- इंद्रावती के उस पार बसे हैं गांव.
- इन गांवों तक पहुंचना नहीं आसान, कोई कनेक्टविटी नहीं.
- नदी और जंगलों को पैदल पार करते हैं.
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में इंद्रावती नदी के पार घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के उस पार गांवों में पहली बार प्रशासन पहुंचा है. यह पूरा इलाका नक्सलियों का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन अब यहां नक्सली खत्म हो गए हैं और तस्वीर बदल रही है. कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव गुरुवार को सरकारी दफ्तरों से निकलकर जमीनी हकीकत जानने के लिए पालोड़ी और भिरसापारा पहुंचे. इन गांवों तक पहुंचने के लिए उन्हें 6-8 किमी तक पैदल चलना पड़ा, यह गांव गीदम ब्लॉक में आते हैं, जो अतिदुर्गम गांवों हैं.

जमीन पर बैठकर गांव वालों से जानी समस्याएं
घने जंगलों के बीच बसे इन गांवों में पहुंचकर कलेक्टर ने इमली के पेड़ की छांव तले ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर उनकी समस्याओं को जाना. उन्होंने बिजनी, पानी, राशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की जमीनी हकीकत को जाना. ग्रामीणों से बरसात के चार महीनों के लिए राशन की पहुंच के बारे में भी जानकारी ली गई और अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए.

साथ ही आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर बच्चों को दिए जा रहे पोषण आहार और शिक्षा गतिविधियों की समीक्षा की. वहीं, मितानिनों और ग्रामीणों से चर्चा कर गर्भवती महिलाओं, बच्चों के स्वास्थ्य और टीकाकरण व्यवस्था की जानकारी भी प्राप्त की.
आवागमन बाधित होने की समस्या
गुमलनार ग्राम पंचायत की सरपंच मालती इस्तामी ने बारिश के समय इंद्रावती नदी ओवरफ्लो होने के कारण आने-जाने को लेकर आवागमन बाधित होने की समस्या को उठाया, जिस पर कलेक्टर ने समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया.
पैदल चलकर पहली बार कलेक्टर के पहुंचने पर ग्रामीणों ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि जिले का कोई कलेक्टर पहली बार उनके गांव तक पहुंचा है. दंतेवाड़ा के वनांचल में प्रशासन और जनता के बीच भरोसे की यह नई पहल अब चर्चा का विषय बन गई है.
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