Bhojshala: मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे लंबे विवाद में इंदौर स्थित उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए भोजशाला को मंदिर के रूप में स्वीकार किया है. इस फैसले से पहले पूरे धार शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और करीब 1200 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी. प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर सख्ती बरतने की चेतावनी भी दी थी. फैसले के दिन शुक्रवार होने और नमाज के समय को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता रखी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट का करेंगे रुख : शहर काजी
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद धार के शहर काजी ने कहा कि हम हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं. सलमान खुर्शीद ने बहुत अच्छा डिबेट किया. अब हम कोर्ट के फैसले का अध्ययन करेंगे और सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे. हम अपना दावा अब भी करेंगे. सुप्रीम कोर्ट से हमें उम्मीद है.
लंबे समय से चला आ रहा था विवाद
11वीं सदी के इस ऐतिहासिक स्मारक को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. हिंदू पक्ष भोजशाला को माता सरस्वती (वाग्देवी) का प्राचीन मंदिर मानता रहा है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है. इस बीच जैन समुदाय के एक वर्ग ने भी इसे प्राचीन जैन मंदिर और गुरुकुल होने का दावा किया था. धार भोजशाला मामले में विष्णुजैन ने कोर्ट के फैसले पर बताया कि धारशाला की पूरी इमारत को राजा भोज के द्वारा बनवाया गया है. कोर्ट ने पूजा-पाठ का अधिकार दिया है. अब इस परिसर में सिर्फ पूजा होगी, नमाज की अनुमति नहीं. कोर्ट ने कहा- ये कमाल औला मस्जिद नहीं है. मुस्लिम समाज सरकार के पास अपनी मांग रख सकते हैं. सरकार मुस्लिम समाज को वैकल्पिक जमीन दे. ये धार में हो सकता है.
एएसआई सर्वे ने बनाई फैसले की आधारभूमि
मामले में हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दिया था. इसके बाद 22 मार्च 2024 से शुरू हुए सर्वेक्षण ने 98 दिनों तक विस्तृत अध्ययन किया. एएसआई ने अपनी 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में कहा था कि मौजूदा संरचना से पहले यहां परमार काल का विशाल मंदिर था और निर्माण में मंदिर के अवशेषों का इस्तेमाल किया गया है.
दोनों पक्षों ने रखी अपनी-अपनी दलीलें
हिंदू पक्ष ने सर्वे में मिले शिलालेख, मूर्तियां और सिक्कों को मंदिर होने का प्रमाण बताया. वहीं मुस्लिम पक्ष ने एएसआई रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसे चुनौती दी. एएसआई ने अदालत को स्पष्ट किया कि सर्वे निष्पक्ष तरीके से किया गया और इसमें मुस्लिम विशेषज्ञ भी शामिल थे.
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