15 अगस्त 1947 का समय नजदीक आ रहा था. सरदार पटेल भारत की 550 से ज्यादा रियासतों का देश में विलय की कोशिश लगे थे. सबसे ज्यादा समस्या होल्कर रियासत, हैदराबाद और भोपाल रियासत को लेकर आ रही थी. भोपाल रियासत के नवाब पाकिस्तान में विलय या फिर स्वतंत्र देश की चाहते थे. आज ये सोचकर ही हैरानी होती है कि भारत के मध्य में भोपाल रियासत का पाकिस्तान में विलय किस तरह होता?
भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह खान अपनी जिद पर अड़े थे. इसी बीच, भोपाल रियासत में कुछ ऐसी घटना घटी, जिसका असर रियासत के विलय पर पड़ा. हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार जोसी जोसेफ की नई किताब "बर्थ ऑफ नेशन" पब्लिश हुई है. इसमें रियासतों के भारत में विलय और राजघरानों की अंदरखाने साजिशों के किस्से बेहद तफ्सील से बताए गए हैं. भोपाल नवाब के अपनी बेटी की स्कूल फ्रेंड संग निकाह करने और घर में बगावत का कहानी भी किताब में विस्तार बताई गई है. भोपाल आजादी से पहले बड़ी रियासत में गिनी जाती थी. नवाब हमीदुल्लाह खान की नेटवर्थ आज के हिसाब से तकरीबन 15 हजार करोड़ यानी $1.8 बिलियन थी. उनकी संपत्तियों का मामला आज भी अदालतों में जारी है.
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100 साल में पहली बार किसी मर्द के हाथ आई भोपाल की गद्दी
बात 1926 की है, जब भोपाल में 100 साल से भी ज्यादा समय से चला आ रहा ताकतवर बेगमों का राज खत्म हुआ. यह सिर्फ एक सत्ता परिवर्तन नहीं था. नए नवाब बने हमीदुल्लाह खान. उन्हें यह गद्दी महज एक इत्तेफाक से मिली थी, क्योंकि उनके दोनों बड़े भाइयों का ताजपोशी से पहले ही इंतकाल हो गया था. नवाब बनते ही हमीदुल्लाह ने सब कुछ पलट कर रख दिया. उन्होंने अपनी पूर्वज बेगमों की उस सीधी-सादी और शांत जिंदगी को पूरी तरह से खत्म कर दिया.
भोपाल ने पहली बार देखी ऐसी नवाबी
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के चांसलर हमीदुल्लाह तबीयत मिजाज शख्स थे. उनके गद्दी पर बैठते ही बेगमों की सादगी की जगह अब शाही चकाचौंध ने ले ली थी. शिकार के लिए खास तौर पर मॉडिफाई गाड़ियां, शाही परिवार के लिए रोल्स-रॉयस और बेंटले कारों का काफिला और नए नवाब के इर्द-गिर्द हमेशा रहने वाला युवा महिलाओं का हुजूम. पोलो, हॉकी टूर्नामेंट और भव्य पार्टियां तो जैसे नवाब का रोज का शगल बन गई थीं. इन सबके बीच, भोपाल में ही अहमदाबाद पैलेस में बैठी उनकी मां, जो रियासत की आखिरी महिला शासक थीं, वो बस बेबसी से अपने शहर को हमेशा के लिए बदलते हुए देख रही थीं.

नवाब का शादी का ऐलान और घर में बगावत
फिर आया मई 1947 का वो वक्त, जब नवाब ने एक ऐसा ऐलान किया जिसने भोपाल के रूढ़िवादी शाही परिवार और आम अवाम, दोनों को सन्न कर दिया. उन्होंने अपनी दूसरी शादी का ऐलान कर दिया और हैरान करने वाली बात ये थी कि ये शादी उनकी अपनी सबसे बड़ी बेटी की ही एक स्कूल की सहेली के साथ होने जा रही थी. उनकी पत्नी और तीनों बच्चे इस फैसले से आगबबूला हो गए. आलम ये हुआ कि भोपाल का पूरा रसूखदार समाज अपनी वफादारी को लेकर दो खेमों में बंट गया."
अकेले पड़ गए नवाब, पाकिस्तान जाने को तैयार
इधर, नवाब भोपाल के पाकिस्तान में विलय या स्वतंत्र देश बनाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे. सरदार पटेल और वीपी मेनन का दबाव बढ़ता जा रहा है. नवाब साहब भी अपने घर में अलग-थलग पड़ गए थे. पत्नी और बच्चे खिलाफ थे. फिर 12 अगस्त का समय आया. हमीदुल्लाह खान को यकीन हो गया कि वो रियासत का भारत में विलय नहीं रोक सकते. वहीं, उनकी शादी की वजह से परिवार भी नाखुश है तो उन्होंने अपनी तलाकशुदा बेटी आबिदा सुल्तान को बुलवाया. वह भोपाल में हमीदुल्लाह खान के साथ ही रहती थीं.

नवाब साहब ने बेटी आबिदा (ऊपर फोटो) से कहा, "मैं पाकिस्तान जा रहा हूं. वहां पर गर्वनर जनरल बन जाऊंगा. तुम मुझे यहां से पांच लाख रुपए भेजती रहना. रियासत अब तुम संभालो." इतना सुनते ही बेटी आबिदा आगबबूला हो गई. उन्होंने इसे मानने से इनकार कर दिया. आबिदा ने कहा कि भोपाल को भारत को सौंपने के लिए वो जिम्मेदार नहीं होंगी. इस बात पर दोनों के बीच तीखी बहस हुई. नवाब ने अपने आप पर पिस्तौल तान कर बेटी के माथे पर लगा दी. इस पर बेटी ने कहा, "ठीक है मार दो मुझे". उसके बाद नवाब पूरी तरह टूट जाते हैं और पिस्तौल नीचे गिर जाती है.
एक जून 1949 को भोपाल का भारत में विलय हुआ. 4 फरवरी 1960 को 65 साल की उम्र हमीदुल्लाह खान का निधन हो गया.
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