बस्तर: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खात्मे के बाद विकास की रफ्तार तेज हो गई है. प्रदेश कई जिलों में डेवलपमेंट (विकास) से जुड़े कई प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. लेकिन, छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ इलाके में इंद्रावती नदी पर बन रहा एक पुल ऐसा भी है, जिसका निर्माण 6 साल में भी बनकर तैयार नहीं हो पाया है. 1 किलोमीटर से भी कम दूरी वाले बेदरे पुल के निर्माण के लिए अब तक सिर्फ 8 पिलर बन पाए हैं, जिनकी सुरक्षा में छतीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (CAF) के 100 से ज्यादा जवान लगे हुए हैं. हैरानी की बात यह है कि बेदरे पुल नहीं बनने के कारण इस इलाके में रहने वाले लोगों को शहरी इलाके में जाने के लिए नदी पार करनी होती है. अगर, पुल बन जाता है तो यह अबूझमाड़ ही नहीं पूरे बस्तर इलाके के लिए वरदान साबित होगा. इससे महाराष्ट्र की सीमा महज 20 किमी दूर रह जाएगी. इससे इलाके के लोग बड़े राज्य से जुड़ सकेंगे. पुल के बनने से बस्तर और महाराष्ट्र के बीच व्यापारिक केंद्र भी बन सकता है, जिसका असर सीधे रोजगार पर दिखेगा. आइए, अब जानते हैं यह पुल अब तक क्यों नहीं बन सका, इसकी लागत कितनी है, पुल के इलाके की सुरक्षा जवान क्यों करते हैं, पुल का निर्माण कार्य क्यों रुक गया?

38 पिलर बनने थे, 28 करोड़ लागत भी बढ़ी
बीजापुर जिले में इंद्रावती नदी पर बन रहे करीब 930 मीटर लंबे पुल का जब निर्माण शुरू हुआ था तो इसकी अनुमानित कीमत 42 करोड़ रुपये बताई जा रही थी, लेकिन यह 6 साल से अधूरा पड़ा है. पुल के प्रस्तावित 38 पिलरों में अभी तक सिर्फ 8 पिलर ही खड़े हो पाए हैं, जबकि देरी के चलते की इसकी लागत 28 करोड़ रुपये और बढ़ गई है. ग्रामीणों के साथ सुरक्षाबल भी इसका पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं.

इस वजह से बंद हो गया था काम
जवानों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है. इस पुल का निर्माण बीच में ही नक्सली बाधाओं और सुरक्षा कारणों के चलते रुक गया था. निर्माण के समय नक्सलियों ने पुल बनाने वाली कंपनी के कर्मचारियों को धमकाया था और मशीनों नुकसान भी पहुंचाया. इसके अलावा एक कर्मचारी का अपहरण तक कर लिया था, जिसके बाद कंपनी ने पुल का निर्माण बंद कर दिया था. तब से यह परियोजना अधर में लटकी हुई है.

राशन-दवाइयां लाने के लिए नाव से या पैदल पार करते हैं नदी
अब जब सरकार नक्सल के खात्मे की बात करती है तो अबूझमाड़ के लोग भी विकास की उम्मीद कर रहे हैं और देश से कनेक्टविटी के लिए उन्हें इस पुल के निर्माण का बेसब्री से इंतजार है. पुल बनने से कई दूरस्थ गांव सीधे सड़क संपर्क से जुड़ जाएंगे और विकास की रफ्तार को नई दिशा मिलेगी.
पुल न होने के चलते ग्रामीण बड़ी मुश्किल से नदी पार करके बीजापुर पहुंचते हैं. पैदल और नाव के सहारे दोनों तरीके से नदी पार करनी होती है. साप्ताहिक बाजारों पर राशन और दवाईयां लेने मुश्किल से इस पार से उस पार आते जाते हैं.
पुल के पास पड़ी है निर्माण सामग्री
पुल निर्माण के दौरान ही CAF की 13 बटालियन D कंपनी की तैनाती की गई थी. जब पुल का निर्माण शुरू हुआ था तब यह क्षेत्र बहुत ज्यादा नक्सल ग्रसित था. हालांकि, अब नक्सल का खात्मा हो गया है, लेकिन पुल के आसपास अभी भी सीएएफ जवानों की तैनाती रहती है, क्योंकि यहां निर्माण सामग्री अभी पड़ी हुई है. इसके अलावा इस इलाके ग्रामीणों का आना-जाना भी रहता है. बारिश के समय नदी में पानी ज्यादा बढ़ने के बाद सरकार लोगों के लिए मोटरबोट की सुविधा मुहैया कराने की तैयारी कर रही है.
दोबारा शुरू होगा निर्माण
प्रशासन का कहना है कि टेंडर और अन्य प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं. बारिश का मौसम खत्म होते ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा और परियोजना को जल्द पूरा करने की कोशिश होगी.
कलेक्टर ने क्या कहा?
कलेक्टर विश्वदीप ने बताया कि जल्द ही अधूरे ब्रिज का काम फिर से तेजी से शुरू होगा. फिलहाल इस बार बारिश में इंद्रावती नदी के उस पार के ग्रामीणों के लिए हम नाव उपलब्ध करवा रहे हैं, ताकि नदी में ग्रामीणों को जोखिम न हो. साथ ही बेदरे का ब्रिज बनने से बीजापुर जिले से महाराष्ट्र और नारायणपुर जिला दोनों सुगमता से जुड़ जाएगा.
नागपुर तक मिल जाएगी कनेक्टविटी
बेदरे में बन रहा यह पुल अबूझमाड़ के लोगों को बीजापुर और महाराष्ट्र तक पहुंचने का रास्ता देगा. ब्रिज के बनने से महज 20 दूर महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले का भामरागढ़ रह जाएगा, जहां से नागपुर 300 किमी दूर है. फिर वहां से लोग मुंबई या कहीं भी देश के हिस्से में आ-जा सकेंगे.
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