौल
भुजरिया पर्व के दौरान किन्नर समाज में सजने-संवरने की विशेष परंपरा रही है. इस बार भी कई प्रतिभागियों ने पारंपरिक और आधुनिक परिधानों का अनूठा मेल प्रस्तुत किया. किसी ने पारंपरिक वेशभूषा चुनी तो किसी ने आधुनिक फैशन को अपनाया. उनकी ड्रेस, मेकअप और प्रस्तुति को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे किसी बड़े फैशन शो का आयोजन किया गया हो.
खुशहाली और अमन-चैन के लिए मांगी दुआ
इस अवसर पर किन्नर समाज ने अच्छी बारिश, शहर और देश की खुशहाली तथा आपसी भाईचारे के लिए दुआ की. साथ ही नेपाल में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की सलामती और बेहतर भविष्य की भी कामना की गई. समाज के लोगों ने सभी के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहने की प्रार्थना की.
नवाबी दौर से जुड़ी है परंपरा
भोपाल में भुजरिया जुलूस की परंपरा कई दशकों पुरानी मानी जाती है. यह आयोजन शहर की सांस्कृतिक विरासत और गंगा-जमुनी तहजीब का महत्वपूर्ण हिस्सा है. नवाबी दौर से चली आ रही इस परंपरा को आज भी पूरे उत्साह के साथ निभाया जा रहा है. बदलते समय के बावजूद भुजरिया पर्व के प्रति लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ है.
प्रदेश और देश के कई हिस्सों से पहुंचे किन्नर
इस आयोजन में भोपाल और आसपास के इलाकों के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से भी किन्नर समाज के लोग पहुंचे. हजारों की संख्या में एक साथ शामिल होकर उन्होंने नृत्य, गीत-संगीत और पारंपरिक कार्यक्रमों के जरिए इस पर्व का उत्सव मनाया. इससे आयोजन का स्वरूप और भी भव्य हो गया.
परंपरा के साथ दिखी आधुनिकता की झलक
समय के साथ किन्नर समाज के पहनावे और प्रस्तुतियों में बदलाव भी देखने को मिला. कई प्रतिभागियों के परिधानों और प्रस्तुति में फिल्मी दुनिया और आधुनिक फैशन का प्रभाव साफ नजर आया. परंपरा और आधुनिकता का यह मेल इस जुलूस की विशेष पहचान बनकर सामने आया.
सुरक्षा और यातायात के रहे खास इंतजाम
भुजरिया जुलूस को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर पहुंचे थे. इसे देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए थे. पूरे मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की गई. अधिकारियों ने भी आयोजन पर नजर रखी ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो.
भोपाल की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक
किन्नर समाज का भुजरिया जुलूस सिर्फ एक धार्मिक या पारंपरिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भोपाल की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक माना जाता है. हर साल की तरह इस बार भी सज-धजकर निकले किन्नरों के इस अनोखे जुलूस ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा और पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल बना दिया.
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