विज्ञापन

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने पर सियासत तेज; ‘वाग्देवी भोजपाल’ प्रस्ताव पर BJP-कांग्रेस में तकरार

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के नाम बदलने का मामला अब केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. जहां एक ओर सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा व्यवस्था और क्रांतिकारियों के सम्मान का मुद्दा भी उठाया जा रहा है. आने वाले समय में यह विवाद और तेज होने के संकेत हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर भावनाओं और राजनीति दोनों से जुड़ा हुआ है.

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने पर सियासत तेज; ‘वाग्देवी भोजपाल’ प्रस्ताव पर BJP-कांग्रेस में तकरार
बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी नाम बदलने पर सियासत: ‘वाग्देवी भोजपाल’ प्रस्ताव पर MP में घमासान

Barkatullah University Name Change Controversy: भोपाल के बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने संस्थान का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसे अब अंतिम निर्णय के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा. NDTV ने इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस का पक्ष जानना चाहा, जिसमें दोनों पार्टी आमने-सामने आ गईं. एक तरफ भाजपा इसे क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक गौरव से जोड़ रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे अनावश्यक कदम बताते हुए इसका विरोध कर रही है. छात्रों के बीच भी इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.

कार्यपरिषद ने पास किया नाम बदलने का प्रस्ताव

भोपाल स्थित बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक में विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. एस.बी. सिंह ने बताया कि यह प्रस्ताव अब राज्य सरकार को अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा.

राजा भोज और ‘भोजपाल' नाम का हवाला

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नया नाम क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से प्रस्तावित किया गया है. राजा भोज के बौद्धिक योगदान और भोपाल के प्राचीन नाम ‘भोजपाल' को ध्यान में रखते हुए यह नाम सुझाया गया है.

बरकतउल्लाह भोपाली कौन थे?

वर्तमान में विश्वविद्यालय का नाम स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मोहम्मद बरकतउल्लाह भोपाली के नाम पर रखा गया है. वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारियों में शामिल थे और गदर आंदोलन से भी जुड़े रहे. उनका योगदान देश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण माना जाता है.

कांग्रेस का विरोध, नाम वापस बदलने की बात

नाम परिवर्तन के इस प्रस्ताव का कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया है. NDTV से पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और अन्य कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि उनकी सरकार सत्ता में आती है, तो विश्वविद्यालय का नाम फिर से बरकतउल्लाह किया जाएगा. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के फैसले ले रही है.

भाजपा ने बताया जनभावना का निर्णय

वहीं भाजपा ने इस फैसले का समर्थन करते हुए इसे जनता की भावना से जुड़ा कदम बताया है. प्रदेश भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि सरकार क्षेत्र की संस्कृति और गौरव को सामने लाने के लिए काम कर रही है और नाम परिवर्तन उसी दिशा में उठाया गया कदम है.

छात्रों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस पूरे मुद्दे पर विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच भी अलग-अलग राय देखने को मिल रही है. कुछ छात्रों का मानना है कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने से उसकी पहचान प्रभावित होगी, जबकि कुछ का कहना है कि ऐतिहासिक नाम रखने से क्षेत्रीय गौरव को बढ़ावा मिलेगा.

कार्यपरिषद में भी हुआ विरोध

विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की सदस्य डॉ. ताहिरा अब्बासी ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा नाम एक महान स्वतंत्रता सेनानी की स्मृति से जुड़ा है, इसलिए इसे बदलना उचित नहीं होगा. उनका सुझाव था कि यदि नया नाम देना ही है, तो उसके लिए नया विश्वविद्यालय स्थापित किया जाए.

शिक्षा व्यवस्था बनाम नाम परिवर्तन की बहस

कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था कई समस्याओं से जूझ रही है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में सत्र विलंब, स्टाफ की कमी और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है, बजाय नाम बदलने के.

सरकार का पक्ष: विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्था

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय एक स्वायत्त संस्था है और कार्यपरिषद द्वारा लिए गए निर्णय पर सरकार विचार करेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्ताव आने के बाद विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया जाएगा.

MP में नाम बदलने की परंपरा

मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में कई स्थानों के नाम बदले गए हैं. हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति, होशंगाबाद का नाम नर्मदापुरम और इस्लामनगर का नाम जगदीशपुर किया जा चुका है. इस पृष्ठभूमि में विश्वविद्यालय का नाम बदलने का मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक हो गया है.

आठ जिलों से जुड़ा है विश्वविद्यालय

बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय वर्ष 1970 में स्थापित हुआ था और 1988 में इसका नाम बदला गया था. यह विश्वविद्यालय भोपाल समेत आठ जिलों सीहोर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल और राजगढ़ को कवर करता है. विश्वविद्यालय में कला, विज्ञान, वाणिज्य, विधि, इंजीनियरिंग, प्रबंधन सहित कई विषयों में शिक्षा दी जाती है. सैकड़ों कॉलेज इससे संबद्ध हैं, जिससे इसका दायरा काफी व्यापक है.

यह भी पढ़ें : बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम अब 'मां वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी' होगा, जानें क्यों रखा गया ये नाम

यह भी पढ़ें : Raja Bhoj vs Barkatullah: यूनिवर्सिटी का नाम बदलने के प्रस्ताव पर शुरू हुई बहस, जानिए कौन थे मौलाना बरकतउल्ला भोपाली

यह भी पढ़ें : डिप्टी कलेक्टर पर युवती ने लगाए दुष्कर्म के आरोप; मुरैना में फेसबुक से शुरू हुआ था रिश्ता, FIR दर्ज

यह भी पढ़ें : “नागदा वाली ट्रेन से आऊंगा, मुझे लेने आ जाना”; कुवैत एयरपोर्ट हमले में मारे गए मंजूर अहमद के आखिरी शब्द

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com